यूपी: समूह 'ग' की भर्ती को मिली हरी झंडी
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प्रदेश सरकार ने समूह ‘ग’ के रिक्त पदों पर भर्ती की ओर अहम कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग विधेयक-2014 को मंजूरी दे दी है।
इसे विधानमंडल के चालू सत्र में ही पेश किए जाने की संभावना है। आयोग में एक अध्यक्ष व अधिकतम आठ सदस्य होंगे। आयोग के पास बाबुओं से लेकर इंस्पेक्टरों तक की भर्ती का अधिकार होगा।
बुधवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में विधेयक के प्रारूप पर फैसला हुआ।
प्रशासनिक अधिकारियों को तवज्जो
यह आयोग समूह ‘ख’ से निम्न स्तर के सभी पदों को भरने के लिए चयन संबंधी कार्यवाही करेगा। इसमें एक अध्यक्ष व अधिकतम आठ सदस्यों की संख्या तय करने के साथ इनका कार्यकाल भी तय कर दिया है।
आयोग में अध्यक्ष व सदस्यों का कार्यकाल अधिकतम पांच वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होगा। आयोग में प्रशासनिक सेवा में कार्यरत या कार्यरत रहे अधिकारियों को तवज्जो मिलेगी।
विधेयक के प्रारूप में प्रावधान किया गया है कि जहां तक हो सके आयोग के आधे सदस्य अपनी नियुक्ति के दिन भारत सरकार अथवा राज्य सरकार में क्लास-1 अधिकारी के रूप में 10 वर्ष का अनुभव पूरा कर चुके हों। हालांकि यह प्रावधान सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं है।
ये रिक्त पद भी भरे जाएंगे
आयोग के दायरे में निगम व निकायों के रिक्त पद भी होंगे। राज्य सरकार की ओर से स्थापित या नियंत्रित बोर्ड, निगम या कानूनी निकाय के समस्त समूह ग के पदों की चयन की उसकी जिम्मेदारी होगी।
हालांकि कैबिनेट ने राज्य सरकार को अधिकार दिया है कि वह अधिसूचना के जरिये किसी पद को आयोग के कार्यक्षेत्र से हटाया या जोड़ा जा सकेगा।
2007 में भंग हुआ था आयोग
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को तत्कालीन मायावती सरकार ने वर्ष 2007 में भंग कर दिया था। प्रदेश में अखिलेश सरकार बनने के बाद से ही इसके गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई थी लेकिन इसमें दो साल से ज्यादा वक्त लग गया।
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को रखा गया लेकिन मंजूरी नहीं मिल पाई। बुधवार को कैबिनेट के विधेयक के प्रारूप की मंजूरी के साथ ही आयोग के चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया।
इसलिए होगा आयोग का गठन
ज्यादातर विभागों में समूह ‘ग’ के बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। इन पदों पर तेजी से भर्ती किए जाने की जरूरत है।
लोक सेवा आयोग तमाम प्रयासों के बावजूद आवश्यक संख्या में भर्ती नहीं कर पा रहा है।
चयन प्रक्रिया में तेजी लाने और जनता से जुड़े विभागों में खाली पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने के लिए आयोग गठित किया जा रहा है।