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यूपी में महाहड़ताल, जरूरी सेवाएं ठप
शैलेंद्र श्रीवास्तव/लखनऊ
Updated Mon, 18 Nov 2013 08:17 AM IST
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उत्तर प्रदेश में छह दिन पुरानी राज्य कर्मियों की हड़ताल सातवें दिन से और तगड़ी होने जा रही है।
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कर्मचारी सोमवार से आवश्यक सेवाएं ठप करने पर अड़े हैं। आवश्यक सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से ठप किया जाएगा।
पहले दिन ऑप्टोमैट्रिक्स यानी आंखों की जांच से जुड़ी सेवाएं बंद की जाएंगी तथा ऑपरेशन में कर्मचारी शामिल नहीं होंगे।
इसके बाद 19 से सरकारी अस्पतालों में कर्मचारी ओपीडी के पर्चे नहीं बनाएंगे।
राज्य कर्मचारी अधिकार मंच की अगुवाई में विगत 12 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हुई है। अधिकार मंच ने चेतावनी दी थी रविवार तक उनकी मांगें न मानी गईं तो वह चरणबद्ध तरीके से आवश्यक सेवाएं ठप कर देंगे।
सरकार की तरफ से देर शाम तक हड़ताली कर्मचारियों की मांगों पर किसी तरह का कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसके चलते कर्मचारी सोमवार से आवश्यक सेवाएं ठप करने पर आमादा हैं।
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अधिकार मंच के बैनर तले रविवार को कर्मचारी संगठनों की बैठक हुई। इसमें तय किया गया कि सोमवार से आवश्यक सेवाएं चरणबद्ध तरीके से ठप की जाएंगी। इसमें सबसे पहले स्वास्थ्य सेवाओं को शामिल किया जाएगा।
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तो बंद हो जाएगी ओपीडी!
बैठक में तय किया गया कि 18 नवंबर से ऑप्टोमैक्ट्रिस सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। इसमें आंखों से जांच के साथ मोतियाबिंद के ऑपरेशन नहीं होने दिए जाएंगे। 19 नवंबर को को सरकारी अस्पतालों में ओपीडी के पर्चे बनाने के काम बंद कर दिए जाएंगे और जननी सुरक्षा योजना के चेक भी नहीं बनाए जाएंगे।
इसी तरह 20 नवंबर को लैब टेक्नीशियन काम करना बंद कर देंगे। इसमें आपातकालीन सेवाएं शामिल होंगी। इसमें पैथालॉजी जांच के साथ ईसीजी जांच का काम बंद कर दिया जाएगा।
21 नवंबर से नर्सें केवल एक शिफ्ट में काम करेंगी। मौजूदा समय वह तीन शिफ्टों में काम कर रही हैं। 24 नवंबर को पल्स पोलियो अभियान कार्यक्रम का बहिष्कार किया जाएगा, इसमें एनएएम और बहुउद्देशीय कर्मी काम पर नहीं जाएंगे।
सरकार को पूरा मौका दिया
राज्य कर्मचारी अधिकार मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य कर्मियों ने सरकार को पूरा मौका दिया है। आम जनता की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सेवाओं को पहले हड़ताल में शामिल नहीं किया। पर सरकार का रुख राज्य कर्मियों के प्रति ठीक नहीं है।
वह कर्मचारियों की मांगों का पहले भी अनदेखी कर रही थी और अब भी अनदेखी कर रही है। इसके चलते हड़ताल में आवश्यक सेवाओं को शामिल किया गया है। सरकार को चाहिए कि वह हठधर्मिता छोड़कर कर्मचारियों की जायज मांगे मान ले।