सरेशाम चौराहे पर शूटआउट, युवक को मारी गोली, अस्पताल के बाहर तड़पता रहा, मौत
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लखनऊ के गाजीपुर थानाक्षेत्र के सेक्टर-25 चौराहे पर शनिवार शाम करीब साढ़े चार बजे बाइक सवार बदमाशों ने सिक्योरिटी गार्ड संदीप कुमार यादव (25) को गोली मार दी। वारदात के वक्त चौराहे पर तैनात ट्रैफिक पुलिस के जवान खिसक लिए। राहगीरों ने घायल को सामने सीएनएस अस्पताल में भर्ती कराने की कोशिश की, लेकिन डॉक्टरों ने मना कर दिया।
इसके बाद घायल युवक अस्पताल के बाहर तड़पता रहा। सूचना पर पहुंची पुलिस घायल को लोहिया अस्पताल ले गई, जहां उसकी मौत हो गई। युवक की मौत से आक्रोशित राहगीरों ने हंगामा कर अस्पताल में तोड़फोड़ की। पुलिस ने किसी तरह समझा-बुझाकर लोगों को शांत कराया।
इंस्पेक्टर गाजीपुर गिरजा शंकर त्रिपाठी ने बताया कि इटौंजा के कुम्हरावां भगतखेड़ा निवासी गंगाराम यादव का बड़ा बेटा संदीप कुमार यादव विभूतिखंड स्थित सिक्योरिटियंश इंडिया लि. में गार्ड है। सिक्योरिटी कंपनी रिटायर्ड पुलिस अधिकारी की है। कंपनी कई निजी संस्थानों की नकदी जमा करने का काम करती है।
शनिवार को संदीप ने दोस्त सर्वेश संग इंदिरानगर के चर्चित अस्पताल की नकदी निजी बैंक में जमा कराई। इसके बाद सर्वेश ने उसे वैन से ही सेक्टर-25 चौराहे से दो सौ मीटर पहले कट के पास छोड़ दिया। यहां से संदीप पैदल ही चौराहे की तरफ जा रहा था। सीएनएस अस्पताल के सामने बाइक सवार बदमाशों ने उसे गोली मार दी। गोली चलते ही भगदड़ मच गई और ट्रैफिक पुलिस चौराहा छोड़कर भाग निकली। राहगीरों ने घायल को सीएनएस अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने भर्ती करना तो दूर घायल को बाहर करवा दिया।
आधे घंटे तक राहगीरों ने किया हंगामा, लगाया जाम
संदीप की मौत होने की सूचना मिलते ही सैकड़ों राहगीरों ने अस्पताल व पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रिंग रोड पर जाम लगा दिया। करीब आधे घंटे तक हंगामा व प्रदर्शन चलता रहा। इस बीच सीओ गाजीपुर अवनीश्वर श्रीवास्तव, इंस्पेक्टर गाजीपुर, इंदिरानगर एसओ मुकुल प्रकाश वर्मा, गुडंबा इंस्पेक्टर रामसूरत सोनकर टीम संग मौके पर पहुंच गए। लोगों को समझाकर शांत कराया। इसके बाद जाम समाप्त हुआ। रिंग रोड से हटने के बाद राहगीरों ने अस्पताल में धावा बोल दिया। लेकिन पुलिस ने लोगों को खदेड़कर अस्पताल का मेन गेट बंद कराया। साथ ही अन्य थानों से भी फोर्स बुला ली गई।
इकलौता कमाने वाला था संदीप
संदीप की बहन रेखा की ससुराल जानकीपुरम में है। लोहिया अस्पताल पहुंची रेखा के मुताबिक, पिता गंगाराम यादव किसान है और संदीप इकलौता कमाने वाला था। परिवार में बहन मंजू, छोटा भाई प्रदीप, मां दर्शन देई, संदीप की पत्नी संध्या और तीन साल की बेटी नेहा है। रेखा ने बताया कि संदीप अपने साथ बैग लेकर चलता था। जो पुलिस को नहीं मिला है। आशंका है कि हमलावरों ने बैग लूटने के लिए ही गोली मारी है।
बंद लिफाफे व सील रकम लेकर जाते हैं बैंक
इंस्पेक्टर ने बताया कि सिक्योरिटी कंपनी के कर्मचारी निजी कंपनियों से सील बंद नकदी व बंद लिफाफा लेकर बैंक जाते हैं, जहां बैंककर्मी ही लिफाफा व सील बंद नकदी खोलते हैं। रुपये जमा होने के बाद ही कर्मचारियों को पता चलता है कि कितनी रकम जमा हुई। इसकी पर्ची वह कंपनी के कैशियर के पास जमा करवा देते हैं। युवक के दोस्त सर्वेश से पूछताछ की गई। पुलिस लूट व निजी कारणों को आधार बनाकर वारदात की जांच की जा रही है।
छह साल से करता था काम, आठ महीने पहले आया सर्वेश
इंस्पेक्टर ने बताया कि संदीप कंपनी में छह साल से काम कर रहा था। वहीं, बाराबंकी के कोतवाली निवासी सर्वेश आठ महीने पहले ही आया है। सर्वेश कंपनी की वैन चलाता है। पुलिस को संदेह है कि कंपनी के ही किसी ने तो ज्यादा रकम लेकर जाने की मुखबिरी तो नहीं की। इस बिंदु पर भी जांच की जा रही है। नकदी न मिलने पर बदमाशों ने संदीप को गोली मार दी हो। सर्वेश से संदीप के बैग के बारे में भी पूछताछ की गई है।