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आयुष कॉलेजों में दाखिले में हेराफेरी : आयुर्वेद विभाग के दो कर्मचारी निलंबित, अन्य कर्मचारियों पर लटकी तलवार
Wed, 23 Nov 2022 11:50 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 23 Nov 2022 11:50 AM IST
सार
शासन ने तत्कालीन निदेशक प्रो एसएन सिंह और प्रभारी अधिकारी डॉ. उमाकांत यादव को निलंबित किया गया है। इनसे हुई पूछताछ के बाद एसटीएफ ने इन दोनों के ही विभाग के लिपिक राजेश सिंह और कैलाश भास्कर को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
आयुष कॉलेजों में दाखिले में हेराफेरी मामले में आयुर्वेद विभाग के दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। इन दोनों को चार दिन पहले एसटीएफ ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अब इन दोनों के खिलाफ हेराफेरी मामले में विभागीय जांच भी होगी। अब इनके संपर्क वाले अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
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गौरतलब है कि मामले में शासन ने तत्कालीन निदेशक प्रो एसएन सिंह और प्रभारी अधिकारी डॉ. उमाकांत यादव को निलंबित किया गया है। इनसे हुई पूछताछ के बाद एसटीएफ ने इन दोनों के ही विभाग के लिपिक राजेश सिंह और कैलाश भास्कर को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। नियमानुसार इन दोनों का निलंबन 24 घंटे के अंदर हो जाना चाहिए था लेकिन विभागीय अफसर चार दिन तक मामले को लटकाए रखे। आखिरकार मंगलवार को दोनों कर्मचारियों को निलंबित कर इनकी भूमिका की विभागीय जांच के लिए कमेटी बना दी है।
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सूत्रों का कहना है कि इन दोनों कर्मचारियों के निलंबन के बाद विभाग के अन्य कर्मचारियों पर भी तलवार लटक रही है। इनकी भूमिका भी की भी जांच चल रही है। आशंका है कि एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के बाद डिस्पैच कार्यालय के दो कर्मचारियों और अकाउंट शाखा के एक अन्य कर्मचारी पर गाज गिर सकती है। ये तीनों भी निदेशक के खास लोगों में शामिल थे। दस्तावेजों के हेरफेर में इनकी भूमिका बताई जा रही है।
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यूनानी और होम्योपैथिक अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू
इस मामले में शासन ने यूनानी निदेशालय के प्रभारी अधिकारी डॉ. मोहम्मद वसीम और होम्योपैथिक निदेशालय के कार्यवाहक संयुक्त निदेशक शिक्षा प्रो. विजय पुष्कर के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया था। आयुर्वेद के तत्कालीन निदेशक प्रो एसएन सिंह और प्रभारी अधिकारी डॉ. उमाकांत यादव के जेल जाने के बाद इन दोनों विभागों के अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच पड़ताल शुरू कर दी गई है। इसके लिए तीनों विभागों के निदेशकों से रिपोर्ट मांगी गई है। तीनों विभाग के निदेशकों की संयुक्त कमेटी इन दोनों की भूमिका की जांच करेंगे। फिर अपनी रिपोर्ट शासन को भेजेंगे। तीनों निदेशकों ने विभागीय दस्तावेजों की पड़ताल करने के साथ ही दोनों प्रभारी अधिकारियों से उनका पक्ष जानेंगे। इनके लिए दोनों को नोटिस भी जारी की गई है।