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भरवारा रेलवे पुल का काम जल्द शुरू कराएं : हाईकोर्ट
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लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गोमतीनगर के भरवारा रेलवे पुल मामले की बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए फिर सख्ती दिखाई। अफसरों से कहा, इसका काम जल्द शुरू करा दें।
राज्य सरकार के वकील ने कहा, जमीन लेने के लिए संबंधित लोगों से 23 सितंबर को बातचीत होनी है। इसमें समय लगेगा। प्रगति रिपोर्ट पेश करने के लिए और समय देने का आग्रह किया। इस पर कोर्ट ने कहा कि संबंधित अफसर मामले में कार्रवाई करें। अदालत लगातार निर्देश दे रही है। अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी।
मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश वैज्ञानिक स्वामी सत्यप्रकाश वेद विज्ञान सेवा समिति की जनहित याचिका पर दिया। इसमें इस ओवरब्रिज का निर्माण व्यापक जनहित में जल्द पूरा कराने का आग्रह किया गया है।
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इससे पहले 11 सितंबर को भी हाईकोर्ट ने काम शुरू न होने पर जानकारी तलब की थी। कहा था कि दो साल से प्रोजेक्ट लटका है। यह सुखद स्थिति नहीं है। जिम्मेदारों से पूछा था कि निर्माण शुरू कराने में कितना समय लगेगा। सरकारी वकील ने कोर्ट को ओवरब्रिज निर्माण के लिए जमीन लेने संबंधी प्रक्रिया जारी होने और जमीन के रेट तय करने की बातचीत शुरू होने की जानकारी दी थी। इस पर कोर्ट ने पूछा था कि क्या रेट तय हुए? क्या बातचीत शुरू हुई? इसमें कितना समय लगेगा? इसी का जवाब देने के लिए यह सुनवाई हुई थी।
...मगर आसान नहीं निर्माण की राह
जमीन का रेट तक तय नहीं
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद भी भरवारा रेलवे पुल का निर्माण कार्य जल्द शुरू हो पाना संभव नहीं है। अफसरों की सुस्ती से अभी जमीन अधिग्रहण का मुआवजा तय होने का काम लटका है। जमीन का रेट भी तय नहीं हो सका है। इसके लिए 23 सितंबर को किसानों और अन्य पक्षकारों के साथ बैठक होनी है।
85 निर्माण आ रहे आड़े
प्रस्तावित रेलवे पुल के दायरे में 85 दुकान-मकान और निर्माण आ रहे हैं। इन्हें मुआवजा देने के लिए आठ अप्रैल को सेतु निगम और राजस्व विभाग की टीम ने पैमाइश की थी। विरोध के चलते टीम को लौटना पड़ा था। इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ सका। भरवारा क्रॉसिंग 186 सी से रोजाना कई ट्रेनें गुजरती हैं। ऐसे में रेलवे पुल बनने से विराज खंड, जगपाल खेड़ा, खरगापुर व दुर्गापुरी कॉलोनी, शालीमार टाउनशिप और एमिटी विवि पहुंचने की राह आसान हो जाएगी।
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राज्य सरकार के वकील ने कहा, जमीन लेने के लिए संबंधित लोगों से 23 सितंबर को बातचीत होनी है। इसमें समय लगेगा। प्रगति रिपोर्ट पेश करने के लिए और समय देने का आग्रह किया। इस पर कोर्ट ने कहा कि संबंधित अफसर मामले में कार्रवाई करें। अदालत लगातार निर्देश दे रही है। अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी।
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मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश वैज्ञानिक स्वामी सत्यप्रकाश वेद विज्ञान सेवा समिति की जनहित याचिका पर दिया। इसमें इस ओवरब्रिज का निर्माण व्यापक जनहित में जल्द पूरा कराने का आग्रह किया गया है।
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इससे पहले 11 सितंबर को भी हाईकोर्ट ने काम शुरू न होने पर जानकारी तलब की थी। कहा था कि दो साल से प्रोजेक्ट लटका है। यह सुखद स्थिति नहीं है। जिम्मेदारों से पूछा था कि निर्माण शुरू कराने में कितना समय लगेगा। सरकारी वकील ने कोर्ट को ओवरब्रिज निर्माण के लिए जमीन लेने संबंधी प्रक्रिया जारी होने और जमीन के रेट तय करने की बातचीत शुरू होने की जानकारी दी थी। इस पर कोर्ट ने पूछा था कि क्या रेट तय हुए? क्या बातचीत शुरू हुई? इसमें कितना समय लगेगा? इसी का जवाब देने के लिए यह सुनवाई हुई थी।
...मगर आसान नहीं निर्माण की राह
जमीन का रेट तक तय नहीं
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद भी भरवारा रेलवे पुल का निर्माण कार्य जल्द शुरू हो पाना संभव नहीं है। अफसरों की सुस्ती से अभी जमीन अधिग्रहण का मुआवजा तय होने का काम लटका है। जमीन का रेट भी तय नहीं हो सका है। इसके लिए 23 सितंबर को किसानों और अन्य पक्षकारों के साथ बैठक होनी है।
85 निर्माण आ रहे आड़े
प्रस्तावित रेलवे पुल के दायरे में 85 दुकान-मकान और निर्माण आ रहे हैं। इन्हें मुआवजा देने के लिए आठ अप्रैल को सेतु निगम और राजस्व विभाग की टीम ने पैमाइश की थी। विरोध के चलते टीम को लौटना पड़ा था। इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ सका। भरवारा क्रॉसिंग 186 सी से रोजाना कई ट्रेनें गुजरती हैं। ऐसे में रेलवे पुल बनने से विराज खंड, जगपाल खेड़ा, खरगापुर व दुर्गापुरी कॉलोनी, शालीमार टाउनशिप और एमिटी विवि पहुंचने की राह आसान हो जाएगी।