लखनऊ: मेदांता में मरीज की मौत पर हंगामा, परिजनों का आरोप कोरोना से हुई मौत
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लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल में मंगलवार रात गोसाईंगंज निवासी की मौत पर तीमारदारों ने हंगामा किया। आरोप लगाया कि हॉस्पिटल प्रबंधन कोरोना संदिग्ध मरीज बताकर उसे भर्ती किया था।
उनका यह भी कहना है कि मौत के बाद प्रबंधन ने बकाया न मिलने पर शव देने से इन्कार कर दिया। पुलिस भी जांच कर चली गई। तीमारदार ने सीएमओ से लेकर कई अफसरों से गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
करीब 16 घंटे बाद 50 हजार रुपये जमा करने पर शव सौंपा गया। सुशील (35) की किडनी का इलाज चल रहा था। शनिवार को हालत बिगड़ने पर मेदांता में भर्ती कराया था।
उपचार के दौरान हुई मौत
डॉक्टर ने कोरोना से संक्रमित होने की आशंका जताई। एक दिन बाद नमूना जांच के लिए भेजा गया। तीमारदार प्रदीप ने कोरोना से संबंधित टोल फ्री नंबर पर मदद मांगी थी।
उपचार के दौरान मंगलवार रात 10 बजे मरीज की मौत हो गई। सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल का कहना है कि लिखित शिकायत पर मामले की जांच कराई जाएगी।
कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आते ही सौंप दिया गया शव
मरीज किडनी फेल्योर की स्थिति में था। उसे निमोनिया भी हो गया था। कोराना को लेकर बनी गाइडलाइन में कहा गया है कि निमोनिया वाले मरीज की कोराना की जांच कराई जाए, इसलिए यह जांच कराई गई और रिपोर्ट निगेटिव आई है। मरीज की स्थिति के बारे में उसके परिजनों को लगातार जानकारी दी गई। चूंकि जब तक कोरोना की रिपोर्ट आ नहीं जाती तब तक उसे कहीं भेजना खतरनाक था, इसलिए रोके रखा गया। रिपोर्ट आने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। उन पर इलाज के खर्च का काफी रुपया बकाया था, जिसे माफ भी किया गया है। -डॉ. राकेश कपूर, मेडिकल डायरेक्टर, मेदांता हॉस्पिटल