आम बैठकों से अलग होती हैं संघ की बैठकें
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बैठकों की प्रक्रिया आम बैठकों से अलग होती है। अन्य बैठकों में सबसे छोटे पदाधिकारी पहले आते हैं और शीर्ष पदाधिकारी बाद में। पर, संघ की बैठकों में पहले सबसे शीर्षस्थ और उसके बाद क्रमश: कनिष्ठ फोरम के पदाधिकारी आते हैं।
इसी परंपरा के अनुसार, संघ के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में शामिल होने के लिए सर संघचालक पहले ही लखनऊ पहुंच गए हैं। इसके बाद क्रमश: उनसे कनिष्ठ पदाधिकारी एक-एक करके आएंगे।
इसी क्रम में सर संघचालक के बाद सर कार्यवाह और सह सरकार्यवाह व संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी पहुंचते हैं। ये लोग मंगलवार सुबह तक लखनऊ पहुंचेंगे। सरकार्यवाह और सह सरकार्यवाह के बाद संघ के जन संगठनों के राष्ट्रीय महामंत्री बैठक में शामिल होने के लिए आते हैं।
संघ ने इन जन संगठनों को एक तरह से स्वतंत्र अस्तित्व का दर्जा दे रखा है। इनमें विश्व हिंदू परिषद, भाजपा, विद्यार्थी परिषद, किसान संघ, मजदूर संघ व विद्या भारती आते हैं, जो सीधे लोगों के बीच काम करते हैं।
वापस जाने के लिए भी अनुशासन
जनसंगठनों के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) के आने के बाद क्षेत्रीय पदाधिकारी आते हैं। इस लिहाज से लखनऊ बैठक में क्षेत्र संघ चालक, क्षेत्र कार्यवाह और क्षेत्र प्रचारक 15 से 16 अक्तूबर की सुबह तक लखनऊ पहुंच जाएंगे।
इसके बाद 17 से 19 अक्तूबर तक चलने वाली कार्यकारी मंडल की बैठक में इन पदाधिकारियों के साथ ही प्रांत संघ चालक, प्रांत कार्यवाह और प्रांत प्रचारक भी शामिल होंगे। बैठक समाप्त होने के बाद सबसे पहले प्रांत स्तर के पदाधिकारी, फिर क्षेत्र, फिर राष्ट्रीय पदाधिकारी और इसके बाद सरकार्यवाह व सर संघचालक लौटेंगे।
अधिकतर केंद्रीय पदाधिकारी पहुंचे
संघ के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में शामिल होने के लिए सोमवार रात तक अधिकतर पदाधिकारी राजधानी पहुंच गए हैं। सरसंघ चालक मोहन भागवत रविवार रात को ही आ गए थे। सहकार्यवाह भैयाजी जोशी, सह सरकार्यवाह, दत्तात्रेय होसबोले, सुरेश सोनी, प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य आदि सोमवार को लखनऊ पहुंच गए। कुछ पदाधिकारी मंगलवार को आएंगे।
मौसम से व्यवस्था में बदलाव
हुदहुद के कारण आए मौसम में बदलाव का असर संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक की तैयारियों पर भी पड़ा है। निरालानगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में बाहर बने भोजन पंडाल को अंदर शिफ्ट किया गया है।