बहुत लाभदायक है फसलों पर गोमूत्र का स्प्रे, जानें क्या-क्या है फायदे
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अच्छे पौधे की बढ़त यदि डीएपी, एनपीके और यूरिया से ही संभव होता तो सारे जंगल सूख जाने चाहिए। अभी तक ऐसा नहीं हुआ, इसका मतलब माटी और प्रकृति में यह तत्व पहले से ही मौजूद हैं। इन तत्वों को गाय के गोबर और गोमूत्र से बने जीवामृत और घनामृत से जाग्रत किया जा सकता है।
सैकड़ों किसानों ने प्राकृतिक कृषि तकनीक से सफलता की नई कहानियां लिखी हैं। खेती को फायदे का सौदा बनाकर उन्होंने किसानों के बीच मिसाल कायम की है। यह जानकारी गोपेश्वर गौशाला में प्राकृतिक कृषि तकनीक प्रशिक्षण कार्यशाला में सोमवार को दी गई।
गौशाला परिवार ने क्षेत्र के किसानों की खातिर अच्छी पहल की है। किसानों को प्राकृतिक तरीके से खेती करने का मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है। किसानों करे कम लागत में अधिक पैदावार के बारे में जानकारी दी गई।
गौशाला में प्राकृतिक तकनीक से तैयार की गई फसलों से किसानों को रूबरू कराया गया। प्रबंधक उमाकांत गुप्ता ने बताया कि खेती में बढ़ते केमिकल के उपयोग से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वहीं लागत अधिक होने की वजह से किसानों की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।
गोबर-गोमूत्र की खाद कीटनाशक व फफूंदनाशक
इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर गोपेश्वर गौशाला समिति और मुनींद्र भरत ने प्राकृतिक खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ाने की पहल शुरू की है। इसके तहत किसानों को मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
दक्ष किसान इस तकनीक से गुणकारी उपज पैदा कर रहे हैं।
कार्यशाला में भदेसरमऊ के गिरिजाशंकर मौर्य, आंट गढ़ी सौंरा के विजय बहादुर सिंह, दरियापुर के शमशेर सिंह, रेवरी से रामशंकर, मुंडियारा से सुरेश, कसमंडी कलां के किशन कुमार ने प्राकृतिक खेती के अनुभव बताए।
यह किसान गाय के गोबर से बनी खाद के साथ आम के बाग में गोमूत्र का स्प्रे कर प्राकृतिक खेती का लाभ उठा रहे हैं। गौशाला में तीन सौ से अधिक गौवंश हैं, जिनके गोबर और गोमूत्र से खाद, कीटनाशक और फफूंदनाशक बनाने का मुफ्त प्रशिक्षण लेकर किसान लाभ उठा रहे हैं।