{"_id":"69c004753b9246188c0f46f5","slug":"sitapur-two-bike-riders-died-after-being-hit-by-a-dumper-2026-03-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sitapur: डंपर की टक्कर से बाइक सवार दो युवकों की मौत, दोनों साथ में रहकर लखनऊ में नौकरी करते थे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sitapur: डंपर की टक्कर से बाइक सवार दो युवकों की मौत, दोनों साथ में रहकर लखनऊ में नौकरी करते थे
Sun, 22 Mar 2026 08:32 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, सीतापुर
अमर उजाला नेटवर्क, सीतापुर
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Sun, 22 Mar 2026 08:32 PM IST
सार
दुर्घटना में मृतक दीपक और इंद्रराज के घर में मातम छाया हुआ है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर फैली हुई है। थानाध्यक्ष ने बताया कि मौके पर चालकों के पास से हेलमेट नहीं मिला है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कमलापुर में बिसवां-सिधौली मार्ग पर कम्हरिया पुल चौराहे पर रविवार सुबह डंपर व बाइक की टक्कर में दो दोस्तों की मौत हो गई। दोनों लखनऊ में ही रहकर साथ में नौकरी करते थे।
विज्ञापन
रामपुरकलां के चौंड़िया कोठार निवासी दीपक (19) व सिधौली के तेलई गांव निवासी इंद्रराज (20) गहरे दोस्त थे। दोनों लखनऊ में राजा श्री प्रोडक्शन में काम करते थे। फैक्टरी में मजदूरों की कमी होने पर जिले के युवाओं को वहां पर ले जाकर रोजगार दिलवाते थे। इसी सिलसिले में ये दोनों शनिवार को पलिया गांव गए थे। यहां पर कुछ युवाओं से फैक्टरी में काम करने के लिए तैयार किया।
विज्ञापन
रविवार सुबह पलिया गांव से लखनऊ जाने के लिए बाइक से निकले थे। गांव से करीब एक किलोमीटर दूर कम्हरिया पुल चौराहे के पास सामने से आ रहे डंपर से उनकी बाइक टकरा गई। जमीन पर गिरने के बाद दीपक व इंद्रराज को डंपर ने रौंद दिया। मौके पर ही दोनों की मौत हो गई। हादसे के बाद चालक डंपर लेकर भाग गया। पुलिस ने दोनों शवों को अस्पताल भेजते हुए परिजनों को मामले की जानकारी दी। थानाध्यक्ष इतुल चौधरी ने बताया कि मौके पर चालकों के पास से हेलमेट नहीं मिला है। वाहन की तलाश की जा रही है।
विज्ञापन
घर का एकलौता था दीपक
कमलापुर इलाके में हुए हादसे में जान गंवाने वाले दीपक और इंद्रराज के घर में मातम छाया हुआ है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर फैली हुई है। दीपक के पिता रामू का रो-रोकर बुरा हाल बना हुआ है। रामू ने बताया कि दो बहनों के बीच वह अकेला भाई था। साथ ही वह परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद था। कम उम्र में ही घर का बोझ उठा रहा था। परिवार की माली हालत ठीक न होने के कारण लखनऊ में काम करके घर पर पैसे भेजता था। इससे घर का खर्चा चलता था। बहनें अपनी भाई की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। वह बार बार भाई भाई कहकर बेहोश हो रही थी। परिजन उनको ढांढ़स बंधा रहे थे फिर भी उनकी आंखों से आंसू कम होने का नाम नहीं ले रहे थे।