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अब एससी-एसटी के सभी छात्रों का 'जीरो' फीस पर होगा एडमीशन, जारी किए गए निर्देश

Mon, 25 Nov 2019 12:47 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 25 Nov 2019 12:47 PM IST
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SC and ST students will get admission on zero fee.
प्रतीकात्मक तस्वीर

एससी-एसटी के शत-प्रतिशत छात्रों को सरकारी व अनुदानित शिक्षण संस्थानों में ‘जीरो’ फीस पर दाखिला मिलेगा। अभी तक यह सीमा कुल सीटों का 40 फीसदी थी। इसे अब खत्म कर दिया गया है।

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समाज कल्याण विभाग ने इस संबंध में सभी जिलास्तरीय अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वहीं, भ्रष्टाचार के मामले सामने आने पर निजी संस्थानों में छात्रों को फीस देकर दाखिला लेना होगा। बाद में आवेदन लेकर सरकार उनकी पूरी फीस की भरपाई करेगी।
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दरअसल, प्रदेश में एससी-एसटी छात्रों को निजी संस्थानों में निशुल्क प्रवेश देने के नियम से सरकारी धन के हड़पने के कई मामले सामने आ चुके हैं। कई निजी संस्थानों ने इस सुविधा का दुरुपयोग कर स्वीकृत सीटों पर 80-100 प्रतिशत तक एससी-एसटी छात्र दिखाकर धन हड़पा है। प्रदेश में सामान्य, ओबीसी व अल्पसंख्यक छात्रों को अधिकतम 50 हजार रुपये ही फीस वापस की जाती है, वहीं एससी-एसटी छात्रों को पूरी फीस वापस करने का नियम है।
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अगर एक वित्त वर्ष में बजट की कमी से शुल्क की भरपाई नहीं हो पाती है, तो एससी-एसटी छात्रों को अगले साल उसे वापस करने का नियम है। लेकिन अन्य वर्ग के छात्रों को बजट खत्म होने पर इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता है।

80 फीसदी से अधिक छात्र एससी-एसटी दिखाए गए थे

वर्ष 2014-15 में समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव सुनील कुमार ने तकनीकी व व्यावसायिक संस्थानों में इस सुविधा का लाभ पाने वाले टॉप-20 संस्थानों की सूची निकाली थी। इन निजी संस्थानों में 80 फीसदी से अधिक छात्र एससी-एसटी के दिखाए गए थे। जबकि, सामान्य तौर पर इन दोनों वर्गों के इतनी बड़ी संख्या में छात्र नहीं होते हैं।

जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई थी। जीरो फीस के नियम के चलते फर्जी प्रवेश के आधार अनियमितता करने वाले सहारनपुर, मेरठ और गाजियाबाद जिलों में एसआईटी और ईओडब्ल्यू की जांच अब तक चल रही है।

अब भी हो रही गड़बड़ी की कोशिशें
वर्ष 2018-19 में निजी संस्थानों में जीरो फीस पर प्रवेश की व्यवस्था खत्म कर दी गई है, इसके बावजूद वहां बहुतायत में एससी-एसटी छात्र दिखाकर शुल्क भरपाई योजना का लाभ लेने का प्रयास हो रहा है। कुछ समय पहले राजधानी में आईं राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की संयुक्त सचिव स्मिता चौधरी ने भी इन आंकड़ों पर हैरानी जताते हुए संबंधित रिकॉर्ड ले लिया है।

सरकार ने एससी-एसटी छात्रों की सुविधा में की वृद्धि : शास्त्री

समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री ने बताया कि वर्ष 2002-03 में तत्कालीन अटल बिहारी सरकार ने पूरे देश में एससी-एसटी छात्रों को निशुल्क प्रवेश की व्यवस्था लागू की थी। अगले ही वित्त वर्ष में यूपी में इस नियम को लागू कर दिया गया।

वर्ष 2014-15 में तत्कालीन सपा सरकार ने निशुल्क प्रवेश की सीमा कुल सीटों के सापेक्ष 40 फीसदी निर्धारित कर दी। 26 नवंबर को संविधान दिवस पर सपा की ओर से होने वाला प्रदर्शन सिर्फ दिखावा है।

मौजूदा प्रदेश सरकार ने सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में एससी-एसटी वर्ग के 40 प्रतिशत केबजाय शत-प्रतिशत छात्रों को निशुल्क प्रवेश देने का नियम लागू कर दिया है।

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