लखनऊ। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में जलवायु परिवर्तन व प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे को लेकर चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन सोमवार को जलवायु परिवर्तन से निपटने में पादप विज्ञान की भूमिका पर चर्चा की। एनबीआरआई के निदेशक डॉ. अजित के. शासनी ने पौधों की आंतरिक प्रतिरक्षा को जलवायु परिवर्तन से उपजे तनावों के समाधान में उपयोगी ठहराते हुए इनके गहन शोध की जरूरत बताई ।
प्लेनरी सत्र में डॉ. जेसन सी. व्हाइट ने अमेरिका से ऑनलाइन जुड़कर नैनोबायोटेक्नोलॉजी आधारित फसल तनाव-सहनशीलता पर व्याख्यान दिया। तकनीकी सत्रों में जैव-विविधता, पुराविज्ञान, पर्यावरणीय सूक्ष्मजीव विज्ञान, प्रकृति-आधारित तकनीकों और माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण जैसे उभरते खतरों पर विशेषज्ञों ने बहु-विषयक दृष्टिकोण पेश किया। स्वीडन की एसएलयू के प्रो. ऋषिकेश भालेराव ने पादप-परितंत्र की अनुकूलन क्षमता पर अपने विचार साझा किए। इससे पहले दिन की शुरुआत पोस्टर सत्र से हुई, जिसमें जैव विविधता संरक्षण, जैव-अर्थव्यवस्था, एथ्नोबॉटनी, पोषण सुरक्षा और बदलती जलवायु में पुष्पकृषि पर शोध प्रस्तुत किए गए।

राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन सोमवार को जलवा

राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन सोमवार को जलवा

राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन सोमवार को जलवा

राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन सोमवार को जलवा