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सड़कों के साथ नियमों को भी खोद रहीं निजी कम्पनियां
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बिना अनुमति लिए सड़कों की हो रही खोदाई, मरम्मत तक नहीं हो रही
एक साल के अंदर बनी सड़क को नहीं काटा जाएगा। इसके अलावा सड़क काटने से पहले इसकी जानकारी संबंधित विभाग को दी जाएगी और कटिंग करने के बाद सड़क की तत्काल मरम्मत की जाएगी...।
रोड कटिंग को लेकर ये सख्त नियम बने तो हैं, लेकिन निजी कंपनियों के ठेकेदार सरकारी विभागों, अफसरों और इंजीनियरों से मिलीभगत कर इनका खुलेआम मखौल उड़ा रहे हैं।
एक ओर नई सड़कें बिना अनुमति लिए ही खोद दी जा रही हैं और इनकी मरम्मत भी नहीं की जा रही है। बारिश को देखते हुए सितम्बर तक रोड कटिंग पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
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हालांकि, इसके बाद भी अवैध रोड कटिंग बंद नहीं हो रही है। इन दिनों शहर में गोमतीनगर, इंदिरानगर, अलीगंज, इस्माइलगंज, बटलर पैलेस रोड सहित ज्यादातर इलाकों में रोड कटिंग हो रही है।
कहीं निजी टेलीकॉम और इंटरटेनमेंट कंपनियां ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछा रही हैं तो कहीं बिजली विभाग का केबल डाला जा रहा है। इसके लिए नई सड़कों को भी खोद दिया जा रहा है।
हाल में ही बनी बटलर पैलेस रोड इस समय निजी कंपनी का केबल बिछाने को खोदी जा रही है। वहीं, अलीगंज में बिजली का केबल डालने के लिए खोदाई की गई है।
इंदिरानगर में कलेवा चौराहे के आसपास, इस्माइलगंज द्वितीय वार्ड और जानकीपुरम सहित शहर की कई कॉलोनियों में बिना अनुमति रोड कटिंग के मामले पकड़े गए।
इसके बाद भी अवैध रोड कटिंग बंद नहीं हो रही है। बीते बृहस्पतिवार को गोमतीनगर में पीएनजी गैस का पाइप बिछाने के लिए भी रोक के बाद अवैध रोड कटिंग पकड़ी गई थी। ऐसा करने वाले सड़कों को मरम्मत किए बिना छोड़ देते हैं।
कम अनुमति लेकर अधिक काट रहे सड़कें
मरम्मत की जिम्मेदारी न आए और बैंक गारंटी न जमा करनी पड़े, इसके लिए निजी कंपनियां कम अनुमति लेकर अधिक सड़क काट रही हैं। इतना ही नहीं एक अनुमति पर कई जगह सड़क काटी जा रही है। ऐसे मामले कई बार नगर निगम के इंजीनियर पकड़ चुके हैं। इसके बाद रिलायंस जियो इंफोकाम पर जुर्माना भी लगाया गया।
पुराने आदेश की आड़ में बर्बाद कर रहे सड़कें
प्रदेश के मुख्य सचिव की ओर से 15 अक्तूबर 2012 को जारी शासनादेश मेंफोर जी सेवा के लिए रिलायंस जियो इंफोकाम लिमिटेड को रोड कटिंग का पैसा जमा करने से यह कहते हुए छूट दी गई कि कंपनी रोड कटिंग की मरम्मत का काम खुद करेगी। इसी आदेश में निजी कंपनी को यह राहत भी दी गई कि उससे बीएसएनएल की तरह पिट के आधार पर रोड कटिंग की बैंक गारंटी जमा कराई जाए। इस आदेश पर अब भी निजी कंपनी धड़ल्ले से रोड कटिंग कर रही हैं।
सात साल पहले सदन पास कर चुका यह आदेश
करीब सात साल पहले शासन के आदेश पर एक निजी कपंनी को रोड कटिंग शुल्क जमा करने से छूट दिए जाने पर नगर निगम सदन में खूब हंगामा हुआ था। मामला उच्च न्यायालय तक गया था। उस समय सदन में यह प्रस्ताव पास किया गया था कि जो सड़कें एक साल के अंदर बनाई गई हैं उन्हें नहीं काटा जाएगा। यदि किसी कंपनी या सरकारी विभाग को अपना केबल डालना है तो वह पहले से सूचित करे, ताकि सड़क बनाने से पहले वह काम कराया जाए।
कोर्ट की सख्ती के बाद अब होगी एफआईआर
बड़े नेताओं और अफसरों के दबाव में अवैध रोड कटिंग पर चुप्पी साधे रहने वाले अफसर अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद कार्रवाई की तैयारी में हैं। नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि जिन कंपनियों ने रोड कटिंग करने के बाद मरम्मत नहीं की, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी। नगर निगम ने शहर में कितनी सड़क काटने की अनुमति दी, उसमें कटिंग के बाद कितनी सड़क बनाई गई, इसकी रिपोर्ट दो दिन में तैयारी की जाएगी।
मरम्मत पर ही खर्च होगा रोड कटिंग का पैसा
नगर आयुक्त ने बताया कि रोड कटिंग का जो पैसा जमा होगा, उसे इसी पर खर्च किया जाएगा। रोड कटिंग के पैसे का इस्तेमाल किसी अन्य काम पर नहीं किया जाएगा। इसे लेकर स्पष्ट आदेश भी जारी कर दिया गया है।
सड़कों की करेंगे मरम्मत
नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि रोड कटिंग कई विभागों की सड़कों पर होती है। इसे लेकर संयुक्त रूप से काम होगा। डीएम की अध्यक्षता में बैठक हुई है। इसमें तय हुआ कि नगर निगम, एलडीए और आवास विकास सभी मिलकर रोड कटिंग को लेकर काम करेंगे। जो सड़कें खुदी पड़ी हैं, उनकी मरम्मत कराएंगे।
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एक साल के अंदर बनी सड़क को नहीं काटा जाएगा। इसके अलावा सड़क काटने से पहले इसकी जानकारी संबंधित विभाग को दी जाएगी और कटिंग करने के बाद सड़क की तत्काल मरम्मत की जाएगी...।
रोड कटिंग को लेकर ये सख्त नियम बने तो हैं, लेकिन निजी कंपनियों के ठेकेदार सरकारी विभागों, अफसरों और इंजीनियरों से मिलीभगत कर इनका खुलेआम मखौल उड़ा रहे हैं।
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एक ओर नई सड़कें बिना अनुमति लिए ही खोद दी जा रही हैं और इनकी मरम्मत भी नहीं की जा रही है। बारिश को देखते हुए सितम्बर तक रोड कटिंग पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
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हालांकि, इसके बाद भी अवैध रोड कटिंग बंद नहीं हो रही है। इन दिनों शहर में गोमतीनगर, इंदिरानगर, अलीगंज, इस्माइलगंज, बटलर पैलेस रोड सहित ज्यादातर इलाकों में रोड कटिंग हो रही है।
कहीं निजी टेलीकॉम और इंटरटेनमेंट कंपनियां ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछा रही हैं तो कहीं बिजली विभाग का केबल डाला जा रहा है। इसके लिए नई सड़कों को भी खोद दिया जा रहा है।
हाल में ही बनी बटलर पैलेस रोड इस समय निजी कंपनी का केबल बिछाने को खोदी जा रही है। वहीं, अलीगंज में बिजली का केबल डालने के लिए खोदाई की गई है।
इंदिरानगर में कलेवा चौराहे के आसपास, इस्माइलगंज द्वितीय वार्ड और जानकीपुरम सहित शहर की कई कॉलोनियों में बिना अनुमति रोड कटिंग के मामले पकड़े गए।
इसके बाद भी अवैध रोड कटिंग बंद नहीं हो रही है। बीते बृहस्पतिवार को गोमतीनगर में पीएनजी गैस का पाइप बिछाने के लिए भी रोक के बाद अवैध रोड कटिंग पकड़ी गई थी। ऐसा करने वाले सड़कों को मरम्मत किए बिना छोड़ देते हैं।
कम अनुमति लेकर अधिक काट रहे सड़कें
मरम्मत की जिम्मेदारी न आए और बैंक गारंटी न जमा करनी पड़े, इसके लिए निजी कंपनियां कम अनुमति लेकर अधिक सड़क काट रही हैं। इतना ही नहीं एक अनुमति पर कई जगह सड़क काटी जा रही है। ऐसे मामले कई बार नगर निगम के इंजीनियर पकड़ चुके हैं। इसके बाद रिलायंस जियो इंफोकाम पर जुर्माना भी लगाया गया।
पुराने आदेश की आड़ में बर्बाद कर रहे सड़कें
प्रदेश के मुख्य सचिव की ओर से 15 अक्तूबर 2012 को जारी शासनादेश मेंफोर जी सेवा के लिए रिलायंस जियो इंफोकाम लिमिटेड को रोड कटिंग का पैसा जमा करने से यह कहते हुए छूट दी गई कि कंपनी रोड कटिंग की मरम्मत का काम खुद करेगी। इसी आदेश में निजी कंपनी को यह राहत भी दी गई कि उससे बीएसएनएल की तरह पिट के आधार पर रोड कटिंग की बैंक गारंटी जमा कराई जाए। इस आदेश पर अब भी निजी कंपनी धड़ल्ले से रोड कटिंग कर रही हैं।
सात साल पहले सदन पास कर चुका यह आदेश
करीब सात साल पहले शासन के आदेश पर एक निजी कपंनी को रोड कटिंग शुल्क जमा करने से छूट दिए जाने पर नगर निगम सदन में खूब हंगामा हुआ था। मामला उच्च न्यायालय तक गया था। उस समय सदन में यह प्रस्ताव पास किया गया था कि जो सड़कें एक साल के अंदर बनाई गई हैं उन्हें नहीं काटा जाएगा। यदि किसी कंपनी या सरकारी विभाग को अपना केबल डालना है तो वह पहले से सूचित करे, ताकि सड़क बनाने से पहले वह काम कराया जाए।
कोर्ट की सख्ती के बाद अब होगी एफआईआर
बड़े नेताओं और अफसरों के दबाव में अवैध रोड कटिंग पर चुप्पी साधे रहने वाले अफसर अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद कार्रवाई की तैयारी में हैं। नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि जिन कंपनियों ने रोड कटिंग करने के बाद मरम्मत नहीं की, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी। नगर निगम ने शहर में कितनी सड़क काटने की अनुमति दी, उसमें कटिंग के बाद कितनी सड़क बनाई गई, इसकी रिपोर्ट दो दिन में तैयारी की जाएगी।
मरम्मत पर ही खर्च होगा रोड कटिंग का पैसा
नगर आयुक्त ने बताया कि रोड कटिंग का जो पैसा जमा होगा, उसे इसी पर खर्च किया जाएगा। रोड कटिंग के पैसे का इस्तेमाल किसी अन्य काम पर नहीं किया जाएगा। इसे लेकर स्पष्ट आदेश भी जारी कर दिया गया है।
सड़कों की करेंगे मरम्मत
नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि रोड कटिंग कई विभागों की सड़कों पर होती है। इसे लेकर संयुक्त रूप से काम होगा। डीएम की अध्यक्षता में बैठक हुई है। इसमें तय हुआ कि नगर निगम, एलडीए और आवास विकास सभी मिलकर रोड कटिंग को लेकर काम करेंगे। जो सड़कें खुदी पड़ी हैं, उनकी मरम्मत कराएंगे।