शिया वक्फ बोर्ड ने विजय माल्या को भेजा नोटिस
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शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने मेरठ में वक्फ की जमीन कब्जाने के मामले में शराब व्यवसायी विजय माल्या को नोटिस भेजा है। बोर्ड के मुताबिक, वक्फ की जमीन उन्हें अवैध ढंग से हस्तांतरित की गई है।
उन्हें 10 अगस्त को इंदिरा भवन स्थित वक्फ बोर्ड के कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि अगर उस दिन माल्या ने अपना पक्ष नहीं रखा तो बोर्ड वक्फ हित में फैसला लेने को स्वतंत्र होगा।
शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के प्रशासनिक अधिकारी सैय्यद जाफर हुसैन ने बताया कि अब्दुल्लापुर (मेरठ) स्थित वक्फ सैय्यद मोहम्मद टी-2554 की संपत्ति यूनाइटेड स्प्रिट्स प्राइवेट लिमिटेड ने अवैध रूप से खरीद ली है। इस कंपनी के एमडी विजय माल्या हैं।
शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अभिलेखों के अनुसार, यह संपत्ति अब्दुल्लापुर निवासी स्वर्गीय सैय्यद मोहम्मद ने 26 अप्रैल 1918 को वक्फ को दी थी।
वक्फनामे के अनुसार यह लीज अवैध
20 अप्रैल, 1937 को सैय्यद मोहम्मद के बेटे मंजूर अहमद आदि ने वक्फ की जमीन 50 साल की लीज पर लाला हंसराज को फैक्ट्री ‘सेंट्रल डिस्टलरी एंड केमिकल वर्क्स’ चलाने के लिए दे दी। वक्फनामे के अनुसार यह लीज अवैध थी। वक्फ अधिनियम के तहत भी इसे शराब के उत्पादन के लिए नहीं दिया जा सकता था। 1987 में लीज की अवधि पूरी हो गई।
विजय माल्या को जारी नोटिस में कहा गया है कि वक्फ की संपत्ति लाल हंसराज और उनके परिवार के सदस्यों से यूनाइटेड स्प्रिट्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम हस्तांतरित करवाकर शराब की फैक्ट्री चलाई जा रही है।
लाल हंसराज अवैध पट्टेदार थे और उन्हें जमीन बेचने का अधिकार नहीं था। वक्फ अधिनियम, 1955 की धारा 51 के तहत वक्फ संपत्ति का क्रय-विक्रय दंडनीय अपराध है।
इसलिए 10 अगस्त को वह इस प्रकरण से संबंधित सभी अभिलेख के साथ बोर्ड कार्यालय में उपस्थित हों। नोटिस बंगलुरू और दुबई स्थित उनके पतों पर भेजा गया है।