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यूपी में सात स्टेट हाईवे फोरलेन प्रोजेक्ट अटके
अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 24 Jun 2014 08:40 AM IST
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इन दिनों भले ही बातें आगरा एक्सप्रेस वे की हो रही हों लेकिन अटके पड़े सात स्टेट हाईवे प्रोजेक्ट की सुध सरकार को नहीं है।
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फिलहाल सूबे के सात प्रमुख राज्य राजमार्गों को फोरलेन करने का सरकार का इरादा जल्द हकीकत में बदलता नहीं दिख रहा है।
अक्तूबर से अब तक पांच बार टेंडर जारी करने के बावजूद अब तक एक भी ठेकेदार या फर्म ने इसमें रुचि नहीं दिखाई है। अलग-अलग जिलों को जोड़ने वाले सात राज्य राजमार्गों की दशा मौजूदा समय में बेहद खराब है।
इंजीनियरों के मुताबिक, ट्रैफिक सेंसस (प्रति दिन आने-जाने वाले वाहन) को देखते हुए इन राजमार्गों की मोटाई और चौड़ाई बढ़ाना जरूरी है। यही वजह है कि मरम्मत के कुछ दिन बाद ही सड़क फिर खस्ताहाल हो जाती है।
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उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण (उपशा) ने इन सड़कों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में बनाने का निर्णय लिया है।
पीपीपी मोड में ठेका लेने वाली फर्म या ठेकेदार को सड़क का निर्माण अपनी पूंजी से करना होता है। एवज में उसे करीब 22 साल तक टोल टैक्स वसूलने का अधिकार दिया जाता है।
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इन राजमार्गों के लिए पहली बार अक्तूबर में टेंडर जारी किए गए। उसके बाद दूसरी, तीसरी और चौथी बार टेंडर जारी हुए पर कोई आवेदन नहीं आया।
पांचवीं बार एक जून को टेंडर जारी हुआ, लेकिन इस बार भी किसी फर्म ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। हालांकि इस बार टेंडर डालने की आखिरी तारीख 15 जुलाई है, मगर उपशा के अफसरों का कहना है कि किसी फर्म या ठेकेदार के आगे आने की उम्मीद न के बराबर है।
अमूमन टेंडर डालने से पहले फर्म के प्रतिनिधि संबंधित अफसरों से पूछताछ करते हैं, मगर इसके लिए भी अभी तक कोई नहीं आया।
प्राधिकरण के ही एक इंजीनियर ने बताया कि जमीन अधिग्रहण में मुश्किल और फॉरेस्ट की एनओसी मिलने में लगने वाले लंबे समय की वजह से कोई फर्म यहां निवेश नहीं करना चाहती।
इस बारे में उपशा के सदस्य (प्रशासन) आशुतोष निरंजन ने बताया कि इन सातों राजमार्गों से संबंधित स्थिति बोर्ड में रखी जाएगी।
यह पूछने पर क्या इन्हें भी लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे की तर्ज पर खुद बनाने का निर्णय लिया जा सकता है, उन्होंने कहा कि फैसला बोर्ड ही लेने में सक्षम है।
उन्होंने स्वीकार किया कि पीपीपी मोड की स्थिति प्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में अच्छी नहीं है।
इन राजमार्गों का होना है कायाकल्प
बलरामपुर-गोंडा-जरवल (एसएच-1 ए), शाहजहांपुर-हरदोई-लखनऊ (एसएच-25), मुजफ्फरनगर-सहारनपुर (एस-59), अलीगढ़-मथुरा (एसएच-80), एटा-शिकोहाबाद (एसएच-85), अकबरपुर-जौनपुर-मिर्जापुर-डूढी (एसएच-5) और तारीघाट-बारा रोड (एसएच-99)।