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लखनऊ के सुनियोजित विकास के लिए विशेष आर्थिक पैकेज आवश्यक : डॉ. राजेश्वर सिंह
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सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह।
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लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर लखनऊ के लिए विशेष आर्थिक, नगरीय नियोजन एवं प्रशासनिक पैकेज आगामी राज्य बजट में शामिल करने का अनुरोध किया है। जलभराव निस्तारण और किला मोहम्मदी नाले के पुनर्निर्माण के लिए लगभग 175 करोड़ की स्वीकृति देने पर मुख्यमंत्री का आभार भी जताया है।
डॉ. सिंह ने कहा कि लखनऊ की आबादी वर्ष 1991 के 16.7 लाख से बढ़कर अब 42-43 लाख हो गई है। इसका निर्मित क्षेत्र 48 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 310 वर्ग किलोमीटर से अधिक हो चुका है। लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली और बाराबंकी को मिलाकर बने 27,826 वर्ग किलोमीटर के उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) के समन्वित विकास की चुनौती भी सामने है। राजधानी का नियोजन नगर सीमा तक सीमित नहीं रह सकता। इसके लिए वर्ष 2050 तक का एकीकृत क्षेत्रीय रोडमैप आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जलभराव, यातायात दबाव, सीवर की अपर्याप्तता, 500 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियां, प्रतिदिन लगभग 2,000 मीट्रिक टन ठोस कचरा और करीब 18.5 लाख टन लिगेसी वेस्ट लखनऊ के तीव्र विस्तार से उत्पन्न समस्याएं हैं। भूजल दोहन प्राकृतिक पुनर्भरण से लगभग 17 गुना तक पहुंच चुका है। उन्होंने शहरी नियोजकों, भूजल विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों, अभियंताओं, परिवहन योजनाकारों और वित्त विशेषज्ञों की एक उच्चाधिकार प्राप्त बहुवर्षीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा। कहा कि इसमें एलडीए, नगर निगम, जल निगम, भूगर्भ जल विभाग, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा आवास एवं शहरी नियोजन विभाग का समन्वय हो और इसकी अध्यक्षता पर्याप्त वरिष्ठ अधिकारी करें।
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डॉ. सिंह ने नई अवैध कॉलोनियों और अनधिकृत निर्माणों पर पूर्ण रोक लगाने की भी मांग की। कहा कि कोई अवैध कॉलोनी रातों-रात नहीं बनती। एलडीए, नगर निगम और तहसील के अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने म्युनिसिपल एवं ग्रीन बॉन्ड, मीटर आधारित जल-सीवर शुल्क, रूफटॉप सोलर, 15 मेगावाट शिवरी परियोजना और पूर्ण डिजिटलीकरण से राजस्व रिसाव रोकने पर भी बल दिया। डॉ. राजेश्वर सिंह ने ग्रीन लखनऊ मिशन-2035 प्रारंभ करने का भी प्रस्ताव रखा। इसके तहत मापनीय हरित लक्ष्य, जलाशयों एवं आर्द्रभूमियों की बहाली, गोमती पारिस्थितिकी का संरक्षण, प्रमुख सड़कों, मेट्रो और आउटर रिंग रोड के किनारे ग्रीन कॉरिडोर आदि का प्रावधान किया जाना चाहिए।
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डॉ. सिंह ने कहा कि लखनऊ की आबादी वर्ष 1991 के 16.7 लाख से बढ़कर अब 42-43 लाख हो गई है। इसका निर्मित क्षेत्र 48 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 310 वर्ग किलोमीटर से अधिक हो चुका है। लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली और बाराबंकी को मिलाकर बने 27,826 वर्ग किलोमीटर के उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) के समन्वित विकास की चुनौती भी सामने है। राजधानी का नियोजन नगर सीमा तक सीमित नहीं रह सकता। इसके लिए वर्ष 2050 तक का एकीकृत क्षेत्रीय रोडमैप आवश्यक है।
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उन्होंने कहा कि जलभराव, यातायात दबाव, सीवर की अपर्याप्तता, 500 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियां, प्रतिदिन लगभग 2,000 मीट्रिक टन ठोस कचरा और करीब 18.5 लाख टन लिगेसी वेस्ट लखनऊ के तीव्र विस्तार से उत्पन्न समस्याएं हैं। भूजल दोहन प्राकृतिक पुनर्भरण से लगभग 17 गुना तक पहुंच चुका है। उन्होंने शहरी नियोजकों, भूजल विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों, अभियंताओं, परिवहन योजनाकारों और वित्त विशेषज्ञों की एक उच्चाधिकार प्राप्त बहुवर्षीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा। कहा कि इसमें एलडीए, नगर निगम, जल निगम, भूगर्भ जल विभाग, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा आवास एवं शहरी नियोजन विभाग का समन्वय हो और इसकी अध्यक्षता पर्याप्त वरिष्ठ अधिकारी करें।
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डॉ. सिंह ने नई अवैध कॉलोनियों और अनधिकृत निर्माणों पर पूर्ण रोक लगाने की भी मांग की। कहा कि कोई अवैध कॉलोनी रातों-रात नहीं बनती। एलडीए, नगर निगम और तहसील के अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने म्युनिसिपल एवं ग्रीन बॉन्ड, मीटर आधारित जल-सीवर शुल्क, रूफटॉप सोलर, 15 मेगावाट शिवरी परियोजना और पूर्ण डिजिटलीकरण से राजस्व रिसाव रोकने पर भी बल दिया। डॉ. राजेश्वर सिंह ने ग्रीन लखनऊ मिशन-2035 प्रारंभ करने का भी प्रस्ताव रखा। इसके तहत मापनीय हरित लक्ष्य, जलाशयों एवं आर्द्रभूमियों की बहाली, गोमती पारिस्थितिकी का संरक्षण, प्रमुख सड़कों, मेट्रो और आउटर रिंग रोड के किनारे ग्रीन कॉरिडोर आदि का प्रावधान किया जाना चाहिए।