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सदन की कार्यवाही में व्यवधान डालने पर सपा के 7 सदस्यों को कठोरतम चेतावनी
Wed, 24 Feb 2021 08:24 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 24 Feb 2021 08:24 PM IST
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वेल में बैठे सपा के सदस्य।
- फोटो : amar ujala
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विधान परिषद सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने सदन की कार्यवाही में व्यवधान डालने पर सपा के 7 सदस्यों को कठोर चेतावनी दी है। इस चेतावनी में कहा गया है कि यह सदस्य भविष्य में सदन के अंदर लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध तो व्यक्त कर सकते हैं, लेकिन अपने मर्यादित आचरण से सदन की मर्यादा और पीठ का सम्मान बनाए रखें।
सभापति ने सदन में चेतावनी को पढ़कर सुनाते हुए कहा कि 23 फरवरी को कार्य परामर्शदात्री समिति की बैठक के बाद सदन की कार्यवाही अपराह्न 4:30 बजे प्रारंभ हुई। कार्य परामर्शदात्री समिति में जो निर्णय लिए गए थे, उनके खिलाफ सदस्य उदयवीर सिंह ने सदन की कार्यवाही में व्यवधान डाला। सभापति ने सदन को व्यवस्थित करने का प्रयास किया और उनको बैठने के निर्देश दिए। लेकिन, वह लगातार तेज आवाज में अपनी बात कहते रहे।
नियम 40 के अनुसार सभापति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह किसी सदस्य को भाषण बंद करने का निर्देश दे सकते हैं। यह भी कहा गया है कि जब विधेयक प्रमुख सचिव विधान परिषद की ओर से पटल पर रखे गए, उनको पारित करते समय इन 7 सदस्यों ने पीठ के विरुद्ध सभापति शर्म करो आदि पीठ के विरुद्ध नारे लगाए। जोकि, किसी भी तरह से औचित्यपूर्ण नहीं है। जबकि, नियमावली के नियम 39(3) के अनुसार उठाए गए सभी व्यवस्था के प्रश्नों का निर्णय करने का अधिकार सभापति को होता है और उनका निर्णय अंतिम होता है।
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जिन सदस्यों को चेतावनी दी गई है, वे हैं- उदयवीर सिंह, संजय लाठर, राजपाल कश्यप, आनंद भदौरिया, सुनील सिंह साजन, संतोष यादव सनी और राजेश यादव। कहा गया है कि ये सदस्य वेल में आ गए और सदन की कार्यवाही को नियम विरुद्ध तरीके से अव्यवस्थित करने का प्रयास किया। ऐसी दशा में इन सदस्यों को आदेश दिया जाता है कि वे भविष्य में सदन की मर्यादा का सम्मान करें। वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध व्यक्त कर सकते हैं, पर पीठ के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग उचित नहीं है।
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सभापति ने सदन में चेतावनी को पढ़कर सुनाते हुए कहा कि 23 फरवरी को कार्य परामर्शदात्री समिति की बैठक के बाद सदन की कार्यवाही अपराह्न 4:30 बजे प्रारंभ हुई। कार्य परामर्शदात्री समिति में जो निर्णय लिए गए थे, उनके खिलाफ सदस्य उदयवीर सिंह ने सदन की कार्यवाही में व्यवधान डाला। सभापति ने सदन को व्यवस्थित करने का प्रयास किया और उनको बैठने के निर्देश दिए। लेकिन, वह लगातार तेज आवाज में अपनी बात कहते रहे।
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नियम 40 के अनुसार सभापति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह किसी सदस्य को भाषण बंद करने का निर्देश दे सकते हैं। यह भी कहा गया है कि जब विधेयक प्रमुख सचिव विधान परिषद की ओर से पटल पर रखे गए, उनको पारित करते समय इन 7 सदस्यों ने पीठ के विरुद्ध सभापति शर्म करो आदि पीठ के विरुद्ध नारे लगाए। जोकि, किसी भी तरह से औचित्यपूर्ण नहीं है। जबकि, नियमावली के नियम 39(3) के अनुसार उठाए गए सभी व्यवस्था के प्रश्नों का निर्णय करने का अधिकार सभापति को होता है और उनका निर्णय अंतिम होता है।
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जिन सदस्यों को चेतावनी दी गई है, वे हैं- उदयवीर सिंह, संजय लाठर, राजपाल कश्यप, आनंद भदौरिया, सुनील सिंह साजन, संतोष यादव सनी और राजेश यादव। कहा गया है कि ये सदस्य वेल में आ गए और सदन की कार्यवाही को नियम विरुद्ध तरीके से अव्यवस्थित करने का प्रयास किया। ऐसी दशा में इन सदस्यों को आदेश दिया जाता है कि वे भविष्य में सदन की मर्यादा का सम्मान करें। वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध व्यक्त कर सकते हैं, पर पीठ के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग उचित नहीं है।