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Lucknow News: आरटीआई में रोडवेज बसों की फिटनेस का दावा, पड़ताल में खुल गई पोल

Sat, 20 Jun 2026 04:29 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2026 04:29 AM IST
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RTI claimed roadworthiness of roadways buses; investigation exposed the reality.
रोडवेज बसों का हाल। फर्स्ट एड बॉक्स खाली हैं। कई के शीशे में चटके हुए हैं तो किसी में नंबर ही छ
सौरभ मिश्र
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम बसों की फिटनेस और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भले ही बड़े दावे करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और तस्वीर पेश कर रही है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी में निगम ने कहा है कि सभी बसों में फर्स्ट एड किट उपलब्ध है और उनकी नियमित जांच की जाती है। वहीं, अमर उजाला की पड़ताल में कई बसों में फर्स्ट एड बॉक्स खाली मिले, जबकि कुछ बसों में बॉक्स तक नहीं था।
आरटीआई कार्यकर्ता पीयूष कश्यप को परिवहन निगम के प्रधान प्रबंधक (प्रावि.) आरबीएल शर्मा की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, 12 महीनों में प्रदेशभर में 5,889 बसों की फिटनेस जांच कराई गई। इनमें लखनऊ, नोएडा, गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर, आगरा, गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, बरेली, चित्रकूट और देवीपाटन समेत अन्य क्षेत्रों की बसें शामिल हैं। इस दौरान केवल 39 बसें फिटनेस जांच में फेल पाई गईं। निगम का दावा है कि सभी डिपो समय पर फिटनेस जांच कराते हैं, सभी बसें सुरक्षा मानकों का पालन करती हैं और प्रत्येक बस में फर्स्ट एड किट उपलब्ध रहती है।
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हालांकि बुधवार और बृहस्पतिवार को कैसरबाग, आलमबाग और अवध बस अड्डे पर की गई पड़ताल में कई बसों में फर्स्ट एड बॉक्स खाली मिले। कुछ बसों में बॉक्स ही नहीं था। एक बस में नंबर प्लेट का हिस्सा लोहे की पट्टी से ढका मिला, जबकि दूसरी बस का अगला शीशा चटका हुआ था। इससे फिटनेस जांच और सुरक्षा मानकों की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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मजबूरी में चलानी पड़ती हैं ऐसी बसें
नाम न छापने की शर्त पर एक चालक ने बताया कि कई बार खामियों वाली बसें भी चलानी पड़ती हैं। शिकायत करने पर अक्सर बस को सेवा में बनाए रखने के निर्देश मिलते हैं। चालक के अनुसार एक बार क्रैक शीशे वाली बस चलाते समय शीशे का हिस्सा टूटकर उनके चेहरे पर आ गिरा था, जिससे उन्हें चोट लगी थी।
चालक बोले- पुरानी बसों में फर्स्ट एड किट मिलना अपवाद
आरटीआई में यह भी पूछा गया था कि यदि किसी बस में फर्स्ट एड किट नहीं मिले तो क्या कार्रवाई की जाती है। जवाब में निगम ने कहा कि ऐसा कोई मामला अब तक प्रकाश में नहीं आया है। वहीं, कई चालकों का कहना है कि पुरानी बसों में फर्स्ट एड किट मिलना अपवाद जैसी स्थिति है। सवाल यह भी है कि यदि कमियां मौजूद हैं तो वे विभागीय रिकॉर्ड तक क्यों नहीं पहुंच रहीं।
फर्स्ट एड किट में इनका होना जरूरी
सेवलॉन, कॉटन, पट्टी, छोटी बैंडेज, बिटाडीन, ओआरएस पैक, दर्द निवारक सामान्य दवाइयां, पैरासिटामोल, मेडिकल टेप, छोटी कैंची।
पड़ताल में मिली स्थिति
समय - बस संख्या - डिपो - स्थिति
-बुधवार शाम 6:08 बजे - यूपी 78 एलएन 9060 - कैसरबाग - फर्स्ट एड बॉक्स उपलब्ध नहीं, शीशा क्रैक
-बुधवार शाम 6:13 बजे - यूपी 31 बीटी 0989 - कैसरबाग - फर्स्ट एड बॉक्स उपलब्ध नहीं, ड्राइविंग सीट के पीछे लदा मिला टायर
-बृहस्पतिवार रात 11:49 बजे - यूपी 72 एटी 0595 - आलमबाग - फर्स्ट एड किट गायब
-बृहस्पतिवार रात 11:52 बजे - यूपी 78 केटी 1239 - आलमबाग - बॉक्स पूरी तरह खाली, शीशा क्रैक
-बृहस्पतिवार रात 11:56 बजे - यूपी 78 एलएन 0368 - आलमबाग - दो बॉक्स दोनों खाली
-बृहस्पतिवार रात 11:57 बजे - यूपी 78 केटी 3753 - आलमबाग - बॉक्स में कोई सामग्री नहीं
-बृहस्पतिवार रात 12:31 बजे - यूपी 78 केटी 2781 - अवध बस स्टैंड - बॉक्स पूरी तरह खाली
-बृहस्पतिवार रात 12:34 बजे - यूपी 78 एचटी 4074 - अवध बस स्टैंड - बॉक्स टूटा, पूरी तरह खाली
I13 बिंदुओं पर जांच एवं मेंटेनेंस के बाद ही बस डिपो से बाहर निकलती है। बाॅक्स से यात्री दवाएं निकाल ले जाते हैं, इसलिए दवाओं की सुविधा कंडक्टर के पास रहती है। लग्जरी पिंक बसों में सीसीटीवी लगे हुए हैं, साधारण बसों में नहीं।I

I- अमरनाथ सहाय, प्रवक्ता, रोडवेजI

रोडवेज बसों का हाल। फर्स्ट एड बॉक्स खाली हैं। कई के शीशे में चटके हुए हैं तो किसी में नंबर ही छ

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