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...तो ऐसे पता चलता है कि आपदा आने वाली है
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Tue, 13 Aug 2013 01:24 PM IST
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पहाड़ों पर आने वाले सप्ताह में खतरा बना रहेगा। यह बात रिमोट सेंसिंग से पता चलती है।
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सोमवार को भारतीय स्पेस कार्यक्रम के जनक वैज्ञानिक प्रो. विक्रम साराभाई केजन्मदिवस पर राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग दिवस जानकीपुरम स्थित रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर (आरएसएसी) पर मनाया गया।
इसमें अलग-अलग स्कूलों से आए बच्चों को रिमोट सेंसिंग तकनीक की जानकारी दी गई।
इंडियन सोसाइटी ऑफ रिमोट सेंसिंग और आरएसएसी की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों को रिमोट सेंसिंग की तकनीक के बारे में बताया गया।
आरएसएसी केजियोइंफॉर्मेटिक्स डिवीजन के प्रमुख डॉ. एकेतांगडी ने बताया कि पहाड़ी इलाकों में आने वाली आपदा को पहले ही रिमोट सेंसिंग की मदद से पता किया जा सकता है।
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केदारनाथ की त्रासदी को भी पहले ही पता कर लिया गया था। हालांकि, समय रहते इससे बचने के उपाय नहीं किए गए। वहीं राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त आरएसएसी के चेयरमैन डॉ. रामआसरे कुशवाहा ने बच्चों से भविष्य में भूविज्ञान के क्षेत्र में अपना योगदान देने की अपील की।
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प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. अशोक साहनी ने बच्चों को स्पेस विज्ञान में आ रहे बदलाव के बारे में जानकारी दी। इस दौरान 9-10वीं कक्षा के बच्चों के लिए हुए क्विज में विजयी रहे बच्चों को डॉ. कुशवाहा ने पुरुस्कृत किया।
वहीं ग्रेजुएशन और पीजी के छात्रों ने रिमोट सेंसिंग की मदद से भारत में चल रहे स्पेस कार्यक्रम को पोस्टर में उकेरा। कार्यक्रम में आरएसएसी के निदेशक पीएन शाह, आईएसआरएस लखनऊ केचेयरमैन राजीव मोहन, सचिव डॉ. अनिरूद्ध उनियाल, उपाध्यक्ष एकेअग्रवाल मौजूद थे।