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यूपी : वीडीओ और समाज कल्याण पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा निरस्त, 2118 पदों के लिए प्रस्तावित भर्तियां भी स्थगित
Thu, 25 Mar 2021 09:08 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 25 Mar 2021 09:08 AM IST
सार
- 1952 पदों के लिए 2018 में हुई थी परीक्षा
- एसआईटी जांच में गड़बड़ी की पुष्टि पर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने जारी किया आदेश
- वन रक्षक, सहायक बोरिंग टेक्नीशियन समेत कई पदों पर भर्ती भी टली
- इनमें वन रक्षक, सहायक सांख्यिकीय अधिकारी व सहायक बोरिंग टेकभनीशियन की परीक्षा शामिल
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एसआईटी जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने ग्राम विकास अधिकारी और समाज कल्याण पर्यवेक्षक के 1952 पदों के लिए वर्ष 2018 में कराई गई भर्ती परीक्षा निरस्त कर दी है। यही नहीं, सहायक बोरिंग टेक्नीशियन, शोध अधिकारी, सहायक सांख्यिकीय अधिकारी, वन रक्षक एवं वन्य जीव रक्षक के पदों पर भर्ती की प्रस्तावित परीक्षा भी टाल दी गई है। इस संबंध में परीक्षा नियंत्रक दिनेश ने बुधवार को आदेश जारी कर दिया।
गौरतलब है कि दोनों संवर्ग के लिए वर्ष 2018 में 22 व 23 दिसंबर को परीक्षा कराई गई थी। परिणाम 28 अगस्त 2019 को घोषित किया गया था। योगी सरकार में यह पहली बड़ी भर्ती परीक्षा थी। इसमें करीब 9 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। सूत्रों के अनुसार यह वही भर्ती परीक्षा है, जिसके पहले अधीनस्थ के तत्कालीन अध्यक्ष सीबी पालीवाल ने इस्तीफा दे दिया था।
ओएमआर शीट के मिलान से सामने आई थी गड़बड़ी
इस परीक्षा के लिए तीन ओएमआर शीट तैयार कराई गई थी। एक आयोग, दूसरी कोषागार व तीसरी अभ्यर्थी के पास रहनी थी। मूल्यांकन कराया गया तो तमाम अभ्यर्थियों की आयोग व कोषागार की ओएमआर शीट के अंकों में अंतर था। इस पर मेरिट में आए 136 अभ्यर्थियों को बाहर करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई थी। इसमें और गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए मामले की जांच एसटीएफ को सौंप दी गई। प्रथम दृष्टया गड़बड़ियों की पुष्टि होने के बाद आयोग ने इसे निरस्त करने का फैसला किया है।
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गौरतलब है कि दोनों संवर्ग के लिए वर्ष 2018 में 22 व 23 दिसंबर को परीक्षा कराई गई थी। परिणाम 28 अगस्त 2019 को घोषित किया गया था। योगी सरकार में यह पहली बड़ी भर्ती परीक्षा थी। इसमें करीब 9 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। सूत्रों के अनुसार यह वही भर्ती परीक्षा है, जिसके पहले अधीनस्थ के तत्कालीन अध्यक्ष सीबी पालीवाल ने इस्तीफा दे दिया था।
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ओएमआर शीट के मिलान से सामने आई थी गड़बड़ी
इस परीक्षा के लिए तीन ओएमआर शीट तैयार कराई गई थी। एक आयोग, दूसरी कोषागार व तीसरी अभ्यर्थी के पास रहनी थी। मूल्यांकन कराया गया तो तमाम अभ्यर्थियों की आयोग व कोषागार की ओएमआर शीट के अंकों में अंतर था। इस पर मेरिट में आए 136 अभ्यर्थियों को बाहर करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई थी। इसमें और गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए मामले की जांच एसटीएफ को सौंप दी गई। प्रथम दृष्टया गड़बड़ियों की पुष्टि होने के बाद आयोग ने इसे निरस्त करने का फैसला किया है।
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2118 पदों के लिए प्रस्तावित भर्तियां भी स्थगित
ग्राम विकास अधिकारियों और समाज कल्याण पर्यवेक्षक के लिए हुई परीक्षा के साथ ही तीन अन्य पदों के लिए प्रस्तावित परीक्षा को भी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने अगले आदेश तक स्थगित करने का आदेश जारी किया है। इनमें वन रक्षक एव वन्य जीव रक्षक (728 पद), सहायक सांख्यिकीय अधिकारी एवं सहायक शोध अधिकारी (904) और सहायक बोरिंग टेक्नीशियन (486 पद) की परीक्षा शामिल है।
वन रक्षक एवं वन्य जीव रक्षक के लिए 4 अप्रैल और सहायक बोरिंग टेक्नीशियन भर्ती के लिए 25 अप्रैल से परीक्षा होनी थी। वहीं, सहायक सांख्यिकीय अधिकारी एवं सहायक शोध अधिकारी पद पर भर्ती के लिए 8 मई को परीक्षा होनी थी। आयोग के परीक्षा नियंत्रक ने तीनों परीक्षाओं को स्थगित करने का भी आदेश जारी कर दिया है।
वीडीओ परीक्षा कराने वाली एजेंसी को ही दी गई थी जिम्मेदारी, इसलिए परीक्षा स्थगित
भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि दरअसल समाज कल्याण पर्यवेक्षक और ग्राम विकास अधिकारी के पदों पर भर्ती के लिए जिस एजेंसी को परीक्षा कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसी एजेंसी से अन्य तीन पदों पर भर्ती के लिए भी परीक्षा कराने की तैयारी थी। 2018 की भर्ती में इस एजेंसी पर सवाल उठने के बाद आयोग अब इसे परीक्षा का जिम्मा देने से बच रहा है। यही वजह है कि परीक्षा स्थगित करने का फैसला किया गया। अब दूसरी एजेंसी से परीक्षा कराई जाएगी।
वन रक्षक एवं वन्य जीव रक्षक के लिए 4 अप्रैल और सहायक बोरिंग टेक्नीशियन भर्ती के लिए 25 अप्रैल से परीक्षा होनी थी। वहीं, सहायक सांख्यिकीय अधिकारी एवं सहायक शोध अधिकारी पद पर भर्ती के लिए 8 मई को परीक्षा होनी थी। आयोग के परीक्षा नियंत्रक ने तीनों परीक्षाओं को स्थगित करने का भी आदेश जारी कर दिया है।
वीडीओ परीक्षा कराने वाली एजेंसी को ही दी गई थी जिम्मेदारी, इसलिए परीक्षा स्थगित
भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि दरअसल समाज कल्याण पर्यवेक्षक और ग्राम विकास अधिकारी के पदों पर भर्ती के लिए जिस एजेंसी को परीक्षा कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसी एजेंसी से अन्य तीन पदों पर भर्ती के लिए भी परीक्षा कराने की तैयारी थी। 2018 की भर्ती में इस एजेंसी पर सवाल उठने के बाद आयोग अब इसे परीक्षा का जिम्मा देने से बच रहा है। यही वजह है कि परीक्षा स्थगित करने का फैसला किया गया। अब दूसरी एजेंसी से परीक्षा कराई जाएगी।
- 1952 पदों के लिए 2018 में हुई थी परीक्षा
- एसआईटी जांच में गड़बड़ी की पुष्टि पर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने जारी किया आदेश
- वन रक्षक, सहायक बोरिंग टेक्नीशियन समेत कई पदों पर भर्ती भी टली
- इनमें वन रक्षक, सहायक सांख्यिकीय अधिकारी व सहायक बोरिंग टेकभनीशियन की परीक्षा शामिल