LS Polls: भगवा ब्रिगेड के सियासी प्रयोगों की अब परीक्षा, नतीजों से तय होगी कितनी कारगर रहीं BJP की तैयारियां
नतीजों की कसौटी पर सबसे अधिक भाजपा की चुनावी तैयारियों को कसा जाएगा। सियासी पंडितों का भी मानना है कि नतीजे से सिर्फ हार-जीत का ही फैसला नहीं होगा, बल्कि भाजपा की रणनीतिक कौशल और तैयारियों की भी परख होगी। इसकी वजह भी है। क्योंकि सबसे ज्यादा प्रयोग भाजपा ने ही किए।
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महीनों की तैयारी। हवा के रुख को अपनी ओर मोड़ने की हर संभव कोशिशें। मुद्दों को घिस-घिसकर धार देने, तीर बनाने और आजमाने के एक से बढ़कर एक प्रयोग। सियासी प्रयोगशालाओं ने बिना रुके, बिना थके खूब काम किया। अब हर दल को चुनावी मंथन से निकलने वाले अमृत का इंतजार है। ...तो सियासी पंडितों समेत पूरे देश को इस मंथन से निकलने वाले संदेश का इंतजार है। कुल मिलाकर कहें तो नतीजे न केवल सत्ता का स्वरूप तय करेंगे, यह भी तय करेंगे कि किस दल की तैयारी में कितना दम रहा। किसकी प्रयोगशाला के नतीजे बेहतर रहे। बेहतर रहे तो क्यों? इस लिहाज से सबसे बड़ी परीक्षा भाजपा की ही होनी है।
नतीजों की कसौटी पर सबसे अधिक भाजपा की चुनावी तैयारियों को कसा जाएगा। सियासी पंडितों का भी मानना है कि नतीजे से सिर्फ हार-जीत का ही फैसला नहीं होगा, बल्कि भाजपा की रणनीतिक कौशल और तैयारियों की भी परख होगी। इसकी वजह भी है। क्योंकि सबसे ज्यादा प्रयोग भाजपा ने ही किए। प्रदेश में 80 सीटों को जीतने के लक्ष्य के साथ चुनावी तैयारियों में जुटी भाजपा ने बूथ से लेकर राज्य स्तर तक कई कार्यक्रम चलाए। बूथ प्रबंधन, पन्ना प्रमुख, युवा, महिला, किसान, अधिवक्ता और प्रबुद्धों के सम्मेलन तो किए ही, संवाद भी खूब किए।
बता दें कि अन्य दलों की तुलना में चुनाव की तैयारियों के लिहाज से भाजपा सबसे आगे दिख रही थी। भगवा ब्रिगेड ने एक साल पहले से ही सभी लोकसभा सीटों पर जनता से संपर्क करने के लिए 45 से अधिक तरह के संपर्क, सम्मेलन, संवाद और बैठकों के कार्यक्रम शुरू कर दिए थे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से हर वर्ग के युवा, महिला और पुरुष मतदाताओं को साधने की कोशिश की गई।
संपर्क अभियानों के अलावा भाजपा ने सांसदों के टिकट काटने से लेकर 2019 में हारी हुई सीटों, कम मार्जिन से जीती सीटों के लिए अलग रणनीति तैयार की। कई सीटों पर जातीय समीकरणों को मजबूत करने के लिए दूसरे दलों के मौजूदा सांसदों को तोड़कर भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतारा। ऐसे में अब चुनाव के नतीजे के आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे के साथ ही भाजपा की साख की भी परीक्षा होनी है।
सांसदों के टिकट काटकर जीत की रणनीति
इस चुनाव में भाजपा के रणनीतिकारों ने हार की हर आशंका को चिह्नित किया। जरूरत पड़ी तो कई मौजूदा सांसदों का टिकट काटने में भी संकोच नहीं किया। कई वरिष्ठ सांसदों समेत कुल 17 सांसदों का टिकट काटकर भाजपा ने उनकी सीटों पर जीत पक्की करने के लिए रणनीति बनाई। इसलिए इन सांसदों की सीट पर हार-जीत के नतीजे के आधार पर भाजपा की उस रणनीति की भी परीक्षा होगी।
यादव वोट बैंक साधने पर रहा फोकस
इस बार के चुनाव में भाजपा ने अपने कोटे की 75 सीटों पर भले ही सिर्फ आजमगढ़ में यादव चेहरा उतारा हो, लेकिन सपा के काडर वोटबैंक माने जाने वाले यादव समाज को अपने पाले में लाने की पूरी कोशिश की। इसके लिए भाजपा ने न केवल इस बिरादरी के मोहन यादव को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाया, बल्कि शपथ लेने के साथ ही मोहन यादव को यूपी के मैदान पर भी उतारकर यादव बिरादरी को साधने की रणनीति पर काम किया। वहीं, मुलायम सिंह के करीबी पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह यादव समेत सपा के कई नेताओं को भी भाजपा में शामिल कराया गया। इस रणनीति का कितना असर रहा, इसकी परख भी चुनाव परिणामों से होगी।
लोकसभा क्लस्टर की भी होगी परख
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इस बार प्रदेश में चार लोकसभा क्षेत्रों को मिलाकर क्लस्टर बनाए। प्रदेश में कुल 20 क्लस्टर बनाए गए। इनके जरिये हर मतदाता तक पहुंचने की रणनीति पर काम किया गया।
क्लस्टर के जरिये घर-घर मतदाता पर्ची पहुंचाना, मोदी पत्र का वितरण, परिवार पर्ची का वितरण, पन्ना प्रमुखों की निगरानी जैसे संगठन के 20 प्रमुख कामों पर फोकस किया गया।
स्मार्ट फोन रखने वाले सभी मतदाताओं की बूथवार सूची तैयार की गई। सूची में शामिल मतदाताओं को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के लिए दो लाख व्हाट्सएप ग्रुप तैयार किए गए।
छह महीने पहले से ही लाभार्थी वर्ग को साधने की शुरू कर दी थीं कोशिशें
केंद्र और प्रदेश की जन कल्याणकारी योजनाओं के सभी लाभार्थियों को एक वर्ग मानते हुए हर लाभार्थी तक पहुंचने की भी खूब कोशिशें हुईं। चुनाव शुरू होने के छह महीने से पहले से ही उनसे संपर्क करने के लिए बूथवार संपर्क अभियान चलाया गया।
- मतदाताओं के नाम मोदी का पत्र भेजना।
- टिफिन बैठक के जरिये संपर्क, 50 हजार से अधिक बैठकें हुईं।
- महासंपर्क अभियान, विशेष संपर्क अभियान और की-वोटर संपर्क अभियान चलाया गया।
- विधानसभावार जातीय व सामाजिक सम्मेलन।
- संगठन के किसान, युवा, महिला, ओबीसी और एससी वर्ग के सम्मेलन।
- विकसित भारत संकल्प यात्रा और विकसित ग्राम चौपाल कार्यक्रम।
- मंत्री, सांसद व विधायकों द्वारा गांवों में रात्रि विश्राम कर जनता से फीडबैक लेना।
- गांव चलो अभियान के तहत ग्राम चौपाल लगाकर विकास कार्यों की जानकारी देना।
- मंडल समिति और शक्ति केंद्रों के जरिये बूथवार मतदाताओं से संपर्क अभियान।
- चुनाव से तीन पहले ही पुनर्गठन कर बूथों को सशक्त बनाना।