{"_id":"6675cf6b20d2fa1d07008723","slug":"sp-and-congress-alliance-will-remain-in-haryana-and-maharashtra-also-2024-06-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP: हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव में भी साथ दिखेंगे सपा और कांग्रेस, राहुल-खरगे से ही बात करेंगे अखिलेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव में भी साथ दिखेंगे सपा और कांग्रेस, राहुल-खरगे से ही बात करेंगे अखिलेश
Sat, 22 Jun 2024 12:37 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Sat, 22 Jun 2024 12:37 AM IST
सार
अखिलेश यादव की पीडीए रणनीति यूपी के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुई है। इस पीडीए रणनीति का विस्तार अब अन्य राज्यों में भी करने की सोच के साथ आगे बढ़ा जा रहा है।
विज्ञापन
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
हरियाणा और महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी सपा और कांग्रेस की साझेदारी रहेगी। इस रणनीति के साथ दोनों दल आगे बढ़ रहे हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से गठबंधन पर बात करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ही अधिकृत होंगे, ताकि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव जैसी तल्खी दुबारा पैदा न हो सके।
विज्ञापन
राहुल गांधी ने हाल ही में कहा था कि यूपी के दो लड़के हिंदुस्तान की राजनीति को मोहब्बत की दुकान बनाएंगे-खटाखट-खटाखट। इसे भी इस बात का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि कांग्रेस अन्य राज्यों के चुनाव में सपा को साथ रखने की इच्छुक है। अखिलेश की पीडीए रणनीति यूपी के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुई है। इस पीडीए रणनीति का विस्तार अब अन्य राज्यों में भी करने की सोच के साथ आगे बढ़ा जा रहा है।
विज्ञापन
इस साल अक्तूबर में महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव होने हैं। अगले साल की शुरुआत में दिल्ली और उसके बाद अक्तूबर-नवंबर 2025 में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। सपा महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा सीटों के लिए अपना दावा कर रही है। महाराष्ट्र में पिछले चुनाव में उसके दो विधायक जीते थे। हरियाणा में भी करीब 20 सीटों पर मुस्लिम और यादव समीकरण प्रभावी है। सपा नेतृत्व चाहता है कि अन्य राज्यों में उसकी हिस्सेदारी बढ़े, ताकि उसे राज्य पार्टी से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल सके।
विज्ञापन
मध्य प्रदेश के पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के एक बयान ने दोनों दलों के रिश्तों को काफी तल्ख कर दिया था। तब विधानसभा चुनाव के दौरान अखिलेश ने कांग्रेस और भाजपा को एक ही थैली का चट्टा-बट्टा तक करार दिया था। हालांकि, लोकसभा चुनाव के दौरान इस तल्खी को दूर कर लिया गया। सूत्र बताते हैं कि वैसी स्थिति दुबारा पैदा न हो, इसके लिए तय हुआ है कि गठबंधन को आगे बढ़ाने के संबंध में अखिलेश यादव से बातचीत सिर्फ राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन करेंगे। इन तीनों नेताओं के बीच हुए निर्णयों को गठबंधन के लिहाज से फाइनल माना जाएगा।