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यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन: अभी नहीं बनी पार्टियों की समन्वय समिति, सिर्फ बयानों में ही सिमटा सीट बंटवारा

Fri, 25 Sep 2026 11:00 PM IST
रोहित मिश्र अजीत बिसारिया, अमर उजाला लखनऊ
अजीत बिसारिया, अमर उजाला लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Fri, 25 Sep 2026 11:00 PM IST
सार

SP-Congress alliance: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे की सुगबुगाहट तो तेज है लेकिन अभी इसको लेकर बातचीत नहीं हुई है। 

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SP-Congress alliance in UP: No coordination committee yet formed, seat-sharing talks confined to mere statemen
यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे की सुगबुगाहट तो तेज है, लेकिन जमीनी स्तर पर औपचारिक वार्ता की शुरुआत अभी तक नहीं हो सकी है। दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग की बातचीत आगे बढ़ाने के लिए न तो अब तक कोई आधिकारिक बैठक हुई है और न ही लोकसभा चुनाव की तरह किसी समन्वय समिति का गठन किया गया है। तमाम राजनीतिक चर्चाओं के बीच दोनों पार्टियां फिलहाल एक-दूसरे के रुख को भांपते हुए वेट एंड वॉच की रणनीति पर चलती दिखाई दे रही हैं।

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राजनीतिक सूत्र मानते हैं कि सीट बंटवारे पर मीडिया बयानों के जरिये प्रेशर पॉलिटिक्स पूरी तरह से हावी है। एक तरफ कांग्रेस पार्टी 2017 के गठबंधन और हालिया लोकसभा चुनाव के बेहतर नतीजों के आधार पर अपनी मजबूत दावेदारी जता रही है। कांग्रेस राज्य में करीब 100 से 120 सीटों के दावे के साथ बातचीत की मेज पर आना चाहती है।
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दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी केवल किसी पुराने फॉर्मूले या गणितीय आंकड़े के आधार पर सीटें बांटने के मूड में नहीं है। सपा नेतृत्व का स्पष्ट रुख है कि सीटों का आवंटन केवल सीटों की संख्या पर नहीं, बल्कि जीतने की क्षमता (विनेबिलिटी) के ठोस आधार पर तय होगा। सपा नेतृत्व का मानना है कि उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और उनके बीच है, इसलिए केवल उन्हीं सीटों पर कांग्रेस को अवसर दिया जाना व्यावहारिक होगा, जहां उसकी स्थिति वास्तव में मजबूत हो।

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शीर्ष नेताओं का पहले बात करना जरूरी

सपा नेताओं का तर्क है कि सीटों के किसी भी गणितीय फॉर्मूले पर बात शुरू करने से पहले दोनों दलों के शीर्ष नेताओं अखिलेश यादव, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के बीच एक प्राथमिक वार्ता होना जरूरी है। शीर्ष स्तर पर रणनीति और दिशा तय होने के बाद ही अधिकृत समन्वय कमेटी का गठन किया जाएगा, जो विधानसभावार व्यावहारिक आंकड़ों के आधार पर वार्ता को आगे बढ़ाएगी। फिलहाल अधिकृत कमेटी न होने के कारण राज्यस्तरीय नेताओं के बीच जुबानी जंग भी देखने को मिल रही है, जिसे दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व फिलहाल अधिक तवज्जो देते हुए नहीं दिख रहा है।

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