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Lucknow News: 50 करोड़ की डबलडेकर बसें खरीद लीं, छह महीने तक किया सर्वे, फिर भी हो गईं फेल
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50 करोड़ की डबलडेकर बसें खरीद लीं, छह महीने तक किया सर्वे, फिर भी हो गईं फेल
रोडवेज लखनऊ परिक्षेत्र का मामला
दो बसें डिपो में हो गईं खराब, अयोध्या रूट की बसें बंद
लखनऊ। रोडवेज प्रशासन ने 50 करोड़ रुपये की एसी डबलडेकर बसें हड़बड़ी में खरीद लीं। छह महीने तक सर्वे व एनओसी की मशक्कत की। लेकिन स्पीड जैसे अहम बिंदु पर मंथन किए बगैर ही बसों को सड़कों पर उतार दिया, जिससे पूरी व्यवस्था फेल हो गई। अयोध्या रूट की दो बसें बंद हो गईं। प्रयागराज में बसों को लोड फैक्टर नहीं मिल रहा। दो बसें डिपो में खराब हो गईं। सिर्फ गोरखपुर में दो बसें चल रही हैं।
मामला रोडवेज लखनऊ परिक्षेत्र का है। परिक्षेत्र में 930 से अधिक बसों का संचालन होता है। बेड़े को मजबूत बनाने व कायाकल्प करने के लिए डबलडेकर बसों को जोड़ने की योजना बनाई गई। सूत्र बताते हैं कि आनन-फानन ढाई करोड़ रुपये प्रति बस की दर से 20 बसें रोडवेज ने प्रदेशभर के लिए खरीदीं। इसमें लखनऊ परिक्षेत्र का आठ बसें मिलीं। खरीदारी के बाद बस को बाराबंकी डिपो में खड़ा कर दिया गया। साथ ही करीब छह महीने रूट सर्वे, विभिन्न विभागों की एनओसी आदि में लगा दिए। इसके बाद एक जोड़ी डबलडेकर बस लखनऊ से अयोध्या के बीच शुरू की। जो कुछ महीनों बाद बंद कर दी गई। स्पीड कम होने के कारण बस को यात्री नहीं मिल रहे थे। जबकि शेष छह बसें बाराबंकी डिपो में ही खड़ी रहीं। कुछ समय बाद अफसरों ने मंथन कर फिर से डबलडेकर बस अयोध्या रूट पर उतारी। साथ ही प्रयागराज व गोरखपुर के लिए दो-दो बसें भेज दी गईं। अयोध्या रूट पर उतारी गईं बसों में लोड फैक्टर कम रहा। यात्री ही नहीं मिले, जिससे बस दोबारा बंद हो गई। वहीं प्रयागराज में भी कमोबेश बसों की ऐसी ही दशा है। हालांकि गोरखपुर में चल रहीं बसें यात्रियों को भा रही हैं, जिसके पीछे इनकों छोटे रूट पर चलाया जाना है। ऐसे में डबलडेकर बसों से रोडवेज का कायाकल्प किया जाना था, लेकिन अब बसें डिपो में धूल फांक रही हैं। बाराबंकी डिपो में दो बसें खराब खड़ी हैं। एक का शीशा टूटा है, दूसरे की बैटरी खराब हो गई है।
सर्वे किया, स्पीड पर नहीं हुआ विचार
डबलडेकर बसों की अधिकतम स्पीड 50 किमी प्रति घंटे है। बस ऑपरेटर नरेश ग्रोवर ने बताया कि जब बसों के संचालन के लिए छह महीने तक सर्वे आदि किया गया तो स्पीड जैसे अहम बिंदु पर बात क्यों नहीं की गई। दुर्घटना से बचने के लिए स्पीड लिमिट बढ़ाई नहीं जा सकती, ऐसे में डबलडेकर बसें सिर्फ सफेद हाथी साबित हो रही हैं।
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इन बिंदुओं पर भी नहीं किया गया मंथन
अफसरों ने सर्वे के दाैरान स्पीड लिमिट के अतिरिक्त चार्जिंग स्टेशनों, दूरी, यात्रियों की संख्या आदि को लेकर भी ढंग से सर्वे नहीं किया। बस को लंबी दूरी के गंतव्यों के लिए उतार दिया, जिससे वे फेल हो गईं। लखनऊ से सीतापुर, रायबरेली, हरदोई आदि जगहों के लिए बसें चार्जिंग स्टेशन नहीं होने के कारण चल नहीं सकती। जबकि कानपुर के लिए डबलडेकर बस को आलमबाग तक नहीं पहुंचाया जा सकता। अब जब बसें खड़ी हो गईं और कंडम हो रही हैं तो अफसरों ने दोबारा मंथन शुरू किया है।
आधिकारिक वर्जन
स्पीड लिमिट कम होने के कारण अयोध्या रूट की डबलडेकर बसें बंद हुई हैं। गोरखपुर में संचालन अच्छा है। नए रूट तलाशे जा रहे हैं। जल्द ही यात्रियों की सुविधा के लिए डबलडेकर को सड़कों पर उतारा जाएगा।
-विमल राजन, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज
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रोडवेज लखनऊ परिक्षेत्र का मामला
दो बसें डिपो में हो गईं खराब, अयोध्या रूट की बसें बंद
लखनऊ। रोडवेज प्रशासन ने 50 करोड़ रुपये की एसी डबलडेकर बसें हड़बड़ी में खरीद लीं। छह महीने तक सर्वे व एनओसी की मशक्कत की। लेकिन स्पीड जैसे अहम बिंदु पर मंथन किए बगैर ही बसों को सड़कों पर उतार दिया, जिससे पूरी व्यवस्था फेल हो गई। अयोध्या रूट की दो बसें बंद हो गईं। प्रयागराज में बसों को लोड फैक्टर नहीं मिल रहा। दो बसें डिपो में खराब हो गईं। सिर्फ गोरखपुर में दो बसें चल रही हैं।
मामला रोडवेज लखनऊ परिक्षेत्र का है। परिक्षेत्र में 930 से अधिक बसों का संचालन होता है। बेड़े को मजबूत बनाने व कायाकल्प करने के लिए डबलडेकर बसों को जोड़ने की योजना बनाई गई। सूत्र बताते हैं कि आनन-फानन ढाई करोड़ रुपये प्रति बस की दर से 20 बसें रोडवेज ने प्रदेशभर के लिए खरीदीं। इसमें लखनऊ परिक्षेत्र का आठ बसें मिलीं। खरीदारी के बाद बस को बाराबंकी डिपो में खड़ा कर दिया गया। साथ ही करीब छह महीने रूट सर्वे, विभिन्न विभागों की एनओसी आदि में लगा दिए। इसके बाद एक जोड़ी डबलडेकर बस लखनऊ से अयोध्या के बीच शुरू की। जो कुछ महीनों बाद बंद कर दी गई। स्पीड कम होने के कारण बस को यात्री नहीं मिल रहे थे। जबकि शेष छह बसें बाराबंकी डिपो में ही खड़ी रहीं। कुछ समय बाद अफसरों ने मंथन कर फिर से डबलडेकर बस अयोध्या रूट पर उतारी। साथ ही प्रयागराज व गोरखपुर के लिए दो-दो बसें भेज दी गईं। अयोध्या रूट पर उतारी गईं बसों में लोड फैक्टर कम रहा। यात्री ही नहीं मिले, जिससे बस दोबारा बंद हो गई। वहीं प्रयागराज में भी कमोबेश बसों की ऐसी ही दशा है। हालांकि गोरखपुर में चल रहीं बसें यात्रियों को भा रही हैं, जिसके पीछे इनकों छोटे रूट पर चलाया जाना है। ऐसे में डबलडेकर बसों से रोडवेज का कायाकल्प किया जाना था, लेकिन अब बसें डिपो में धूल फांक रही हैं। बाराबंकी डिपो में दो बसें खराब खड़ी हैं। एक का शीशा टूटा है, दूसरे की बैटरी खराब हो गई है।
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सर्वे किया, स्पीड पर नहीं हुआ विचार
डबलडेकर बसों की अधिकतम स्पीड 50 किमी प्रति घंटे है। बस ऑपरेटर नरेश ग्रोवर ने बताया कि जब बसों के संचालन के लिए छह महीने तक सर्वे आदि किया गया तो स्पीड जैसे अहम बिंदु पर बात क्यों नहीं की गई। दुर्घटना से बचने के लिए स्पीड लिमिट बढ़ाई नहीं जा सकती, ऐसे में डबलडेकर बसें सिर्फ सफेद हाथी साबित हो रही हैं।
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इन बिंदुओं पर भी नहीं किया गया मंथन
अफसरों ने सर्वे के दाैरान स्पीड लिमिट के अतिरिक्त चार्जिंग स्टेशनों, दूरी, यात्रियों की संख्या आदि को लेकर भी ढंग से सर्वे नहीं किया। बस को लंबी दूरी के गंतव्यों के लिए उतार दिया, जिससे वे फेल हो गईं। लखनऊ से सीतापुर, रायबरेली, हरदोई आदि जगहों के लिए बसें चार्जिंग स्टेशन नहीं होने के कारण चल नहीं सकती। जबकि कानपुर के लिए डबलडेकर बस को आलमबाग तक नहीं पहुंचाया जा सकता। अब जब बसें खड़ी हो गईं और कंडम हो रही हैं तो अफसरों ने दोबारा मंथन शुरू किया है।
आधिकारिक वर्जन
स्पीड लिमिट कम होने के कारण अयोध्या रूट की डबलडेकर बसें बंद हुई हैं। गोरखपुर में संचालन अच्छा है। नए रूट तलाशे जा रहे हैं। जल्द ही यात्रियों की सुविधा के लिए डबलडेकर को सड़कों पर उतारा जाएगा।
-विमल राजन, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज