{"_id":"6839923b3efb01cd54073ea6","slug":"shabad-keertan-on-the-occasion-of-guru-arjan-devs-shaheedi-divas-lucknow-news-c-13-1-lko1020-1227282-2025-05-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: गुरु अर्जन देव के शहीदी पर्व पर ऐतिहासिक यहियागंज गुरुद्वारे में गूंजे शबद कीर्तन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: गुरु अर्जन देव के शहीदी पर्व पर ऐतिहासिक यहियागंज गुरुद्वारे में गूंजे शबद कीर्तन
विज्ञापन
गुरुद्वारा यहियागंज में गुरु अर्जन देव के शहीदी दिवस पर हुआ शबद कीर्तन का आयोजन।
लखनऊ। ऐतिहासिक गुरुद्वारा यहियागंज में शुक्रवार को सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी का शहीदी पर्व श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। रागी जत्थों ने शबद कीर्तन से संगतो को निहाल किया। इस दौरान छबील के साथ गुरु का लंगर भी वितरित किया गया।
गुरुद्वारा के सचिव मनमोहन सिंह हैप्पी ने बताया कि डॉ. गुरमीत सिंह के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में सुबह पांच बजे से सुखमनी साहिब का पाठ शुरू हुआ। 6:30 बजे 40 दिन से चल रहे सुखमनी साहिब जी के लड़ी वार पाठों की समाप्ति हुई। इसके बाद दिनभर लुधियाना, अमृतसर व अन्य जगहों से आए रागी जत्थों ने शबद कीर्तन कर संगतों को निहाल किया।
लुधियाना से आए भाई पवनदीप सिंह ने शबद कीर्तन के माध्यम से गुरु का बखान किया। लस्सी की छबील लगाई गई। साथ ही श्रद्धालुओं में गुरु का लंगर वितरित किया गया।
विज्ञापन
गुरु अर्जन देव जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए हेड ग्रंथी ज्ञानी परमजीत सिंह जी ने कहा कि जहांगीर ने सन 1606 में गुरु अर्जन देव जी को यासा के नियम के तहत शहीद करने का फरमान जारी किया था। यासा में शहीद के खून की बूंद जमीन पर नहीं गिरती है। गुरुजी को गर्म तवे पर बैठाकर शहीद किया गया।
विज्ञापन
गुरुद्वारा के सचिव मनमोहन सिंह हैप्पी ने बताया कि डॉ. गुरमीत सिंह के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में सुबह पांच बजे से सुखमनी साहिब का पाठ शुरू हुआ। 6:30 बजे 40 दिन से चल रहे सुखमनी साहिब जी के लड़ी वार पाठों की समाप्ति हुई। इसके बाद दिनभर लुधियाना, अमृतसर व अन्य जगहों से आए रागी जत्थों ने शबद कीर्तन कर संगतों को निहाल किया।
विज्ञापन
लुधियाना से आए भाई पवनदीप सिंह ने शबद कीर्तन के माध्यम से गुरु का बखान किया। लस्सी की छबील लगाई गई। साथ ही श्रद्धालुओं में गुरु का लंगर वितरित किया गया।
विज्ञापन
गुरु अर्जन देव जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए हेड ग्रंथी ज्ञानी परमजीत सिंह जी ने कहा कि जहांगीर ने सन 1606 में गुरु अर्जन देव जी को यासा के नियम के तहत शहीद करने का फरमान जारी किया था। यासा में शहीद के खून की बूंद जमीन पर नहीं गिरती है। गुरुजी को गर्म तवे पर बैठाकर शहीद किया गया।