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कश्मीरी बातचीत- 72 साल बाद पूरा होगा पुश्तैनी मकान देखने का सपना
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72 साल बाद पूरा होगा पुश्तैनी घर देखने का सपना
लखनऊ। 72 साल पहले बंटवारे के समय 1947 में हुए दंगों के बाद पूरा परिवार दंगाइयों से घिर गया था। पिताजी बताते हैं कि तब वह 24 साल के थे और पूरा परिवार बारामूला के बर्बरशां इलाके में रहता था। बमुश्किल पिता जी परिवार के सदस्यों को बचा कर कश्मीर में अपना सब कुछ छोड़कर निकल पाए। इसके बाद उन्होंने लखनऊ में अपने एक रिश्तेदार के यहां पनाह लेकर पढ़ाई पूरी की। सिविल एविएशन में कॅरिअर बनाते हुए पायलट की नौकरी कर लखनऊ में ही बस गए।
हम तीनों भाईयों का जन्म लखनऊ में हुआ और यहीं शिक्षा प्राप्त कर कॅरिअर बनाया लेकिन सभी के दिल में कश्मीर में अपने पूर्वजों का पुश्तैनी घर देखने की इच्छा लगातार बनी रही। मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के ऐतिहासिक फैसले से अब अपने पूर्वजों की जमीन व पुश्तैनी घर देखने का सपना पूरा होगा। हम तीनों भाई स्थिति सामान्य होते ही एक साथ पुश्तैनी घर को देखने बारामूला जाएंगे और सब कुछ अनुकूल रहने पर हर संभव स्तर पर पुराने पुश्तैनी घर को खरीदकर इसे पाने का सपना पूरा करेंगे। - पवन, असीम, विशाल पिता पूरन प्रकाश टिक्कू के साथ
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लखनऊ। 72 साल पहले बंटवारे के समय 1947 में हुए दंगों के बाद पूरा परिवार दंगाइयों से घिर गया था। पिताजी बताते हैं कि तब वह 24 साल के थे और पूरा परिवार बारामूला के बर्बरशां इलाके में रहता था। बमुश्किल पिता जी परिवार के सदस्यों को बचा कर कश्मीर में अपना सब कुछ छोड़कर निकल पाए। इसके बाद उन्होंने लखनऊ में अपने एक रिश्तेदार के यहां पनाह लेकर पढ़ाई पूरी की। सिविल एविएशन में कॅरिअर बनाते हुए पायलट की नौकरी कर लखनऊ में ही बस गए।
हम तीनों भाईयों का जन्म लखनऊ में हुआ और यहीं शिक्षा प्राप्त कर कॅरिअर बनाया लेकिन सभी के दिल में कश्मीर में अपने पूर्वजों का पुश्तैनी घर देखने की इच्छा लगातार बनी रही। मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के ऐतिहासिक फैसले से अब अपने पूर्वजों की जमीन व पुश्तैनी घर देखने का सपना पूरा होगा। हम तीनों भाई स्थिति सामान्य होते ही एक साथ पुश्तैनी घर को देखने बारामूला जाएंगे और सब कुछ अनुकूल रहने पर हर संभव स्तर पर पुराने पुश्तैनी घर को खरीदकर इसे पाने का सपना पूरा करेंगे। - पवन, असीम, विशाल पिता पूरन प्रकाश टिक्कू के साथ
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