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तिरंगे की धूम, 10 करोड़ से ज्यादा के कारोबार की उम्मीद
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राजधानी तिरंगे के रंग में रंगने लगी है। बाजारों में भी इसकी धूम नजर आ रही है। आजादी का अमृत महोत्सव मनाने के लिए हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है। यही कारण है कि शनिवार को यहियागंज बाजार में राखी से ज्यादा तिरंगे से सजी दुकानें दिखीं। आलम यह है कि दुकानदार मांग के मुताबिक सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। इस बार 10 करोड़ से अधिक के कारोबार की उम्मीद है।
आजादी के अमृत महोत्सव के तहत शहर को तिरंगे से सजाया जा रहा है। यहियागंज में दुकान चला रहे बब्लू पाल ने बताया की उन्होंने हर साल की तरह ही सीमित संख्या में तिरंगे का ऑर्डर दिया था, लेकिन जुलाई के आखिरी हफ्ते में मांग इतनी बढ़ गई कि सप्लाई ही नहीं कर पा रहे। अगस्त शुरू होते ही सरकारी संस्था से लेकर निजी कंपनियों की तरफ से ऑर्डर आने लगे। अब तो फैक्टरी से तिरंगे ही नहीं मिल रहे हैं। अलग-अलग जगहों से किसी तरह जुगाड़ कर मंगवा रहे हैं। इस कारण कीमतों में भी इजाफा हो रहा है। बब्लू पाल ने बताया कि शुरुआती दिनों में 20 बाई 30 वाला तिरंगा 18 से 20 रुपये तक मिल रहा था, लेकिन आज की तारीख में उस तिरंगे की कीमत 30 रुपये तक पहुंच गई है। इसके बावजूद बिक्री में कोई कमी नहीं आई है।
तिरंगी टीशर्ट और कैंप की भी मांग
रकाबगंज में तिरंगे के सबसे बड़े कारोबारी रसित अग्रवाल ने बताया कि आम तौर पर डेढ़ से दो करोड़ के बीच कारोबार होता था। लेकिन इसबार 10 करोड़ से अधिक के कारोबार की उम्मीद है। पहली बार इसके कारोबारियों में खुशी का माहौल है। रसित बताते हैं कि तिरंगे झंडे के साथ ही टीशर्ट-कैप की भी खूब डिमांड है। तिरंगे से बनी पगड़ी व झूमर की भी मांग है। इनकी कीमत 150 से 350 रुपये तक है।
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आजादी के अमृत महोत्सव के तहत शहर को तिरंगे से सजाया जा रहा है। यहियागंज में दुकान चला रहे बब्लू पाल ने बताया की उन्होंने हर साल की तरह ही सीमित संख्या में तिरंगे का ऑर्डर दिया था, लेकिन जुलाई के आखिरी हफ्ते में मांग इतनी बढ़ गई कि सप्लाई ही नहीं कर पा रहे। अगस्त शुरू होते ही सरकारी संस्था से लेकर निजी कंपनियों की तरफ से ऑर्डर आने लगे। अब तो फैक्टरी से तिरंगे ही नहीं मिल रहे हैं। अलग-अलग जगहों से किसी तरह जुगाड़ कर मंगवा रहे हैं। इस कारण कीमतों में भी इजाफा हो रहा है। बब्लू पाल ने बताया कि शुरुआती दिनों में 20 बाई 30 वाला तिरंगा 18 से 20 रुपये तक मिल रहा था, लेकिन आज की तारीख में उस तिरंगे की कीमत 30 रुपये तक पहुंच गई है। इसके बावजूद बिक्री में कोई कमी नहीं आई है।
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तिरंगी टीशर्ट और कैंप की भी मांग
रकाबगंज में तिरंगे के सबसे बड़े कारोबारी रसित अग्रवाल ने बताया कि आम तौर पर डेढ़ से दो करोड़ के बीच कारोबार होता था। लेकिन इसबार 10 करोड़ से अधिक के कारोबार की उम्मीद है। पहली बार इसके कारोबारियों में खुशी का माहौल है। रसित बताते हैं कि तिरंगे झंडे के साथ ही टीशर्ट-कैप की भी खूब डिमांड है। तिरंगे से बनी पगड़ी व झूमर की भी मांग है। इनकी कीमत 150 से 350 रुपये तक है।
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