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यूपी में इतिहास का सबसे छोटा शीत सत्र : सिर्फ दो दिन चला सत्र, भाजपा ने तोड़ा जनता दल का रिकॉर्ड
Tue, 06 Dec 2022 10:51 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 06 Dec 2022 10:51 PM IST
सार
इस बार शीतकालीन सत्र की कार्यवाही दो दिन में कुल 7 घंटे 18 मिनट चली। नियम 51 के तहत 135 सूचनाएं मिली है। इनमें से वक्तव्य के लिए छह सूचना और ध्यानाकर्षण के लिए 129 सूचना को स्वीकार किया गया। नियम 301 के तहत मिली सभी 96 सूचनाएं स्वीकार की गईं।
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यूपी विधानसभा
- फोटो : amar ujala
विस्तार
विधानसभा में इस साल सिर्फ दो दिन शीतकालीन सत्र चला। ऐसा कर भाजपा सरकार ने जनता दल की मुलायम सिंह यादव सरकार का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। जबकि शीतकालीन सत्र तीन दिन पांच से सात दिसंबर तक आयोजित करने का निर्णय हुआ था। इसके मुताबिक एजेंडा भी जारी किया गया था लेकिन दूसरे दिन मंगलवार को सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। सपा के मुख्य सचेतक मनोज पांडेय का दावा है कि यह इतिहास का सबसे छोटा सत्र है। उधर, संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने दावा किया कि इससे पहले एक दिन का भी सत्र हुआ है।
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उधर, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव भी मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव के चलते दोनों दिन सदन में मौजूद नहीं रहे। गौरतलब है कि सपा ने सरकार पर सिर्फ तीन दिन का सत्र आयोजित करने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में सरकार ने वर्ष 1990 में जनता दल की मुलायम सिंह यादव सरकार के शासन में तीन दिन (5 से 7 मार्च) का सत्र आयोजित करने का प्रमाण पेश किया था।
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6 घंटे 28 मिनट चला सदन
इस बार शीतकालीन सत्र की कार्यवाही दो दिन में कुल 7 घंटे 18 मिनट चली। नियम 51 के तहत 135 सूचनाएं मिली है। इनमें से वक्तव्य के लिए छह सूचना और ध्यानाकर्षण के लिए 129 सूचना को स्वीकार किया गया। नियम 301 के तहत मिली सभी 96 सूचनाएं स्वीकार की गईं। नियम 56 के तहत 15 सूचनाएं मिली। सदन में 354 तारांकित और 1482 अतारांकित प्रश्न प्राप्त हुए। इनमें से 204 प्रश्न उत्तरित हुए हैं।
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इस साल 16 दिन चला सदन
विधानसभा कार्यसंचालन प्रक्रिया के तहत यथासंभव वर्ष में न्यूनतम 90 दिन सदन का संचालन होना चाहिए लेकिन इस वर्ष अब तक विस का संचालन 16 दिन किया गया।
- 29 मार्च को विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के लिए सदन आहूत किया गया।
- 18वीं विधानसभा का पहला सत्र 23 से 28 मई, 31-31 मई (कुल आठ दिन) तक चला।
- द्वितीय सत्र 19 से 23 सितंबर (5 दिन) तक चला।
- तृतीय सत्र 5-6 दिसंबर (दो दिन) चला।
बिजनेस पूरा हो गया, इसलिए सत्र समाप्त किया
जिस बिजनेस के लिए सदन आहूत किया गया था, वह पूरा हो गया है इसलिए सदन की कार्यवाही को एक दिन पहले स्थगित किया गया। इससे पहले एक-एक दिन का सदन भी आयोजित किया गया है। -सुरेश खन्ना, संसदीय कार्य मंत्री
जनहित के मुद्दे पर चर्चा से भाग रही सरकार
सरकार ने शीतकालीन सत्र का तीन दिन का कार्यक्रम कैबिनेट से जारी किया था। सोमवार को कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में भी 7 दिसंबर तक सदन चलाना तय हुआ था। 7 दिसंबर का कार्यक्रम भी जारी हुआ लेकिन सरकार जनहित के मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहती है। विधानसभा अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव या विशेष कार्यक्रम के लिए एक दिन का सत्र हो सकता है। -मनोज पांडेय, मुख्य सचेतक सपा विधायक दल
सदन को लंबा चलाने में राजनीतिक दल इच्छुक नहीं
पूर्व महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह का मानना है कि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में सभी दलों के नेता मौजूद रहते हैं। उन्हें तय करना चाहिए कि सदन की कार्यवाही लंबी चले। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों की इच्छाशक्ति में कमी के कारण सदन संचालन की अवधि धीरे-धीरे कम होती जा रही है। सदस्य पहले सदन में जनता से जुड़े मुद्दे व विकास पर चर्चा करते थे। अब सदन केवल औपचारिक हो रहा है, इसलिए महत्व भी कम हो रहा है। अब सिर्फ एक दिन वॉकआउट और एक दिन विरोध प्रदर्शन की औपचारिकता होती है। राजनीतिक दलों को चाहिए कि सदन का पर्याप्त अवधि तक संचालन कर वहां चर्चा करें।