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Lucknow News: हाशिये पर सड़क सुरक्षा, वाहनों की जांच को नहीं बचे अफसर
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तीनों पीटीओ ट्रांसफर, वाहनों की चेकिंग के लिए नहीं बचे अफसर
लखनऊ। राजधानी में सड़क सुरक्षा की स्थिति हाशिये पर है। सड़क हादसों में लगातार इजाफा हो रहा है। वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन चेकिंग के लिए अफसर ही नहीं हैं। लखनऊ में तैनात तीन यात्री कर अधिकारियों पीटीओ आभा त्रिपाठी को आगरा, एसपी देव को हमीरपुर और अनीता वर्मा को चंदौली भेज दिया गया है। इटावा में तैनात विवेक सिंह को लखनऊ का पीटीओ बनाया गया था, लेकिन एक दिन बाद ही वह अपना ट्रांसफर रुकवाने में कामयाब रहे।
आलम यह है कि चेकिंग अभियान की पूरी जिम्मेदारी अब सिर्फ एआरटीओ प्रवर्तन आलोक यादव पर है। लखनऊ में वाहनों के अनुपात में पहले से ही पद कम हैं। यहां पर तीन एआरटीओ के पद हैं, लेकिन लंबे समय से सिर्फ एक ही पद भरा जा सका है। वहीं पीटीओ की सख्त जरूरत थी, लेकिन फिलहाल सारे पद खाली हैं।
बाबुओं का सिंडिकेट हावी
ट्रांसपोर्टनगर स्थित आरटीओ में वर्तमान में करीब 30 से अधिक बाबू पर काम रहे हैं। नई ट्रांसफर पॉलिसी में पांच और बाबुओं का लखनऊ ट्रांसफर कर दिया गया है। लेकिन लखनऊ से सिर्फ एक महिला बाबू का ही ट्रांसफर हुआ है। बाबुओं का सिंडिकेट ऐसा है कि ये कई वर्षों से यहीं डटे हैं।
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यूनियन ने पूरा किया वादा, बाबू गदगद
ट्रांसपोर्टनगर स्थित आरटीओ में गत वर्ष चुनाव हुआ था, जिसमें बाबुओं का ट्रांसफर नहीं होने देने का हवाला देकर कई पदाधिकारियों ने जीत हासिल की थी। ट्रांसफर सीजन में यूनियन पदाधिकारियों का वादा सही साबित हुआ। बाबुओं को ट्रांसफर से बचाने में यूनियन सफल रही। सूत्रों ने बताया कि इसे लेकर यूनियन फूली नहीं समा रही है।
दो थे, एक एमवीआई और बढ़ गए
लखनऊ में दो मोटर वीकल इंस्पेक्टर एमवीआई विष्णु कुमार व प्रशांत कुमार पहले से तैनात हैं। मथुरा में तैनात एमवीआई प्रदीप यादव का भी उनके एक खास अधिकारी ने लखनऊ ट्रांसफर करवा लिया है। लिहाजा लखनऊ में तीन एमवीआई हो गए हैं। इसके पहले एमवीआई सुशील कुमार लखनऊ में थे, जो प्रमोट होकर बहराइच के एआरटीओ बन चुके हैं।
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आलम यह है कि चेकिंग अभियान की पूरी जिम्मेदारी अब सिर्फ एआरटीओ प्रवर्तन आलोक यादव पर है। लखनऊ में वाहनों के अनुपात में पहले से ही पद कम हैं। यहां पर तीन एआरटीओ के पद हैं, लेकिन लंबे समय से सिर्फ एक ही पद भरा जा सका है। वहीं पीटीओ की सख्त जरूरत थी, लेकिन फिलहाल सारे पद खाली हैं।
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बाबुओं का सिंडिकेट हावी
ट्रांसपोर्टनगर स्थित आरटीओ में वर्तमान में करीब 30 से अधिक बाबू पर काम रहे हैं। नई ट्रांसफर पॉलिसी में पांच और बाबुओं का लखनऊ ट्रांसफर कर दिया गया है। लेकिन लखनऊ से सिर्फ एक महिला बाबू का ही ट्रांसफर हुआ है। बाबुओं का सिंडिकेट ऐसा है कि ये कई वर्षों से यहीं डटे हैं।
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यूनियन ने पूरा किया वादा, बाबू गदगद
ट्रांसपोर्टनगर स्थित आरटीओ में गत वर्ष चुनाव हुआ था, जिसमें बाबुओं का ट्रांसफर नहीं होने देने का हवाला देकर कई पदाधिकारियों ने जीत हासिल की थी। ट्रांसफर सीजन में यूनियन पदाधिकारियों का वादा सही साबित हुआ। बाबुओं को ट्रांसफर से बचाने में यूनियन सफल रही। सूत्रों ने बताया कि इसे लेकर यूनियन फूली नहीं समा रही है।
दो थे, एक एमवीआई और बढ़ गए
लखनऊ में दो मोटर वीकल इंस्पेक्टर एमवीआई विष्णु कुमार व प्रशांत कुमार पहले से तैनात हैं। मथुरा में तैनात एमवीआई प्रदीप यादव का भी उनके एक खास अधिकारी ने लखनऊ ट्रांसफर करवा लिया है। लिहाजा लखनऊ में तीन एमवीआई हो गए हैं। इसके पहले एमवीआई सुशील कुमार लखनऊ में थे, जो प्रमोट होकर बहराइच के एआरटीओ बन चुके हैं।