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Lucknow News: फर्जी आईडी से अपात्रों का आयुष्मान कार्ड बनवाने वाले सात जालसाज गिरफ्तार

Sat, 27 Dec 2025 02:18 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 27 Dec 2025 02:18 AM IST
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Seven fraudsters arrested for making Ayushman cards for ineligible people using fake IDs
गिरफ्तार किए गए जालसाज।
लखनऊ। फर्जी आईडी से अपात्रों के आयुष्मान कार्ड बनाने वाले सात जालसाजों को यूपी एसटीएफ ने बुधवार को गोमतीनगर विस्तार से गिरफ्तार किया। इन्होंने अब तक दो हजार से ज्यादा अपात्रों के आयुष्मान कार्ड बनवाए हैं। आरोपियों में आईएसए (इंप्लीमेंटेशन सपोर्ट एजेंसी) के दो पूर्व व एक वर्तमान एग्जीक्यूटिव और एसएचए (स्टेट हेल्थ एजेंसी) का एग्जीक्यूटिव शामिल है।
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एसटीएफ के एडिशनल एसपी विशाल विक्रम सिंह की जानकारी के अनुसार इसी गिरोह के दो लोग 17 जून को नवाबगंज (प्रयागराज) से गिरफ्तार किए गए थे। इनसे 84 अपात्रों के आयुष्मान कार्ड बरामद हुए थे। जांच के दौरान एसटीएफ को फर्जीवाड़ा करने वाले गैंग के लखनऊ में सक्रिय होने की सूचना मिली।
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इस पर गोमतीनगर विस्तार में विजयनगर कॉलोनी खरगापुर से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें प्रतापगढ़ के जलालपुर किठौली थाना पट्टी निवासी चंद्रभान वर्मा, बाराबंकी के जैदपुर निवासी राजेश मिश्रा, बाराबंकी के सफदरगंज के सुजीत कनौजिया, बाराबंकी के जैदपुर के सौरभ मौर्या, गाजीपुर के परसपुरा झुन्नूलाल चौहारा निवासी विश्वजीत सिंह, माल के रंजीत और सैफई का अंकित यादव शामिल है।
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आरोपी खरगापुर में मकान (4/210) में किराये पर रहते थे। आरोपी चंद्रभान बीए पास है। राजेश बीए एलएलबी का छात्र है और आईएसए का पूर्व एक्जीक्यूटिव है। एमए पास सुजीत व बीए पास सौरभ आईएसए में एग्जीक्यूटिव हैं। विश्वजीत एमकॉम की पढ़ाई करने के बाद एसएचए में एग्जीक्यूटिव है।



ओटीपी बायपास कर बनवाते थे कार्ड

आरोपियों ने बताया कि वे पात्र परिवारों की फैमिली आईडी में ओटीपी बायपास कर अपात्रों को जोड़ते थे। इसके बाद आईएसन और एसएचए स्तर पर सेटिंग से आयुष्मान कार्ड अप्रूव कराए जाते थे। चंद्रभान ने बताया कि उसने सौरभ, सुजीत और विश्वजीत को 22 लाख रुपये कार्ड अप्रूव करने के लिए दिए थे।



एक कार्ड बनाने के वसूलते थे छह हजार रुपये

मास्टरमाइंड चंद्रभान वर्मा ने बताया कि वह प्रति कार्ड छह हजार रुपये लेता था। कल्याण सिंह कैंसर इंस्टीट्यूट में कंप्यूटर ऑपरेटन व आयुष्मान मित्र के तौर पर कार्यरत रंजीत सिंह भी गिरोह की मदद करता था। इन्हीं कार्डों से अलग-अलग अस्पतालों में मुफ्त इलाज करवाकर कमाई की जाती थी। एडिशनल एसपी विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कर गैंग से जुड़े आरोपियों का पता लगाया जा रहा है।




नकदी व अन्य सामान बरामद

12 मोबाइल फोन, पांच लैपटॉप, 129 लोगों के आयुष्मान कार्ड से संबंधित डाटा, 70 लोगों के अपात्र के आयुष्मान कार्ड के स्क्रीनशॉट, 22 डेबिट कार्ड, आठ पैनकार्ड, दो आईडी कार्ड, 10 चेकबुक, पांच पासबुक, दो मतदाता पहचान पत्र, दो डीएल, स्कैनर, चार मोहर, दो क्यूआर कोड, सीपीयू, कलर प्रिंटर, तीन सिमकार्ड, कार और 60,370 रुपये।
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