{"_id":"46588125ec405e308541c8662a3a0545","slug":"story-about-a-miser-officer-in-up","type":"story","status":"publish","title_hn":"बड़े कंजूस हैं साहब...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बड़े कंजूस हैं साहब...
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 22 Aug 2013 01:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शासन में जंगल से जुड़े महकमे के बड़े साहब ऑफिस के लोगों के बीच चर्चा में बने हुए हैं। असल में यहां आने से पहले साहब एक बड़े पद पर रह चुके हैं।
विज्ञापन
जितना बड़ा पद उतनी ही बड़ी कंजूसी। बैठकों में चाय भी परची से आती है। ऐसे में ऑफिस के लोगों का परेशान होना लाजमी है। पहले जो साहब इस महकमे को देख रहे थे।
विज्ञापन
उनकी स्टाइल के सभी मुरीद थे। बगैर किसी तामझाम के लोग उनसे मिल सकते थे। वह अपने स्टॉफ का भी पूरा ख्याल रखते थे। बैठकों में चाय के साथ ही बिस्कुट और खाने-पीने की तमाम चीजें अधीनस्थों को भी मिल जाती थी।
विज्ञापन
चतुर्थ श्रेणी केकर्मचारी तो ज्यादा ही खुश रहते थे। क्योंकि साहब खाने-पीने की चीजें मंगाते थे और पैसा वापस भी नहीं लेते थे। जितना पैसा बचता था, वह कर्मचारियों की जेब में चला जाता था।
अब ये साहब हैं कि पैसे देने की बात दूर की रही। चाय भी परची से मंगाते हैं। बेचारे कर्मचारी क्या करें। साहब की कंजूसी की चर्चा करके ही भड़ास निकाल रहे हैं।