35 हजार ओबीसी स्टूडेंट्स से 10.90 करोड़ की रिकवरी
पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशालय ने 35 हजार छात्रों के खातों में भेजी गई ज्यादा राशि की रिकवरी के आदेश दिए हैं। पिछले साल छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत उन्हें 10.90 करोड़ रुपये ज्यादा भुगतान कर दिया गया था। निदेशालय ने अपनी पूरी रिपोर्ट शासन को भी भेज दी है।
यह मामला हाल ही में पकड़ में आया है। वर्ष 2014-15 में इंटरमीडिएट, आईटीआई और पॉलीटेक्निक जैसे ग्रुप-4 के पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के खाते में ग्रुप-2 और ग्रुप-3 के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई की रकम भेज दी गई थी।
ग्रुप-2 में बीएड व एलएलबी और ग्रुप-3 में बीए और बीएससी आदि कोर्स हैं। ग्रुप-2 और ग्रुप-3 की फीस ग्रुप-4 के छात्रों से ज्यादा है। यह गलती किस स्तर से हुई, अभी तय नहीं हो सका है।
पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशालय का कहना है कि उनके यहां से सही फाइल गई थी, राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र (एनआईसी) से गलत कमांड देने पर यह दिक्कत आई।
सभी छात्रों से रिकवरी करने के हुए आदेश
वहीं, एनआईसी का कहना है कि पिछले साल मार्च में निदेशालय की टीम की देखरेख में ही राशि भेजी गई थी। इसलिए इसमें उनके स्तर से कोई गलती नहीं हुई।
बहरहाल जवाबदेही तो उच्चस्तरीय जांच के बाद ही तय हो सकती है। फिलहाल, पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशालय ने सभी छात्रों से रिकवरी के आदेश जारी कर दिए हैं। साथ ही अपने स्तर पर जांच कमेटी भी बना दी है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ छात्रों से रिकवरी कर भी ली गई है।
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ज्यादा राशि भेजने के जो मामले उनके विभाग में पकड़ में आए हैं, समाज कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में भी इस तरह की गड़बड़ की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। इसलिए शासन को इसकी उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए।