फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   sleepng disorder increasing risk of road accident

नींद की बीमारी से बढ़ रहे सड़क हादसे

Thu, 18 Jul 2019 10:04 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jul 2019 10:04 AM IST
विज्ञापन
sleepng disorder increasing risk of road accident
स्लीप एप्निया (नींद की बीमारी) से पीड़ित वाहन चालक सड़क हादसे और ऐसे खतरों को बढ़ा रहे हैं। केजीएमयू के डॉक्टरों की टीम के अध्ययन में सामने आया कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले करीब 23 फीसदी लोग इस बीमारी के शिकार हैं। स्लीप एप्निया की वजह से एकाग्रता टूटती है और दुर्घटनाएं होती हैं। अध्ययन में ये भी कहा गया कि ड्राइविंग लाइसेंस बनाते समय इन्हें चिह्नित कर हादसों को रोका जा सकता है।
विज्ञापन


सबसे पहले ये जानें स्लीप एप्निया है क्या
स्लीप एप्निया निद्रा से जुड़ी गंभीर समस्या है। केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्यकांत इसकी गंभीरता को लेकर बताते हैं कि इस बीमारी में सोते समय 10 सेकंड तक के लिए सांस रुक जाती है। इससे रक्त में ऑक्सीजन का स्तर गिरता है और कुछ सेकंड के लिए मष्तिस्क मांसपेशियों को संकेत देने में विफल हो जाता है। यानी मस्तिष्क शून्य जैसा हो जाता है।
विज्ञापन

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया- यह सबसे सामान्य प्रकार हैं। यह तब होता है जब नींद में गले की मांसपेशियों की शिथिलता के चलते श्वसनमार्ग आंशिक या पूर्ण रूप से अवरुद्ध होने लगता है, इससे अक्सर लोग जोर से खर्राटे लेते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

सेंट्रल स्लीप एप्निया- ये कम पाया जाता है। इसमें मस्तिष्क सांस लेने को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों को संकेत देने में विफल रहता है। इससे ग्रस्त लोग भी खर्राटे लेते हैं। इसमें सेंट्रल नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है।
कॉम्प्लेक्स स्लीप एप्निया- यह ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया और सेंट्रल स्लीप एप्निया का मिला-जुला रूप होता है।
कब होती है ज्यादा समस्या
ऐसा रात में कई बार होता है। सुबह के वक्त ज्यादा यह समस्या ज्यादा होती है।
कैसे जानें कि स्लीप एप्निया के शिकार हो रहे
इसका प्राथमिक लक्षण है जोर से खर्राटे आना, उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक, अनियमित दिल की धड़कन, मधमेह आदि। यह पूरी तरह से उपचार योग्य है। कुछ दवाएं, डिवाइस और अंत में सर्जरी के जरिए इसका इलाज किया जाता है।
18 करोड़ लोग देश में पीड़ित
आंकड़ों के मुताबिक देश में लगभग 18 करोड़ लोग स्लीप एप्निया से पीड़ित है।ं जबकि पूरी दुनिया में लगभग 90 करोड़ इससे पीड़ित हैं।
-----------------------
ऐसे किया अध्ययन
राजधानी में दो रीजनल ट्रांसपोर्ट आफिस (आरटीओ) हैं। केजीएमयू की टीम ने यहां लाइसेंस बनवाने आए 542 पर अध्ययन किया। ये सभी पुरुष थे और इनकी उम्र 20 से 50 साल के बीच थी। इनके बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई), ब्लड प्रेशर, धूम्रपान, तंबाकू व शराब पीने जैसी आदतों समेत पूरा ब्यौरा तैयार किया गया। इसके साथ ही खर्राटा लेने, थकान महसूस करने, एप्निया से संबंधित, ब्लड प्रेशर, गर्दन की समस्या, बॉडी मास इंडेक्स के आंकड़े जुटाकर जोखिम का निर्धारण किया गया।
स्लीप एप्निया के साथ ही कई और समस्याएं मिलीं
लाइसेंस बनवाने आए इन लोगों में 23 फीसदी हाई रिस्क वाले पाए गए। यानी ये स्लीप एप्निया से पूरी तरह ग्रसित थे। इसी तरह करीब 40.4 फीसदी ब्लड प्रेशर, 17. 1 फीसदी गर्दन की समस्या से पीड़ित पाए गए, 12.3 फीसदी खर्राटे की समस्या तो 10.5 फीसदी थकान अथवा अनिद्रा के शिकार पाए गए।
उम्रवार यह मिली स्थिति
आब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया के शिकार इन लोगों की उम्र के हिसाब से आकलन किया गया। इसमें ओएसए रिस्क वाले 6.7 फीसदी 35 साल तक के, 35 से 45 साल की उम्र वाले 34 फीसदी और 45 साल से अधिक उम्र वाले 73 फीसदी पाए गए। जाहिर है कि बस चालकों में ज्यादातर 35 से 50 साल की उम्र वाले हैं।
ये रहे अध्ययन में शामिल
इस शोध टीम में केजीएमयू रेस्पिरेटरी विभाग के डॉ. अभिषेक दुबे, डॉ. दर्शन बजाज, डॉ. स्वाति दीक्षित शामिल रहे। गाइड के रूप में रेस्पिरेटरी विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत, और डॉ. बालेंद्र प्रताप सिंह शामिल रहे। इसे यूरोपियन रेस्पिरेटरी जर्नल ने भी प्रकाशित किया है।

----------
नई गाइडलाइन बनाने की जरूरत
स्लीप एप्निया के शिकार लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस बनाने समय जांच की जाए तो सड़क हादसों के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसके लिए अभी तक देश में कोई गाइड लाइन नहीं है। जबकि अन्य विकासशील देशों में इसकी गाइडलाइन बनी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed