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Lucknow News: रोबोटिक सर्जरी से महिला को मिला नया जीवन, लिवर खराब होने से बचा
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केजीएमयू।
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के जनरल सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने बेहद जटिल रोबोटिक सर्जरी कर 21 वर्षीय महिला की जान बचाई है। विभाग में पहली बार रोबोटिक विधि से ''हेपेटिकोजेजुनोस्टॉमी'' सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। समय पर हुए इस ऑपरेशन से महिला का लिवर खराब होने से बच गया।
आजमगढ़ निवासी महिला ने कुछ समय पहले स्थानीय अस्पताल में पित्त की थैली की पथरी का ऑपरेशन कराया था। उस दौरान पित्त की नली में चोट लग गई थी, जिससे नली सिकुड़ गई और पित्त का प्रवाह रुक गया। चिकित्सा विज्ञान में इसे ''बाइल डक्ट स्ट्रिक्चर'' कहा जाता है। इसके कारण मरीज को बार-बार पीलिया, पेट दर्द और उल्टी की गंभीर समस्या हो रही थी।
मरीज के केजीएमयू पहुंचने पर जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. अवनीश कुमार ने दोबारा ऑपरेशन का निर्णय लिया। करीब चार घंटे चले इस रोबोटिक ऑपरेशन में पित्त की नली के क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक कर उसे छोटी आंत (जेजुनम) से जोड़ा गया। इस प्रक्रिया से लिवर से पित्त का प्रवाह अब सामान्य हो गया है।
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ऑपरेशन टीम के सदस्य डॉ. अक्षय आनंद ने बताया कि ऑपरेशन में मात्र 20 से 25 हजार रुपये का खर्च आया। निजी अस्पतालों में इस सर्जरी का खर्च 4 से 5 लाख रुपये तक आता है।
ऑपरेशन टीम के सदस्य
डॉ. अवनीश कुमार, डॉ. अक्षय आनंद, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. अमित कर्णिक, डॉ. हेमंत, डॉ. गार्गी, डॉ. कौशिक, डॉ. ज्योति, डॉ. इंद्रनील, डॉ. आशीष, डॉ. आदित्य, डॉ. याशी, डॉ. अदनान, डॉ. श्रेया, एनेस्थीसिया टीम ये डॉ. अजय चौधरी, डॉ. अभिषेक राजपूत, डॉ. अंजना, ओटी सहायक मयंक।
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आजमगढ़ निवासी महिला ने कुछ समय पहले स्थानीय अस्पताल में पित्त की थैली की पथरी का ऑपरेशन कराया था। उस दौरान पित्त की नली में चोट लग गई थी, जिससे नली सिकुड़ गई और पित्त का प्रवाह रुक गया। चिकित्सा विज्ञान में इसे ''बाइल डक्ट स्ट्रिक्चर'' कहा जाता है। इसके कारण मरीज को बार-बार पीलिया, पेट दर्द और उल्टी की गंभीर समस्या हो रही थी।
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मरीज के केजीएमयू पहुंचने पर जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. अवनीश कुमार ने दोबारा ऑपरेशन का निर्णय लिया। करीब चार घंटे चले इस रोबोटिक ऑपरेशन में पित्त की नली के क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक कर उसे छोटी आंत (जेजुनम) से जोड़ा गया। इस प्रक्रिया से लिवर से पित्त का प्रवाह अब सामान्य हो गया है।
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ऑपरेशन टीम के सदस्य डॉ. अक्षय आनंद ने बताया कि ऑपरेशन में मात्र 20 से 25 हजार रुपये का खर्च आया। निजी अस्पतालों में इस सर्जरी का खर्च 4 से 5 लाख रुपये तक आता है।
ऑपरेशन टीम के सदस्य
डॉ. अवनीश कुमार, डॉ. अक्षय आनंद, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. अमित कर्णिक, डॉ. हेमंत, डॉ. गार्गी, डॉ. कौशिक, डॉ. ज्योति, डॉ. इंद्रनील, डॉ. आशीष, डॉ. आदित्य, डॉ. याशी, डॉ. अदनान, डॉ. श्रेया, एनेस्थीसिया टीम ये डॉ. अजय चौधरी, डॉ. अभिषेक राजपूत, डॉ. अंजना, ओटी सहायक मयंक।