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UP BJP से होगी कई और नेताओं की छुट्टी

Wed, 12 Nov 2014 09:39 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 12 Nov 2014 09:39 PM IST
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RSS to take hard decision against UP BJP leaders.

भाजपा को लोकसभा चुनाव में भले ही उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में 73 सीटें (71 भाजपा, 2 अपना दल) मिल गई हों, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सूबे में भाजपा की जमीनी पकड़ व पहुंच को लेकर निश्चिंत नहीं हो पा रहा है। पिछले दिनों संघ के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक के सिलसिले में लखनऊ में लगभग 10 दिन शीर्ष नेतृत्व के प्रवास के दौरान मिली सूचनाओं ने उसे परेशान करके रख दिया है।

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साथ ही साफ कर दिया है कि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के पक्ष में बने माहौल और जुड़े लोगों को सहेजने के बारे में पार्टी की सारी कार्ययोजनाएं सिर्फ कागजी हैं। इसके मद्देनजर प्रदेश के  कुछ और भाजपा नेताओं को नेपथ्य में भेजे जाने के संकेत हैं।
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दरअसल, संघ के सरकार्यवाह सुरेश जोशी ‘भैयाजी’ 25 नवंबर को लखनऊ आ रहे हैं। वे यहां पांच दिन रहेंगे। इस दौरान वे संघ के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ विचार-विमर्श करके 2017 की चुनौतियों से पार पाने के उपायों पर चर्चा करेंगे। साथ ही बैठक से निकले निष्कर्षों के आधार पर कार्ययोजना बनेगी और इसके अनुसार काम शुरू कराने पर भी विचार-विमर्श होगा।
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इस पूरे काम की समीक्षा करने संघ प्रमुख मोहन भागवत खुद आएंगे। वे आगामी 14 से 18 फरवरी तक कानपुर में रुकेंगे और यूपी की स्थिति की समीक्षा करेंगे। इसके निष्कर्षों के आधार पर प्रदेश के कुछ बड़े भाजपा नेताओं पर कार्रवाई हो सकती है।

इसलिए सता रही है चिंता

RSS to take hard decision against UP BJP leaders.

वैसे तो संघ अक्सर भाजपा से रिश्ते की बात पर पल्ला झाड़ लेता है, लेकिन यह बात किसी से ढंकी-छिपी नहीं है कि वह भाजपा के मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। अभी हाल ही निपटे लोकसभा चुनाव में तो यह पूरी तरह साबित भी हो चुका है। भाजपा की पराजय पर संघ भी निशाने पर आता है।

शायद यही वजह है कि प्रदेश का विधानसभा चुनाव भले ही 2017 में हो, लेकिन संघ का शीर्ष नेतृत्व उस चुनाव के लिए प्रबंधन से लेकर संगठनात्मक तंत्र की मजबूती का काम अगले एक से डेढ़ वर्षों में ही पूरा कर लेना चाहता है। जानकारी के मुताबिक, भैयाजी जोशी इसी सिलसिले में लखनऊ आ रहे हैं।

जानकारी जुटाने के निर्देश: बैठक के सिलसिले में सभी जरूरी जानकारी जुटाने को कहा गया है। मसलन अलग-अलग क्षेत्रों में संघ परिवार के संगठनों की खासतौर से भाजपा की पकड़ व पहुंच कैसी है। सामाजिक समीकरणों के आधार पर संघ परिवार के संगठनों की शक्ति कैसी है।

ये की गईं शिकायतें

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उन शिकायतों की भी पड़ताल की जा रही है, जिनमें कहा गया है कि  प्रदेश से लेकर जिलों तक एक गुट विशेष को ही तवज्जो दी जा रही है। संगठन विस्तार के नाम पर ऐसे-ऐसे लोगों को जोड़ा जा रहा है जिनका भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं से कोई सामंजस्य व संपर्क नहीं है।

दूसरे दलों से आए नेता जो अब भाजपा के सांसद हैं, उनका भाजपा के पुराने लोगों से कोई तालमेल नहीं है। शिकायतें सही मिलीं तो प्रमुख नेताओं सहित कई लोगों को नेपथ्य में भेजा जा सकता है।

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