फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Sensitivity and empathy decline as medical students become doctors report raising concerns for patients

शोध में खुलासा: डॉक्टर बनते बनते घट जाती है संवेदनशीलता व सहानुभूति, मरीजों के लिए चिंता बढ़ाने वाली रिपोर्ट

Mon, 20 Jul 2026 03:07 PM IST
Bhupendra Singh सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Mon, 20 Jul 2026 03:07 PM IST
सार

केजीएमयू के शोध में खुलासा हुआ कि डॉक्टर बनते बनते छात्रों की संवेदनशीलता व सहानुभूति घट जाती है। मरीजों के लिए चिंता बढ़ाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। आगे पढ़ें पूरी खबर...

विज्ञापन
Sensitivity and empathy decline as medical students become doctors report raising concerns for patients
docter demo - फोटो : Freepik

विस्तार

डॉक्टर की सहानुभूति और मरीज से बोले गए दो अच्छे शब्द दवा का असर दोगुना कर देते हैं। इसके बावजूद डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान हर साल विद्यार्थी में सहानुभूति का स्तर कम होता जाता है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च के हाल के अंक में प्रकाशित लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के अध्ययन में यह बात सामने आई है।

विज्ञापन


अध्ययन में केजीएमयू के 291 एमबीबीएस छात्रों (प्रथम वर्ष से लेकर इंटर्न तक) को शामिल किया गया। छात्रों में सहानुभूति का आकलन इंटरपर्सनल रिएक्टिविटी इंडेक्स (आईआरआई) के माध्यम से किया गया। अध्ययन में आईआरआई स्व-आकलन प्रश्नावली का उपयोग किया गया जिसे वर्ष 1980 में मार्क एच. डेविस ने विकसित किया था। इसमें दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण को समझने, भावनात्मक जुड़ाव, कल्पनाशीलता और व्यक्तिगत भावनात्मक प्रतिक्रिया जैसे चार पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है।
विज्ञापन


अध्ययन में देखा गया कि पहले वर्ष के छात्रों में सबसे अधिक सहानुभूति थी। दूसरे, तीसरे और चौथे वर्ष के बाद इंटर्नशिप तक पहुंचते-पहुंचते सहानुभूति के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। यह अध्ययन डॉ. दानिश रस्तोगी, डॉ. अभिषेक कुमार सिंह और प्रो. श्रद्धा सिंह ने किया है। अध्ययन में मेडिकल पाठ्यक्रम में संवाद कौशल, मरीज-केंद्रित प्रशिक्षण और व्यावहारिक शिक्षा को और मजबूत करने की सिफारिश भी की गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

औसत स्कोर में 10 फीसदी कमी

अध्ययन के दौरान देखा गया कि प्रथम वर्ष के छात्रों में सहानुभूति का औसत स्कोर 65.07 था। इंटर्नशिप तक इसका औसत स्कोर कम होकर 59.25 रह गया। इस तरह औसत स्कोर में करीब 10 फीसदी कमी आई। वहीं कुल औसत सहानुभूति स्कोर 63.17 रहा।

छात्र और छात्राओं का सहानुभूति स्तर लगभग समान

अध्ययन में यह भी पाया गया कि छात्र और छात्राओं के कुल सहानुभूति स्कोर में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं था। छात्रों का औसत स्कोर 62.93 और छात्राओं का 63.49 था।

कम या ज्यादा अंक के मायने नहीं

अध्ययन में छात्रों के हालिया प्रोफेशनल परीक्षा के अंकों और सहानुभूति के बीच भी संबंध तलाशा गया। हालांकि, दोनों के बीच कोई महत्वपूर्ण संबंध नहीं मिला। यानी अधिक अंक लाने वाला छात्र जरूरी नहीं कि अधिक संवेदनशील भी हो।

पढ़ाई का दबाव और काम के घंटे भी कम जिम्मेदार नहीं

केजीएमयू प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के अनुसार मेडिकल में दाखिला पाना बेहद कठिन होता है। दिन-रात पढ़ाई के बाद केजीएमयू जैसा संस्थान मिल पाता है। संस्थान में पढ़ाई के साथ ही ड्यूटी भी करनी पड़ती है। कई बार यह ड्यूटी 24 घंटे और इससे ज्यादा अवधि की भी हो जाती है। इस दौरान लगातार मरीजों से सामना और भी मानसिक तनाव देता है। इसके चलते भी सहानुभूति का स्तर कम हो सकता है। हालांकि उन्होंने माना कि सहानुभूति का स्तर बढ़ना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed