पुलिस वाले ही अपराधियों से कर रहे कारतूस तस्करी का धंधा!
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पुलिस व पीएसी के प्रतिबंधित बोर के कारतूसों की अपराधियों, नक्सलियों व डकैतों को सप्लाई का धंधा वेस्ट यूपी में बड़े पैमाने पर चल रहा है।
एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक के मुताबिक अभी तक लगभग दो दर्जन आर्मोररों की भूमिका सामने आई है। इसके साक्ष्य मिले हैं कि वे प्रतिबंधित कारतूसों की बिचौलियों के माध्यम से सप्लाई कर रहे हैं।
प्रारंभिक दौर में लगभग एक दर्जन आर्मोररों के नाम सामने आए थे, जो अब बढ़कर दो दर्जन तक पहुंच गए हैं। इन सभी के खिलाफ साक्ष्य हैं। इन्हें और पुख्ता किया जा रहा है। इसके अलावा इनकी सूची डीजीपी को भेजी जा रही है, ताकि जरूरी कार्रवाई की जा सके।
इसके पहले 2010 में भी एसटीएफ ने कई आर्मोररों को गिरफ्तार कर बड़े पैमाने पर हो रही प्रतिबंधित बोर के सरकारी कारतूसों और खाली खोखों की सप्लाई करने का भंडाफोड़ किया था।
अब 2015 में फिर अलीगढ़ से एक आर्मोरर व एक सिपाही समेत तीन को गिरफ्तार कर नए सिरे से चालू हुए सरकारी कारतूसों की तस्करी के धंधे का खुलासा किया।
इसलिए नहीं हुई ज्यादा गिरफ्तारी
एसटीएफ के सामने इस अवैध कारोबार में लिप्त कई अन्य लोगों के नाम सामने आ चुके हैं, लेकिन एसटीएफ इस बार बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां नहीं कर रही है।
कारण यह है कि जिनके नाम सामने आ रहे हैं, वे सभी पुलिस या पीएसी में तैनात हैं। आरोप के घेरे में आए लोगों के खिलाफ एसटीएफ ने साक्ष्य संकलन की कवायद शुरू कर दी है।
इस धंधे में वेस्ट यूपी के कई जिलों के पुलिस कर्मियों के नाम सामने आ रहे हैं। ये मैनपुरी, इटावा, कानपुर, मथुरा, फीरोजाबाद, आगरा, अलीगढ़ समेत कई जिलों में तैनात हैं।