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केजीएमयू के अस्पताल में नवजात की मौत के पर हंगामा, तोड़फोड़

Sun, 24 Apr 2016 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 24 Apr 2016 12:19 AM IST
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Ruckus in KJMU hospital in Lucknow.
अस्पताल में हंगामा करते परिजन - फोटो : amar ujala

केजीएमयू के क्वीन मेरी अस्पताल में नवजात की मौत के बाद शनिवार को खूब हंगामा हुआ। नवजात की मौत होने पर परिवारीजनों ने निओनेटल यूनिट (एनएनयू) में तोड़फोड़ की। घरवालों का कहना है कि इंजेक्शन लगाने में हुई लापरवाही के चलते नवजात की मौत हो गई।

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चौक, नक्खास के इमारन अहमद की पत्नी फरहीना (24) को प्रसव पीड़ा के बाद क्वीन मेरी अस्पताल में बीते सोमवार को भर्ती कराया गया था। इमरान के भाई अजीम ने बताया कि मंगलवार को फरहीना ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया।
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उसे शनिवार को टीका लगवाने के लिए कहा गया था। सुबह दस बजे के करीब टीकाकरण कक्ष में नर्स व एएनएम ने इंजेक्शन लगाया। जैसे ही वह बच्चे को लेकर वार्ड में आए बच्चे का शरीर नीला पड़ने लगा और काले धब्बे पड़ गए।
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इसकी सूचना स्टाफ रूम में तैनात नर्स व एएनएम को दी गई, लेकिन कोई देखने नहीं आया। बच्चे की हालत बिगड़ती देख मां रोने लगी।

बच्चे की हालत के बारे में नहीं बताया

Ruckus in KJMU hospital in Lucknow.

डॉक्टर को बताया गया तो बच्चे को बेबी केयर यूनिट में शिफ्ट करा दिया गया। कुछ पूछने पर यही कहा जाता कि बच्चे का इलाज चल रहा है।

ढाई बजे के करीब अजीम एनएयू में गए तो देखा कि बच्चे की पंपिंग की जा रही है। उनका कहना है कि बच्चे की मौत हो चुकी थी।

हंगामा बढ़ा तो भागा स्टाफ
परिवारीजनों ने एनएनयू के कांच को तोड़ दिया। परिवारीजनों को उग्र होते देख डॉक्टर व नर्स भाग खड़े हुए। जानकारी मिलने के बाद संख्या में पहुंची पुलिस और केजीएमयू प्रशासन ने समझाबुझाकर मामला शांत कराया।

घंटों चले बवाल के बाद शाम करीब पांच बजे डॉक्टरों ने नवजात का शव मरीज के सभी तीमारदार को बाहर कर दिया।

अस्पताल ‌के बेड पर ही चीखकर बेहोश हो गई मां

Ruckus in KJMU hospital in Lucknow.

पहली संतान पाने पर अस्पताल से लेकर घर परिवार तक खुशी का माहौल था। फरहीना और इमरान अहमद को जब पता चला कि जो लाडला कुछ वक्त पहले उनको टकटकी लगाए देख रहा था वह इस दुनिया में नहीं है तो मां फरहीन अस्पताल के बेड पर ही चीखते हुए बेहोश हो गई।

पिता इमरान अहमद भी रो-रोकर पूरी तरह बेसुध हो गए। उनका आरोप था कि डॉक्टरों की लापरवाही ने उनके लाडले की जान ले ली और कोई देखने तक नहीं आया।

परिवारीजनों ने ये लगाए आरोप
बच्चा स्वस्थ पैदा हुआ था, वजन साढ़े तीन किलो था। शनिवार को डॉक्टर ने टीका लगाने को कहा। टीकाकरण कक्ष में नर्स व एएनएम ने इंजेक्शन लगाकर वार्ड में भेज दिया और थोड़ी देर में ही नवजात का शरीर नीला पड़ने लगा। डॉक्टर उसे बेबी केयर यूनिट ले गए। बच्चे की मौत हो गई, लेकिन उन्हें बताया नहीं गया। जब हंगामा किया तो घरवालों को इसकी जानकारी दी गई।

गालियां देती हैं डॉक्टर-इंटर्न

Ruckus in KJMU hospital in Lucknow.

मरीज के परिवारीजनों में से एक अजीम कहते हैं कि तीन दिन में यहां डॉक्टरों का जैसा व्यवहार देखा, वह शर्मसार करने वाला है। मरीज-तीमारदार के साथ गालियां देकर बात की जाती हैं।

मरीज को दिक्कत होने पर डॉक्टर देखने की बजाए किताब पढ़ने में लगी रहती हैं और अभद्र व्यवहार करते हुए किसी दूसरे अस्पताल जाने की धमकी देती हैं। डॉक्टर के अलावा नर्से भी मरीज और तीमारदार के साथ दुर्व्यवहार करने में आगे हैं।

नहीं आया कोई सीनियर डॉक्टर
मरीजों का इलाज रेजीडेंट के भरोसे। डॉक्टर राउंड नहीं लेतीं है। दिक्कत बताओ तो सीधे भगा दिया जाता है। नवजात की हालत बिगड़ने पर भी कोई भी सीनियर डॉक्टर और बाल रोग विशेषज्ञ देखने नहीं आया।

भर्ती होते ही शुरू हो जाती है वसूली
अजीम और इमरान का आरोप है कि अस्पताल में इलाज और प्रसव के लिए जमकर वसूली होती है। भर्ती होने के बाद से वसूली का सिलसिला शुरू होता है और डिस्चार्ज होने तक 2500 से अधिक की रकम वसूल ली जाती है।

दी जाती है इलाज बंद करने की धमकी

Ruckus in KJMU hospital in Lucknow.

दवा, इंजेक्शन, चादर बदलने और देखरेख के लिए स्टाफ मनमानी वसूली करता है। कोई पैसा देने से मना कर दे तो उसका इलाज बंद करने की धमकी दी जाती है।

परिवारीजनों के आरोप गलत, एनएनयू में की गई तोड़फोड़
इस मामले पर क्वीन मेरी अस्पताल के एमएस डॉ. एसपी जैसवार का कहना हे कि नवजात को सांस लेने में दिक्कत थी, इसलिए निओनेटल यूनिट (एनएनयू) में भर्ती कराया गया था। उसे कोई इंजेक्शन नहीं लगाया गया था। परिवारीजनों के सभी आरोप गलत हैं।

बच्चे की मौत केबाद भीड़ जुटाई गई और एनएनयू के बाहर तोड़फोड़ की गई। कॉरिडोर में कांच तोड़ा गया। डॉक्टरों व स्टाफ के साथ अभद्रता की गई और भीड़ मारपीट को तैयार थी। उग्र भीड़ को देख पुलिस बुलाई गई और मामला शांत कराया गया।
 
बच्चे को देखने के लिए सभी सीनियर डॉक्टर पहुंचे थे और घटना के बाद सीएमएस डॉ. एससी तिवारी समेत अन्य अधिकारी पहुंचे थे। बच्चे के इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई, जिससे उसकी जान जाए। बच्चे की हालत गंभीर थी और उसके परिवारीजनों को इसकी जानकारी थी।

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