फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Report for meerut Mandal for Uttar Pradesh election 2022.

मेरठ मंडल की रिपोर्ट: सपा-रालोद का गठबंधन भाजपा के लिए खड़ी कर सकता है चुनौतियां, जानें क्या है जमीनी हकीकत

Sat, 04 Dec 2021 05:07 PM IST
ishwar ashish अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ
अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 04 Dec 2021 05:07 PM IST
सार

मेरठ मंडल में सपा-रालोद का गठबंधन भाजपा का खेल बिगाड़ सकता है। हालांकि, इस क्षेत्र में भाजपा के पास गिनाने के लिए कई काम हैं पर किसान आंदोलन एक बड़ी चुनौती है जिससे पार्टी जूझ रही है। यहां पढ़ें मेरठ मंडल की ग्राउंड रिपोर्ट:

विज्ञापन
Report for meerut Mandal for Uttar Pradesh election 2022.
जयंत चौधरी व अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala

विस्तार

बात जून 2019 की है। मेरठ के मोहल्ला प्रह्लादनगर में एक वर्ग के लोगों ने अपने मकान के बाहर लिख दिया-यह मकान बिकाऊ है। सौ परिवारों ने पलायन की बात कही तो हंगामा खड़ा हो गया। आरोप लगाया कि दूसरे वर्ग के युवक छेड़छाड़ करते हैं और उनका जीना मुहाल कर रखा है। ऐसे भावनात्मक मुद्दे देश भर में गूंजे। मेरठ में विकास की यूं तो खूब बयार बही पर चुनावी अखाड़े में इस तरह के मुद्दे यहां बड़े दांव का काम करते हैं। इस बार भी मेरठ के चुनावी रण में सियासी दलों की उम्मीदों का बड़ा पहाड़ खड़ा है। पिछले चुनाव में भाजपा ने पूरे मंडल में सभी दलों को तगड़ी पटखनी दी थी। भाजपा के पास गिनाने के लिए कई काम भी हैं।  पर, इस सबके बाद भी चुनावी पिच इस बार उतनी सपाट नहीं है। सपा-रालोद का गठबंधन भाजपा के लिए चुनौतियां खड़ी कर सकता है। महंगाई, किसानों की नाराजगी, उद्यमियों की समस्या, गन्ना मूल्य के मुद्दे भी भाजपा का इम्तिहान लेंगे।

विज्ञापन


भाजपा के पास गिनाने के लिए कई काम
आगे बढ़ने से पहले बात 2017 के चुनावों की। उलटफेर के लिए विख्यात रहे मेरठ मंडल में भाजपा का धोबियापछाड़ रंग लाया। ऐसी आंधी चली कि मंडल की 28 सीटों में से 25 पर उसने विजय पताका फहरा दी। सपा, बसपा और रालोद के हिस्से में महज एक-एक सीटें आईं। कांग्रेस पूरे मंडल में खाता तक नहीं खोल सकी। बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में तो किसी दूसरे दल की दाल ही नहीं गलने पाई। पिछले करीब पांच बरसों में यहां विकास की बयार तो चली ही, मुद्दों की फसलें भी खूब लहलहाई। मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेसवे की मांग पूरी हुई। मेरठ-बुलंदशहर हाईवे पर भी वाहन फर्राटा भरने लगे।
विज्ञापन


दिल्ली से मेरठ के बीच रैपिड ट्रेन और मेरठ शहर में मेट्रो ट्रेन पर भी काम शुरू हो गया। मेरठ-गढ़मुक्तेश्वर मार्ग चौड़ीकरण के लिए भी भूमि पूजन किया गया है। संवेदनशील मेरठ में दंगों का जिक्र भाजपा करती रही है। उधर, दिल्ली-सहारनपुर वाया बागपत मार्ग बना तो मिलों की क्षमता बढ़ाने पर भी काम हुआ। बुलंदशहर में मेडिकल कॉलेज बनेगा। वहीं, अनूपशहर बुलंदशहर मार्ग, गंगा नदी और काली नदी पर पुल जैसे प्रोजेक्टों पर काम शुरू हुआ। हालांकि, शहरों की ही बात करें तो मेरठ, बुलंदशहर आदि में रिंग रोड बनाने की मांग बरसों पुरानी है, जो पूरी नहीं हो पाई।

विज्ञापन
विज्ञापन

जेवर एयरपोर्ट बड़ा काम, मेरठ में आस अधूरी

जेवर एयरपोर्ट सरकार का बड़ा काम है। हालांकि मेरठ में हवाई अड्डे की आस पूरी नहीं हुई। बदली नीतियों का परिणाम रहा है कि गौतमबुद्धनगर में इन्वेस्टर आए। डाटा पार्क, टॉय पार्क डवलप हो रहे हैं जिनमें सौ से ज्यादा कंपनियां हाथ आजमा रही हैं। एमएसएमई पार्क, लॉजिस्टिक, वेयर हाउस, कार्गो आदि पर काम हुए। मेडिकल डिवाइस पार्क विकसित हुआ। दादरी, नोएडा, गाजियाबाद निवेश क्षेत्र होने से गाजियाबाद भी विकास की राह पर है।

...पर इन मुद्दों की धार भी कम नहीं
गाजियाबाद और नोएडा में निजी बिल्डरों के बनाए दो लाख से ज्यादा आवास खाली पड़े हैं, पर आवंटियों को कब्जे नहीं मिल पाए हैं। सरकार ने दावे तो किए थे, पर सब हवा हो गए। बिजली दरें कम करने, इकनॉमिक कॉरिडोर के मुआवजे के मुद्दे अहम हैं।  चीनी, हथकरघा, खेल का सामान, कृषि उपकरण, विद्युत उपकरण, कालीन आदि धंधों में भी उद्यमियों की तमाम मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। इस समय रालोद से जुड़े पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा कहते हैं, फूलों से लेकर गन्ने तक की खेती करने वाले किसान बर्बाद ही हुए हैं।

बुलंदशहर के कोल्हू संचालक हरबीर सवाल उठाते हैं, जब रोजगार की ही गति धीमी पड़ी है, तो विकास क्या हुआ? हालांकि, गाजियाबाद के अरविंद शर्मा कहते हैं कि कानून-व्यवस्था से लेकर विकास तक पर सरकार ने बेहतर काम किया है। इंजीनियरिंग के छात्र प्रियांशु शर्मा कहते हैं, छात्र बेरोजगार घूम रहे हैं। महंगाई बड़ा मुद्दा है। काम मिले और महंगाई बढ़ जाए तो चलता है, पर काम मिले नहीं और महंगाई बढ़ जाए, यह तो आफत है। इसका चुनाव में भाजपा पर असर पड़ेगा।

विधि छात्रा शिवांगी सिंह कहती हैं कि महिला सुरक्षा बड़ा मुद्दा है और इस सरकार में न केवल महिला, बल्कि हर वर्ग को सुरक्षा मिली है। अपराधियों पर कड़ा चाबुक चला है। सड़कों पर अब शोहदे नहीं दिखते। मेडिकल की छात्रा शालिनी कहती हैं कि सरकार ने अपनी साफ-सुधरी छवि को बरकरार रखा। सीएम योगी ओर पीएम मोदी की छवि का लाभ भाजपा को इस चुनाव में भी मिलेगा।

किसान आंदोलन का असर

तीन कृषि कानूनोें की वापसी के लिए आंदोलन में मेरठ की अहम भूमिका रही है। सपा के साथ रालोद का गठबंधन और उस पर भाकियू के खुले समर्थन से भाजपा की राह आसान नहीं रहने वाली। हालांकि अब कानून वापस हो गए हैं, पर किसान मानने को तैयार नहीं। इस आंदोलन का असर पंचायत चुनावों में भी देखने को मिला था और सपा-रालोद को काफी फायदा हुआ था। छात्र सौरभ चौधरी कहते हैं कि सरकार किसानों के मुद्दों पर पूरी तरह से विफल साबित हुई है। किसानों को फसलों का दाम नहीं मिल रहे हैं। गन्ना भुगतान समय से नहीं हो रहा है। गरीब और नौकरीपेशा भी परेशान हैं। कृषि कानूनों पर किसानों को कितना संघर्ष करना पड़ा सबने देखा। इसका खामियाजा भाजपा को चुनाव में भुगतना पड़ेगा।

जयंत के लिए वजूद की लड़ाई
रालोद इस बार अपने नए मुखिया चौधरी जयंत सिंह के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहा है। जयंत के लिए भी यह वजूद की लड़ाई है। पिछले चुनाव की बात करें तो केवल छपरौली में ही रालोद का खाता खुल पाया था। बाकी बागपत की दोनों सीटाें पर भी हार का सामना करना पड़ा था। बहरहाल इस बार उसका सपा से गठबंधन है।

जातियों का समीकरण
मेरठ मंडल में जहां जाट, गुर्जर, ब्राह्मण, वैश्य, ठाकुर आदि की अहम भूमिका रहती है, तो वहीं अधिकतर सीटों पर मुस्लिम बड़ी संख्या में हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति के वोटर किसी भी सीट का परिणाम बदलने का माद्दा रखते हैं। यादव भी कई सीटों पर निर्णायक हैं। सबसे अहम अति पिछड़े हैं जो भाजपा की बड़ी ताकत हैं। इस वर्ग में अभी तक कोई आसानी से सेंध नहीं लगा पाया है।  सपा मुस्लिमों के साथ-साथ इस बार जाटों और यादवों के सहारे चुनावी रण में ताल ठोंक रही है तो भाजपाइयों का मानना है कि जाटों का वोट उसके पास भी कम नहीं।  उधर, बसपा इस चुनाव में अपने काडर वोटर के साथ अन्य जातियों को जोड़ने की कोशिश में है। कांग्रेस ब्राह्मणों और अन्य रूठों को मनाकर अपने साथ जोड़ने की मुहिम में है।


मायावती के फाॅर्मूले पर सबकी नजर
चार बार मुख्यमंत्री रहीं बसपा सुप्रीमो मायावती का गृह मंडल मेरठ ही है। पूरे मंडल में उनका बड़ा वोट बैंक है जो किसी भी चुनाव का परिणाम बदलने में सक्षम है। अपने काडर वोटर के साथ मायावती ब्राह्मणों को जोड़ने के लिए मशक्कत कर रही हैं। जाट, मुस्लिम समीकरण भी उन्होंने खेला है, पर इसका क्या परिणाम होगा यह देखने वाली बात होगी। उधर, आजाद समाज पार्टी संस्थापक चंद्रशेखर मंडल में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह भी बसपा के काडर वोट में सेंध लगाने के लिए मशक्कत कर रहे हैं।

सीटों का गणित: मेरठ (7 सीटें)

सिवालखास: भाजपा से जितेंद्र सतवाई विधायक हैं। पहली बार चुनाव लड़े और जीते।
जातिगत समीकरण :  मुस्लिम करीब 95 हजार, जाट 70 हजार, जाटव 40 हजार, ब्राह्मण 21 हजार, गुर्जर 17 हजार, क्षत्रिय 14 हजार, प्रजापति 12 हजार, त्यागी 10 हजार, वाल्मीकि व कश्यप 9-9 हजार, गोस्वामी 8 हजार, कोरी-सैनी 6.5-6.5 हजार व अन्य।

सरधना: भाजपा से फायरब्रांड नेता संगीत सोम विधायक हैं। दूसरी बार विधायक बने हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 70 हजार, जाटव 52 हजार, गुर्जर 44 हजार, क्षत्रिय 43 हजार, जाट 40 हजार, सैनी 30 हजार, प्रजापति 15 हजार, गोस्वामी 9 हजार, कश्यप 8 हजार, वाल्मीकि व पाल 7-7 हजार, वैश्य-जैन 6 हजार, ब्राह्मण 4 हजार व अन्य।

हस्तिनापुर: भाजपा से दिनेश खटीक विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : जाटव करीब 71 हजार, मुस्लिम 65 हजार, गुर्जर 51हजार, जाट 27 हजार, वाल्मीकि 13 हजार, ब्राह्मण 12 हजार, वैश्य-जैन 11 हजार, क्षत्रिय व कश्यप 8-8 हजार, त्यागी 7 हजार, पंजाबी 5 हजार व अन्य।

मेरठ शहर: समाजवादी पार्टी के रफीक अंसारी विधायक हैं।
 जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.40 लाख, वैश्य-जैन  50 हजार, जाटव 41 हजार, ब्राह्मण 35 हजार, गुर्जर 20 हजार, पंजाबी 10 हजार, वाल्मीकि 7 हजार, सैनी व प्रजापति 5-5 हजार एवं अन्य।

मेरठ दक्षिण: भाजपा से सोमेंद्र तोमर विधायक हैं। पहली बार विधायक बने।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.45 लाख, जाटव 75 हजार, वैश्य-जैन 45 हजार, ब्राह्मण 41 हजार, गुर्जर 40 हजार, जाट 23 हजार, प्रजापति17 हजार, वाल्मीकि 14 हजार, सैनी 13 हजार, गोस्वामी 12 हजार एवं अन्य।

किठौर : भाजपा से सत्यवीर त्यागी विधायक हैं। पहली बार विधायक बने हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1 लाख, जाटव 65 हजार, गुर्जर 30 हजार, क्षत्रिय 22 हजार, जाट व ब्राह्मण 19-19 हजार, प्रजापति 17 हजार, त्यागी 16 हजार, वाल्मीकि 11 हजार, वैश्य-जैन 8 हजार एवं अन्य।

मेरठ कैंट : भाजपा के सत्यप्रकाश अग्रवाल विधायक हैं। लगातार चौथी बार भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते।
जातिगत समीकरण : वैश्य-जैन करीब 50 हजार, ब्राह्मण 35 हजार, गुर्जर 20 हजार, सैनी 17 हजार, जाटव 13 हजार एवं अन्य।

बागपत व बुलंदशहर की सीटों का गणित

बागपत (3 सीटें)
बागपत: भाजपा के योगेश धामा विधायक हैं। रालोद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए और चुनाव जीत गए।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 73 हजार, जाट 45 हजार, अनुसूचित जातियां 29 हजार, यादव 24 हजार, गुर्जर 22 हजार, ब्राह्मण 20 हजार, त्यागी 13 हजार और ठाकुर 9 हजार।

छपरौली सीट: रालोद के टिकट पर सहेंद्र सिंह रमाला विधायक चुने गए पर बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए। यही एकमात्र सीट रालोद ने जीती थी।
जातिगत समीकरण : जाट करीब 1.30 लाख, मुस्लिम 60 हजार, कश्यप 25 हजार, अनुसूचित जातियां 20 हजार और गुर्जर 15 हजार।

बड़ौत: भाजपा के केपी सिंह विधायक हैं। रालोद छोड़कर भाजपा में आए और चुनाव जीत गए।
जातिगत समीकरण : जाट करीब 80 हजार, मुस्लिम 45 हजार, कश्यप 30 हजार, अनुसूचित जातियां 25 हजार, वैश्य 18 हजार, गुर्जर 18 हजार और क्षत्रिय 12 हजार।

बुलंदशहर (7 सीटें)
स्याना : भाजपा के देवेंद्र सिंह लोधी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ओबीसी 1.33 लाख, सामान्य 72 हजार, एससी-एसटी 56 हजार, मुस्लिम 52 हजार।

सिकंदराबाद : भाजपा से विमला सौलंकी दूसरी बार विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 90 हजार, क्षत्रिय 70 हजार, एससी 70 हजार,  ब्राह्मण 30 हजार, गुर्जर 20 हजार, यादव 40 हजार, जाट 30 हजार, वैश्य 20 हजार और ओबीसी 40 हजार।

अनूपशहर: भाजपा से संजय शर्मा विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां 70 हजार, मुस्लिम 62 हजार, लोध-राजपूत 60 हजार, जाट 50 हजार, ब्राह्मण 35 हजार, क्षत्रिय, सैनी व वैश्य 25-25 हजार।

शिकारपुर: भाजपा से अनिल शर्मा विधायक हैं। पहले बसपा में भी रहे।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 62 हजार, ब्राह्मण 58 हजार, मुस्लिम 50 हजार, जाट 49 हजार, क्षत्रिय 45 हजार और वैश्य व माली 11-11 हजार।

खुर्जा : भाजपा से विजेंद्र सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : क्षत्रिय 1.10 लाख, जाटव 58 हजार, मुस्लिम 50 हजार, जाट 30 हजार, ब्राह्मण 30 हजार, अन्य 90 हजार।

डिबाई : भाजपा की अनीता राजपूत विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : लोधी करीब 1.20 लाख,  मुस्लिम 40 हजार, ब्राह्मण 37 हजार, जाटव 30 हजार, वैश्य 15 हजार, क्षत्रिय व यादव 12-12 हजार, अन्य 67 हजार।

बुलंदशहर (सदर): स्व. वीरेंद्र सिंह सिरोही की धर्मपत्नी ऊषा देवी भाजपा से विधायक हैं। उप चुनाव में जीती थीं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब1.15 लाख, ओबीसी 80 हजार, सामान्य 80 हजार, एससी-एसटी 60 हजार, अन्य 53508।

गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ की सीटों का गणित

गाजियाबाद (5 सीटें)
साहिबाबाद: भाजपा से सुनील शर्मा विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.59 लाख, अनुसूचित जातियां 1.15 लाख, ब्राह्मण करीब 1.05 लाख, त्यागी 65 हजार, यादव 43 हजार, क्षत्रिय 35 हजार, वैश्य 47 हजार, जाट 32 हजार, गुर्जर 27 हजार, कायस्थ 16 हजार और ईसाई 14 हजार।

गाजियाबाद शहर: भाजपा के अतुल गर्ग विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 1.20 लाख, मुस्लिम 75 हजार, यादव 70 हजार, ब्राह्मण 50 हजार, वैश्य 45 हजार और गुर्जर 15 हजार।

मोदीनगर: भाजपा की डॉ. मंजू सिवाच विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : जाट व मुस्लिम करीब 55-55 हजार, अनुसूचित जातियां 50 हजार, वैश्य 35 हजार,त्यागी 25 हजार,  ब्राह्मण 20 हजार, गुर्जर 18 हजार और क्षत्रिय 15 हजार।

लोनी शहर सीट: भाजपा के नंद किशोर गुर्जर विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.40 लाख, गुर्जर व अनुसूचित जातियां 80-80 हजार, ब्राह्मण 65 हजार, जाट 20 हजार, वैश्य व त्यागी 15-15 हजार, क्षत्रिय 10 हजार।

मुरादनगर: पूर्व कैबिनेट मंत्री राजपाल त्यागी के पुत्र अजीत पाल त्यागी भाजपा से विधायक हैं।
जातिगत समीकरण: ओबीसी करीब 85 हजार, जाट 76 हजार, अनुसूचित जातियां 60 हजार, ब्राह्मण 55 हजार, मुस्लिम 55 हजार, वैश्य 35 हजार, यादव 25 हजार, गुर्जर 19 हजार और वाल्मीकि 15 हजार।

गौतमबुद्धनगर (3 सीटें)
नोएडा सीट: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह भाजपा से विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 1.30 लाख, वैश्य 1.10 लाख, मुस्लिम 70 हजार, यादव 40 हजार, गुर्जर 35 हजार, क्षत्रिय 25 हजार।

दादरी : भाजपा से तेजपाल सिंह नागर विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : गुर्जर करीब 1.75 लाख, मुस्लिम 90 हजार,ब्राह्मण 70 हजार, क्षत्रिय 45 हजार, अनुसूचित जातियां 40 हजार, जाट व वाल्मीकि 30-30 हजार, यादव व पाल 25-25 हजार, प्रजापति एवं नाई 12-12 हजार।

जेवर: भाजपा के धीरेंद्र सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 80 हजार, क्षत्रिय 75 हजार, गुर्जर 72 हजार, ब्राह्मण 35 हजार, मुस्लिम 30 हजार और वैश्य 10 हजार।

हापुड़--(3 सीटें)
हापुड़ (सुरक्षित): भाजपा के विजयपाल आढ़ती विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1.10 लाख, अनुसूचित जातियां 64 हजार, जाट 45 हजार, वैश्य 25 हजार, ब्राह्मण 21 हजार, क्षत्रिय व त्यागी करीब 20-20 हजार, कुम्हार 17 हजार और वाल्मीकि12 हजार।

गढ़मुक्तेश्वर : डॉ. कमल सिंह भाजपा विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 1 लाख, जाटव 40 हजार, जाट 38 हजार, गुर्जर 35 हजार, क्षत्रिय व चौहान 30 हजार, ब्राह्मण व त्यागी 25-25 हजार, लोधी राजपूत व वाल्मीकि 10-10 हजार,  

धौलाना: बसपा के टिकट पर असलम चौधरी विधायक चुने गए।
जातिगत समीकरण :  मुस्लिम करीब 1.80 लाख, क्षत्रिय 70 हजार, जाटव 45 हजार, ब्राह्मण व जाट 20-20 हजार, वैश्य 17 हजार और वाल्मीकि 10 हजार।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed