फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Society's pain and social harmony seen in folk songs

Lucknow News: लोक गीतों में दिखी समाज की पीड़ा और सामाजिक समरसता

Thu, 27 Feb 2025 02:08 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 27 Feb 2025 02:08 AM IST
विज्ञापन
Society's pain and social harmony seen in folk songs
लोक गीत प्रस्तुत करते कलाकार।
लखनऊ। गोमतीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में मंगलवार को यूपी, उत्तराखंड और बिहार की स्थानीय बोलियों में लोकगीतों की प्रस्तुति हुई। लोकगीतों में जाति व्यवस्था, लैंगिक भेदभाव, शिक्षा और बेरोजगारी जैसी समस्याओं के साथ ही सामाजिक समरसता की झलक नजर आई। गीतकारों ने गांव की बोलियों में स्थानीय समस्याएं बखूबी उजागर की।
विज्ञापन

श्रुति संस्थान के अनुसार, कार्यक्रम में करीब 10 नए गीतों का विमोचन भी किया गया। बिहार के गायक कुमार निराला ने मगही भाषा में मोर अंखियां नींद नाही लोकगीत गाकर पलायन की पीड़ा और मजदूर वर्ग की कठिनाइयों को दर्शाया।
विज्ञापन

उत्तराखंड के गायक तारा सिंह ने कुमाऊंनी भाषा में बाखड़ी भैंसी नीला आकाशा लोक गीत की प्रस्तुति दी। यह गीत जंगल और पर्यावरण संघर्ष की कहानी कहता है। उत्तर प्रदेश के नरेंद्र ने टीम के साथ अवधी भाषा में महंगइया की प्रस्तुति दी। यह गीत रोजमर्रा की कठिनाइयों और जनता की वास्तविक स्थिति को सामने रखता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed