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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Snakes bite from June to September and even in mild sunlight

Lucknow News: जून से सितंबर और गुनगुनी धूप में भी काट लेते हैं सांप

Wed, 17 Sep 2025 02:53 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 17 Sep 2025 02:53 AM IST
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Snakes bite from June to September and even in mild sunlight
लखनऊ। सर्पदंश न्यूनीकरण कार्यक्रम के तहत 18 जनपदों के प्रत्येक तहसील से आए एक-एक चिकित्सकों को सर्पदंश से तत्काल उपचार के मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें बताया गया कि सांप देखते या सुनते नहीं हैं और न ही दूध पीते हैं। न ही उन पर नागमणि होती और न दिमाग। सांप के बारे में भ्रांति है कि वह जोडे़ में रहता है, ऐसा नहीं है।
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उन्होंने बताया कि वह आहट आने पर भोजन समझ कर वार करते है। सांप धमक से भागते हैं। जून से सितंबर तक और र्दी में गुनगुने धूप में भी सांप काटने की घटना बढ़ जाती है, इसलिए इन दिनों में सतर्क रहें। ये भी बताया कि कई बार सांप काटने के बाद घबराहट में हार्ट अटैक से मृत्यु हो जाती है।
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इस अवसर पर राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने कहा कि सांप काटने पर चिकित्सक पूरी संवेदनशीलता के साथ पीड़ित का इलाज करें, न कि उसे अन्य अस्पताल भेजें। सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति के इलाज के लिए एक-एक क्षण महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सा का प्रमुख केंद्र होते हैं। इसलिए वहां एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध होना अति आवश्यक है। राहत आयुक्त ने कहा कि प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एंटी स्नेक वेनम की रियल टाइम माॅनिटरिंग और लाइव ट्रैकिंग की जानकारी राहत आयुक्त कार्यालय में संचालित स्नेक बाइट मिटिगेशन पोर्टल पर शीघ्र उपलब्ध होगी।
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भानु चन्द्र गोस्वामी ने कहा कि राहत आयुक्त कार्यालय के हेल्पलाइन नम्बर 1070 पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र और उस पर एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता के लिए मैपिंग करायी जा रही है। उन्होंने बताया कि जिन चिकित्सकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। नोडल आफिसर डॉ. पंकज सक्सेना ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 38 प्रजाति के सांप पाए जाते हैं, जिनमें 18 प्रजाति के सांप विषैले होते हैं।

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की प्रोफेसर शैफाली गौतम व डाॅ. नीलकमल मिश्रा ने बताया कि घबराने से जहर नर्वस सिस्टम में तेजी से फैलता है। उन्होंने चिकित्सकों को सीपीआर (आपातकालीन जीवन रक्षक प्रक्रिया) के संबंध में प्रशिक्षित करते हुए एम्बूबैग की सही जानकारी दी।
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