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कंटिन्यूइंग पैरामेडिकल एजुकेशन की शुरुआत करने वाला पहला संस्थान बना केजीएमयू
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कंटिन्यूइंग पैरामेडिकल एजुकेशन की शुरुआत करने वाला पहला संस्थान बना केजीएमयू
पैरामेडिकल छात्र भी चिकित्सा पद्धतियों के प्रति अपडेट रहें इसके लिए केजीएमयू ने कंटिन्यूइंग पैरामेडिकल एजुकेशन (सीपीएमई) की शुरुआत की है। चिविवि पहला ऐसा संस्थान है, जहां पैरा मेडिकल छात्रों के लिए इस प्रकार का कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल संस्थान इसका संचालन करेगा।
डीन पैरामेडिकल प्रो. विनोद जैन ने बताया कि एमबीबीएस डॉक्टरों के लिए सीएमई होती रहती हैं, नर्सिंग के लिए सीएनई। पैरामेडिकल छात्रों के लिए इस प्रकार का कोई कार्यक्रम नहीं होता, इसलिए इसकी शुरुआत की गई है। साल में तीन बार संस्थान में पैरामेडिकल के लिए सीपीएमई होगी। अगली सीपीएमई फरवरी में प्रस्तावित है। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने होंगे जो पूरी तरह से निशुल्क होंगे। इसमें छात्रों को उनके क्षेत्र से जुड़े विषय दिए जाएंगे, जिसपर उन्हें लेक्चर देना होगा। इसके लिए वह फैकल्टी की मदद ले सकते हैं।
इस कार्यक्रम में पैरामेडिकल के क्षेत्र में आ रही नयी तकनीक व बदलाव के प्रति छात्रों को जानकारी मिलेगी। साथ ही उन्हें सबसे अच्छी तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। प्रो. जैन ने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रम पैरामेडिकल को अपडेट करने के लिए आवश्यक होते हैं। फिलहाल किसी भी चिकित्सा संस्थान में पैरामेडिकल के लिए प्रकार के कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाते हैं। केजीएमयू ने इस दिशा में पहल की है। कोरोना काल के समाप्त होने पर दूसरे संस्थानों को भी इस कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा।
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पैरामेडिकल छात्र भी चिकित्सा पद्धतियों के प्रति अपडेट रहें इसके लिए केजीएमयू ने कंटिन्यूइंग पैरामेडिकल एजुकेशन (सीपीएमई) की शुरुआत की है। चिविवि पहला ऐसा संस्थान है, जहां पैरा मेडिकल छात्रों के लिए इस प्रकार का कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल संस्थान इसका संचालन करेगा।
डीन पैरामेडिकल प्रो. विनोद जैन ने बताया कि एमबीबीएस डॉक्टरों के लिए सीएमई होती रहती हैं, नर्सिंग के लिए सीएनई। पैरामेडिकल छात्रों के लिए इस प्रकार का कोई कार्यक्रम नहीं होता, इसलिए इसकी शुरुआत की गई है। साल में तीन बार संस्थान में पैरामेडिकल के लिए सीपीएमई होगी। अगली सीपीएमई फरवरी में प्रस्तावित है। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने होंगे जो पूरी तरह से निशुल्क होंगे। इसमें छात्रों को उनके क्षेत्र से जुड़े विषय दिए जाएंगे, जिसपर उन्हें लेक्चर देना होगा। इसके लिए वह फैकल्टी की मदद ले सकते हैं।
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इस कार्यक्रम में पैरामेडिकल के क्षेत्र में आ रही नयी तकनीक व बदलाव के प्रति छात्रों को जानकारी मिलेगी। साथ ही उन्हें सबसे अच्छी तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। प्रो. जैन ने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रम पैरामेडिकल को अपडेट करने के लिए आवश्यक होते हैं। फिलहाल किसी भी चिकित्सा संस्थान में पैरामेडिकल के लिए प्रकार के कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाते हैं। केजीएमयू ने इस दिशा में पहल की है। कोरोना काल के समाप्त होने पर दूसरे संस्थानों को भी इस कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा।
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