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'मिशन मोड' में आया संघ, यूपी पर ही होगा पूरा फोकस

Thu, 17 Dec 2015 01:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 17 Dec 2015 01:28 AM IST
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RSS to focus on UP for next one year.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अगले एक साल तक उत्तर प्रदेश पर पूरा फोकस करने का फैसला किया है। इसके लिए संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के प्रदेश में विस्तृत दौरे होंगे। साथ ही शाखाओं को सक्रिय करने में पूरी ताकत लगाई जाएगी।

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इस एजेंडे पर नए साल से नए तेवरों के साथ काम करने की रणनीति बनी है। संघ के सह सरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले 15 जनवरी को लखनऊ आने वाले हैं। वह यहां तीन दिन रहेंगे। फरवरी में 2-3 तारीख को सरकार्यवाह सुरेश जोशी ‘भैया जी’ का दौरा तय हो चुका है।
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संघ के शीर्ष नेतृत्व की शाखाओं पर ध्यान देने की रणनीति संघ प्रचारकों के लिए किसी कड़े इम्तिहान से कम नहीं साबित होगी।
होसबोले लखनऊ के बाद गोरखपुर और फिर काशी क्षेत्र में जाकर शाखाओं के कामकाज की समीक्षा करेंगे।

पश्चिमी उप्र के लिए भी शीर्ष पदाधिकारियों के दौरे लगाए जा रहे हैं। दौरा करने वाले शीर्ष पदाधिकारी एक साथ दो काम करेंगे। वे 2014 में लखनऊ में हुई संघ की केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में हुए फैसले और तय किए गए एजेंडे के आधार पर प्रदेश में कामकाज की स्थिति का विश्लेषण करेंगे।

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इन बिंदुओं पर होगा खासा ध्यान

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संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक विश्लेषण और समीक्षा के दौरान खासतौर से यह जरूर देखा जाएगा कि कार्यकारी मंडल के फैसले के तहत प्रचारकों द्वारा गोद ली गई शाखाओं की स्थिति क्या है? वे कितना सक्रिय हैं और उन पर जुटने वाली संख्या कितनी है? इसी के साथ बैठक में आने वाले नगर, जिला, विभाग, प्रांत और क्षेत्र के पदाधिकारियों को युवाओं को शाखाओं से जोड़ने पर मुख्य फोकस रखने के तौर-तरीकों के बारे में समझाया जाएगा।

यह है वजह : अक्तूबर 2014 में लखनऊ में संघ के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में गांवों व ग्रामीणों के बीच अपेक्षाकृत बहुत मजबूत पकड़ न होने पर चिंता जताई गई थी। साथ ही पिछड़ों व दलित वर्ग के लोगों को नजदीक लाने पर भी जोर दिया गया था। यह तय किया गया था कि मुख्य मार्गों पर पड़ने वाले गांवों में एक साल में संघ की शाखाएं न सिर्फ स्थापित कर ली जाएं बल्कि उन्हें सक्रिय भी कर दिया जाए।

संघ को गांव के विकास से जोड़कर लोगों के नजदीक लाने का काम भी किया जाए। संघ अब उसी काम की समीक्षा करना चाहता है। इसी नाते दौरे और बैठकों की योजना बनी है। जाहिर है, यूपी में संघ के प्रचारकों के लिए यह समीक्षा किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं रहने वाली।

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