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मीटर आपूर्ति करने व लगाने वाली कंपनियों के गोरखधंधे का हुआ खुलासा

Tue, 03 Nov 2020 10:47 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 03 Nov 2020 10:47 PM IST
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Revelation of the racket of companies supplying and installing meters
बिजली मीटर
प्रदेश में बिजली के मीटरों की खरीद से लेकर लगवाने में एक के बाद एक नया खुलासा हो रहा है। ताजा मामला इटावा का है जहां पावरटेक कंपनी के मीटर बिना उपभोक्ताओं के परिसर में लगाए ही रीडिंग देते पाए गए हैं। दूसरी तरफ रायबरेली में उपभोक्ताओं के यहां मीटर लगाए बिना ही ऑनलाइन फीड कर देने का मामला सामने आया है। मीटर का अता-पता नहीं है और उपभोक्ताओं को बिल भेजे जा रहे हैं। दोनों ही मामलों में लिखा-पढ़ी शुरू हो गई है। मीटर निर्माता और लगाने वाली कंपनी को नोटिस जारी करके जवाब-तलब किया गया है।
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स्मार्ट मीटरों में भार व रीडिंग जंपिंग को लेकर खड़ा हुआ बखेड़ा अभी शांत भी नहीं हुआ है कि इलेक्ट्रानिक मीटरों की खरीद और उन्हें लगवाने में चल रहे गोरखधंधे की पोल खुलने लगी है। इटावा में विद्युत परीक्षण शाला द्वितीय में पावरटेक कंपनी के छह मीटर ऐसे पाए गए जिनमें परिसर में लगाए बगैर ही लाखों की रीडिंग बन रही है। विद्युत परीक्षण शाला द्वितीय, इटावा के सहायक अभियंता ने मीटरों के ब्योरे के साथ इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को भेजी है। इसके बाद मीटर निर्माता कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया जा रहा है।
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उधर, रायबरेली में जीनस पावर इन्फ्रा. लि. को अनमीटर्ड उपभोक्ताओं के यहां इलेक्ट्रानिक मीटर लगाने का जिम्मा सौंपा गया है। कंपनी ने उपभोक्ताओं के यहां मीटर लगाए बिना ही ऑनलाइन सिस्टम में मीटर स्थापित होना फीड कर दिया। उपभोक्ताओं के पास गलत बिल पहुंचने पर इसका खुलासा हुआ। विद्युत परीक्षण खंड द्वितीय गोराबाजार रायबरेली के अधिशासी अभियंता ने जीनस कंपनी को पत्र लिख कहा है कि उसने धोखाधड़ी जैसा कृत्य किया है। मीटरों का दुरुपयोग कर लाखों रुपये की क्षति पहुंचाई गई और मीटर का गबन किया गया है। अधिशासी अभियंता ने कंपनी को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए?
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राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा मीटरों को लेकर आए दिन हो रहे नए-नए खुलासों से उपभोक्ताओं के बीच मीटरों की गुणवत्ता संदेह के घेरे में आ गई है। इससे बिजली कंपनियों की छवि भी धूमिल हो रही है। जब तक मीटर निर्माता कंपनियो के खिलाफ  कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी तब तक यह गोरखधंधा चलता रहेगा। मीटर खरीद की सीबीआई जांच से ही पूरे रैकेट का पर्दाफाश हो सकता है।

 
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