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अयोध्या के जेहन में सुरक्षित हैं शहाबुद्दीन की यादें
अमर उजाला ब्यूरो, फैजाबाद
Updated Sun, 05 Mar 2017 12:39 PM IST
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लगभग तीन दशक पुराने और अब तक अनसुलझे अयोध्या के मंदिर-मस्जिद विवाद पर हिंदी गजल के दूसरे दुष्यंत कुमार कहे जाने वाले यमुना प्रसाद उपाध्याय की ये लाइनें आज बरबस ताजा हो गई, जब बाबरी आंदोलन के पुरोधा रहे सैय्यद शहाबुद्दीन भी इस दुनिया में नहीं रहे। उपाध्याय की पंक्तियां है...
अयोध्या है हमारी और हम सब हैं अयोध्या के
मगर सुर्खी में सिंहल और शहाबुद्दीन रहते हैं।
बाबरी मस्जिद आंदोलन के पैरोकार सैय्यद शहाबुद्दीन का अयोध्या से वर्षों पुराना नाता रहा। आंदोलन के सिलसिले में वह कई बार यहां आ चुके हैं। आंदोलन को लेकर उनकी यादें लोगों के जेहन में एक बार फिर ताजा हो गई। सैय्यद शहाबुद्दीन बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक और जनता दल के महासचिव थे।
जनता दल के बैनर तले इसी आंदोलन के सिलसिले में दिल्ली में उनके साथ गिरफ्तारी देने वाले कामरेड सूर्यकांत पांडेय बताते हैं कि दिल्ली में उन्होंने 78 लोगों के साथ गिरफ्तारी दी थी। कहते हैं कि इस आंदोलन को लेकर वह कितना संजीदा थे, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सन 1990 में विवादित ढांचे को आंशिक क्षतिग्रस्त किए जाने के बाद अयोध्या कूच को लेकर वह पूरे सुरक्षा तंत्र को चकमा देकर फैजाबाद पहुंच गए थे।
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बताते हैं कि रौनाही तक तो वह चार पहिया से आए लेकिन पुलिस की जांच पड़ताल देख वह चकमा देकर बाइक से ही गली कूचों से होते हुए कमेटी के संयोजक यूनुस सिद्दीकी के यहां पहुंच गए। अयोध्या कूच के चलते उन्हें फार्ब्स इंटर कालेज के पास गिरफ्तार कर लिया गया।
इसके अलावा आंदोलन के सिलसिले में एक बार और भी उन्होंने यहां पहुंच लोगों से संपर्क किया था। यहां आंदोलन को लेकर उनकी मुहिम से खालिद अहमद, कैप्टन अफजाल जैसे कई अन्य लोग भी जुड़े रहे
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अयोध्या है हमारी और हम सब हैं अयोध्या के
मगर सुर्खी में सिंहल और शहाबुद्दीन रहते हैं।
बाबरी मस्जिद आंदोलन के पैरोकार सैय्यद शहाबुद्दीन का अयोध्या से वर्षों पुराना नाता रहा। आंदोलन के सिलसिले में वह कई बार यहां आ चुके हैं। आंदोलन को लेकर उनकी यादें लोगों के जेहन में एक बार फिर ताजा हो गई। सैय्यद शहाबुद्दीन बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक और जनता दल के महासचिव थे।
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जनता दल के बैनर तले इसी आंदोलन के सिलसिले में दिल्ली में उनके साथ गिरफ्तारी देने वाले कामरेड सूर्यकांत पांडेय बताते हैं कि दिल्ली में उन्होंने 78 लोगों के साथ गिरफ्तारी दी थी। कहते हैं कि इस आंदोलन को लेकर वह कितना संजीदा थे, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सन 1990 में विवादित ढांचे को आंशिक क्षतिग्रस्त किए जाने के बाद अयोध्या कूच को लेकर वह पूरे सुरक्षा तंत्र को चकमा देकर फैजाबाद पहुंच गए थे।
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बताते हैं कि रौनाही तक तो वह चार पहिया से आए लेकिन पुलिस की जांच पड़ताल देख वह चकमा देकर बाइक से ही गली कूचों से होते हुए कमेटी के संयोजक यूनुस सिद्दीकी के यहां पहुंच गए। अयोध्या कूच के चलते उन्हें फार्ब्स इंटर कालेज के पास गिरफ्तार कर लिया गया।
इसके अलावा आंदोलन के सिलसिले में एक बार और भी उन्होंने यहां पहुंच लोगों से संपर्क किया था। यहां आंदोलन को लेकर उनकी मुहिम से खालिद अहमद, कैप्टन अफजाल जैसे कई अन्य लोग भी जुड़े रहे