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UP News: आमदनी अठन्नी खर्चा रुपइया... वेतन कहां से मिले भइया, शिया वक्फ बोर्ड को सात साल से नहीं मिला अनुदान

Sat, 28 Dec 2024 10:36 AM IST
भूपेन्द्र सिंह मोहम्मद इरफान, अमर उजाला, लखनऊ
मोहम्मद इरफान, अमर उजाला, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sat, 28 Dec 2024 10:36 AM IST
सार

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड की आमदनी कम और खर्च अधिक है। इसलिए कर्मियों का वेतन नहीं मिल पा रहा है। शिया वक्फ बोर्ड को सात साल से वेतन मद में अनुदान नहीं मिला। 

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salaries of employees are pending Due to decrease in income of Shia Central Waqf Board from Waqf properties
शिया वक्फ बोर्ड को सात साल से नहीं मिला अनुदान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी में शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड को वक्फ संपत्तियों से होने वाला आमदनी उसके खर्च से काफी कम है। ऐसे में कर्मचारियों के 41 महीनों का वेतन बकाया हो गया था। हालांकि 14 दिन के कार्य बहिष्कार के बाद सितंबर में उनको तीन महीने का वेतन दिया गया। यही नहीं, वेतन मद में सरकार की ओर से मिलने वाला अनुदान भी सात साल से विभाग को नहीं मिला है। इससे बोर्ड को अपना खर्च भी चलाना मुश्किल हो गया है।

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बोर्ड में प्रदेश भर की 7,275 वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं। इनसे होने वाली आमदनी का सात फीसदी हिस्सा वक्फ बोर्ड को मुतालबे (टैक्स) के रूप में मिलता है। इसका एक फीसदी सेंट्रल वक्फ काउंसिल में जमा करना होता है। ऐसे में वक्फ बोर्ड को छह फीसदी मुतालबे से कर्मचारियों का वेतन और विभागीय खर्च चलाना होता है। 

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38 महीने का वेतन बकाया

सरकार इसके लिए अनुदान भी देती है ताकि विभाग को कर्मचारियों के वेतन व अन्य खर्च में समस्या न हो। हालांकि सरकार ने विभाग को वर्ष 2017 से वेतन मद में अनुदान नहीं दिया है। नतीजतन आमदनी कम और खर्च ज्यादा होने से कर्मचारियों को नियमित रूप से वेतन का भुगतान नहीं किया गया। फिलहाल 38 महीने का वेतन बकाया है।

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गौरतलब है कि वर्तमान में बोर्ड में 14 कर्मचारी हैं। इन पर वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा व देखरेख की जिम्मेदारी है। कर्मचारियों के वेतन व अन्य मद में सालाना 1.20 करोड़ रुपये खर्च होता है। बोर्ड को वक्फ संपत्तियों से सालाना औसत आय 64.20 लाख रुपये है। मौजूदा समय में बोर्ड लगभग 2,70,89,800 रुपये के घाटे में चल रहा है।

3.35 करोड़ रुपये मिले तो हो वेतन का भुगतान

शिया वक्फ बोर्ड को कर्मचारियों के बकाये वेतन का भुगतान और अन्य घाटे को खत्म करने के लिए 3,35,09,800 रुपये की जरूरत है। बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अजीज अहमद ने अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक को अक्तूबर में पत्र लिखा था। 

इसमें वित्तीय वर्ष 2025-2026 के लिए अनावर्तक अनुदान के तौर पर 2,70,89,800 रुपये और कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए हर साल 1.10 करोड़ रुपये आवर्तक अनुदान के रूप में उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया गया है। 

तीन महीने के वेतन का भुगतान किया गया

वहीं, बोर्ड के चेयरमैन अली जैदी का कहना है कि कर्मचारियों के 36 महीने का वेतन पिछले बोर्ड के कार्यकाल का बकाया है। उनके कार्यकाल में मात्र पांच महीने का वेतन बकाया था, जिसमें से तीन महीने के वेतन का भुगतान किया जा चुका है।



उन्होंने बताया कि वेतन के भुगतान की समस्या का समाधान तभी हो सकता है, जब सरकार वेतन मद में अनुदान जारी करे और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाए ताकि संपत्तियों से मुतालबा वसूल किया जा सके।

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