{"_id":"60d24a928ebc3e6c8267034a","slug":"recovery-rate-increased-in-black-fungus-case-lucknow-news-lko5836972144","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्लैक फंगस को लेकर जागरूकता बढ़ी तो बढ़ गए स्वस्थ होने वाले मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ब्लैक फंगस को लेकर जागरूकता बढ़ी तो बढ़ गए स्वस्थ होने वाले मरीज
विज्ञापन
लखनऊ। ब्लैक फंगस को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है। इससे समय पर इलाज शुरू हो जाने से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। गत एक सप्ताह में ब्लैक फंगस से हुई मौत के मुकाबले इसे मात देने वालों का आंकड़ा चार गुना है। चिकित्सकों के अनुसार अब पहले के मुकाबले केस भी काफी कम हो गए हैं। उम्मीद है कि जल्द ही इसके केस और भी कम हो जाएंगे।
लखनऊ में मई में जब कोरोना संक्रमण के केस थोड़े कम हुए थे उसी समय ब्लैक फंगस ने जोर पकड़ा और कई मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इसमें आंख और जबड़े गंवाने वाले मरीजों की संख्या भी काफी रही। अब कोरोना के साथ ही ब्लैक फंगस के मामलों में भी कमी आ रही है। सबसे अच्छी बात यह है कि ब्लैक फंगस होने के बावजूद मरीज अस्पताल से स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में लखनऊ में ब्लैक फंगस के 60 मरीज मिले। इनमें सात मरीजों की मौत भी हुई, लेकिन इस दौरान विभिन्न अस्पतालों से 29 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए। इससे मरीजों में फंगस को लेकर डर थोड़ा कम हुआ है और डॉक्टरों ने भी राहत की सांस ली है।
दवाओं का संकट खत्म होने से भी बढ़ी राहत
मई में जब ब्लैक फंगस के रोज 15 से 20 नए मरीज भर्ती हो रहे थे तो दवाओं का भी संकट था। मरीजों की संख्या के लिहाज से उस समय औसतन 700 इंजेक्शन की जरूरत पड़ रही थी, लेकिन उपलब्धता इससे आधी भी नहीं थी। इस स्थिति में अब सुधार आया है। इससे स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है।
विज्ञापन
कम इम्युनिटी वालों को खतरा
केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी हिमांशु के अनुसार ब्लैक फंगस वातावरण में हमारे आसपास ही मौजूद होता है। स्वस्थ व्यक्ति सांस के साथ इनको भीतर लेकर बाहर निकाल देता है। वहीं जिनकी प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर होती है उनके भीतर यह ठहर जाता है। नाक के माध्यम से यह चेहरे और जबड़े की हड्डियों के सहारे व्यक्ति के मस्तिष्क तक पहुंच जाता है। फेफड़े पर भी यह काफी असर करता है। इसका ज्यादा फैलाव होने पर मरीज की जान बचाना मुश्किल हो जाता है।
ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान
- चेहरे पर विशेषकर आंख के नीचे और नाक के बगल में दर्द के साथ हो सूजन
- आंखों में जलन, चेहरा सुन्न हो जाना, तेज सिरदर्द
- एक तरफ सूजा हुआ चेहरा दिखना
- डायबिटीज व कम इम्युनिटी वाले रोगियों में ज्यादा खतरा
- अंग प्रत्यारोपण कराने वाले मरीज भी हो सकते हैं शिकार
- कोरोना संक्रमण के दौरान ज्यादा स्टेरॉयड भी बना वजह
पिछले एक सप्ताह की स्थिति
तारीख नये केस मौत स्वस्थ
15 जून 15 2 9
16 जून 3 0 1
17 जून 9 2 9
18 जून 11 1 4
19 जून 4 1 4
20 जून 8 1 0
21 जून 10 0 2
विज्ञापन
लखनऊ में मई में जब कोरोना संक्रमण के केस थोड़े कम हुए थे उसी समय ब्लैक फंगस ने जोर पकड़ा और कई मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इसमें आंख और जबड़े गंवाने वाले मरीजों की संख्या भी काफी रही। अब कोरोना के साथ ही ब्लैक फंगस के मामलों में भी कमी आ रही है। सबसे अच्छी बात यह है कि ब्लैक फंगस होने के बावजूद मरीज अस्पताल से स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में लखनऊ में ब्लैक फंगस के 60 मरीज मिले। इनमें सात मरीजों की मौत भी हुई, लेकिन इस दौरान विभिन्न अस्पतालों से 29 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए। इससे मरीजों में फंगस को लेकर डर थोड़ा कम हुआ है और डॉक्टरों ने भी राहत की सांस ली है।
विज्ञापन
दवाओं का संकट खत्म होने से भी बढ़ी राहत
मई में जब ब्लैक फंगस के रोज 15 से 20 नए मरीज भर्ती हो रहे थे तो दवाओं का भी संकट था। मरीजों की संख्या के लिहाज से उस समय औसतन 700 इंजेक्शन की जरूरत पड़ रही थी, लेकिन उपलब्धता इससे आधी भी नहीं थी। इस स्थिति में अब सुधार आया है। इससे स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है।
विज्ञापन
कम इम्युनिटी वालों को खतरा
केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी हिमांशु के अनुसार ब्लैक फंगस वातावरण में हमारे आसपास ही मौजूद होता है। स्वस्थ व्यक्ति सांस के साथ इनको भीतर लेकर बाहर निकाल देता है। वहीं जिनकी प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर होती है उनके भीतर यह ठहर जाता है। नाक के माध्यम से यह चेहरे और जबड़े की हड्डियों के सहारे व्यक्ति के मस्तिष्क तक पहुंच जाता है। फेफड़े पर भी यह काफी असर करता है। इसका ज्यादा फैलाव होने पर मरीज की जान बचाना मुश्किल हो जाता है।
ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान
- चेहरे पर विशेषकर आंख के नीचे और नाक के बगल में दर्द के साथ हो सूजन
- आंखों में जलन, चेहरा सुन्न हो जाना, तेज सिरदर्द
- एक तरफ सूजा हुआ चेहरा दिखना
- डायबिटीज व कम इम्युनिटी वाले रोगियों में ज्यादा खतरा
- अंग प्रत्यारोपण कराने वाले मरीज भी हो सकते हैं शिकार
- कोरोना संक्रमण के दौरान ज्यादा स्टेरॉयड भी बना वजह
पिछले एक सप्ताह की स्थिति
तारीख नये केस मौत स्वस्थ
15 जून 15 2 9
16 जून 3 0 1
17 जून 9 2 9
18 जून 11 1 4
19 जून 4 1 4
20 जून 8 1 0
21 जून 10 0 2