यूपी चुनाव 2022: प्रदेश की सियासत में बढ़ेगा संजय निषाद का कद, पिछड़ों को साधने के लिए आगे कर सकती है भाजपा
दिल्ली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव की मौजूदगी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात में निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद को अपने सिंबल पर चुनाव जीतने वाली सीटों को चिह्नित करके सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है।
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उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पिछड़ों को सहेजने में जुटी भाजपा ने निषाद पार्टी को खास अहमियत देने का संकेत दिया है। बृहस्पतिवार को दिल्ली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव की मौजूदगी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात में निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद को अपने सिंबल पर चुनाव जीतने वाली सीटों को चिह्नित करके सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है। इससे माना जा रहा है कि भाजपा आगामी चुनाव में पिछड़ों को साधने के लिए संजय निषाद को आगे कर सकती है।
बता दें कि संजय निषाद प्रदेश में चार सीटों पर होने वाले एमएलसी मनोनयन और मंत्री बनने की दौड़ में भी शामिल हैं। कुछ दिन पहले भी उनकी नड्डा और शाह से मुलाकात हुई थी। अब एक बार फिर मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुई इस मुलाकात से सियासी अटकलें तेज हो गई हैं।
उम्मीद जताई जा रही है कि भाजपा चुनाव में जातीय समीकरणों को दुरुस्त करने के लिहाज से संजय निषाद को मंत्रिमंडल में शामिल करने के अलावा यूपी में कुछ जातियों को आरक्षण की सौगात दे सकती है। केंद्र सरकार से राज्यों को मिले अधिकार के तहत सामान्य वर्ग की कुछ जातियों को पिछड़े वर्ग में शामिल किया जा सकता है साथ ही 17 अति पिछड़ों को अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल करने की भी संभावना जताई जा रही है।
डॉ. संजय ने खुद के भाजपा के साथ होने का दावा करते हुए कहा कि उन्होंने भाजपा हाईकमान को बताया है कि प्रदेश की करीब 160 सीटों पर निषाद समुदाय का प्रभाव है और करीब 70 सीटों पर उनकी पार्टी ने बूथ स्तर तक संगठन का गठन भी कर लिया है। उन्हें कितनी सीटें मिलेंगी, यह अभी तय नहीं है। अगली मुलाकात में इस पर जरूर विचार हो सकता है। उन्होंने कहा कि हमने सीटों की संख्या को लेकर कोई बात नहीं की है, बस अपनी अहमियत भाजपा नेतृत्व को बता दी है।
दिल्ली से लौटने के बाद संजय ने यहां कहा कि भाजपा ही ऐसा दल है, जो निषाद समुदाय की सामाजिक सुरक्षा का ध्यान दे रहा है।
इस वजह से है निषाद को तरजीह दे रही भाजपा
संजय निषाद की राजनीति का आधार निषाद समाज के वोटों की ताकत है। इसी ताकत के बदले वह सत्ता में भागीदारी की मांग करते रहते हैं। प्रदेश की करीब 160 सीटों पर निषाद और उनकी उपजातियों की संख्या इतनी है कि वह चुनाव परिणाम का रुख बदल सकते हैं। खासतौर पर पूर्वी यूपी के करीब 22 जिलों से संबंधित लोकसभा व विधानसभा सीटों पर निषाद, केवट, मल्लाह, सैनी, बेलदार और बिंद बिरादरी का अच्छा प्रभाव है।