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बरेली कैंट : मतदाता खामोश, प्रत्याशी बेचैन, जातीय समीकरणों से ही बंधेगा जीत का सेहरा
Sat, 12 Feb 2022 04:57 AM IST
ishwar ashish
राहुल दुबे, अमर उजाला, बरेली
राहुल दुबे, अमर उजाला, बरेली
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 12 Feb 2022 04:57 AM IST
सार
बरेली कैंट सीट पर मतदाताओं की चुप्पी प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ा रही है। भाजपा यहां से पिछले दो चुनाव जीत चुकी है। इस बार समीकरण बदले हुए हैं।
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बसपाः अनिल कुमार, भाजपाःसंजीव अग्रवाल, कांग्रेसः हाजी इस्लाम बाबू, सपाः सुप्रिया ऐरन।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
कैंट सीट पर इस बार मुकाबला रोचक होगा। जनता मुद्दों पर चर्चा तो कर रही है, लेकिन प्रत्याशी जब वोट मांगने जाते हैं तो वे शांत रहते हैं। न कोई नाराजगी, न मांग। सिर्फ हाथ जोड़ लेते हैं। इस चुप्पी को भांपने में सियासी पंडित भी मात खा रहे हैं। भाजपा यहां से पिछले दो चुनाव जीत चुकी है। इस बार समीकरण बदले हुए हैं। जीत की हैट्रिक लगाना किसी चुनौती से कम नहीं है। माना जा रहा है कि अंतिम समय में जीत का सेहरा बांधने में जातीय समीकरण ज्यादा प्रभावी होंगे।
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राजनीति की हवा बदलने के साथ कैंट सीट का विधायक भी हमेशा बदलता रहा। आजादी के बाद सात बार इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा, लेकिन इसके बाद मतदाता हर बार अलग-अलग विधायक चुनते रहे। दो बार सपा, एक बार बसपा और एक बार निर्दलीय के पास यह सीट रही। परिसीमन बदलने के बाद यह सीट भाजपा ने जीती। 2012 में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर राजेश अग्रवाल ने इस सीट पर पहला चुनाव जीता। 2017 में भी उनका कब्जा रहा।
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अब समझिए 2022 के बदले हुए समीकरणों को। 2017 में भाजपा के राजेश अग्रवाल यहां से जीते। इस बार भाजपा ने उनका टिकट काटकर संजीव अग्रवाल को मैदान में उतारा है। पिछले चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन में यहां सपा का कोई प्रत्याशी नहीं था। कांग्रेस ने चुनाव लड़ा था। इस बार सपा से सुप्रिया ऐरन मैदान में हैं। वह पूर्व मेयर भी रही हैं और उनके पति प्रवीण सिंह ऐरन इसी सीट से विधायक रह चुके हैं। कांग्रेस ने हाजी इस्लाम बब्बू को उतारा है, तो बसपा ने अनिल कुमार वाल्मीकि को टिकट दिया है।
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वैश्य मतों में बंटवारे की लिखी जा चुुकी है पटकथा : भाजपा और सपा के प्रत्याशी वैश्य बिरादरी से हैं। कांग्रेस ने मुस्लिम प्रत्याशी पर दांव लगाया है। बसपा अनुसूचित जाति के सहारे मैदान में है। सभी राजनीतिक दल अपने पक्ष में मतदाताओं को लामबंद करने के लिए ध्रुवीकरण की कोशिश में जुटे हैं। भाजपा प्रत्याशी जहां कानून-व्यवस्था के मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहे हैं, तो शहर में स्मार्ट सिटी के कार्यों की ओर ध्यान खींचकर उन्हीं योजनाएं के भरोसे कैंट का भविष्य बता रहे हैं। वहीं, सपा प्रत्याशी पूर्व में मेयर रही हैं और उनके पति विधायक व सांसद रहे हैं। वह अपने और पति के समय में कराए
गए कार्यों को जनता को बता रही हैं और समस्याओं पर फोकस कर रही हैं। बसपा प्रत्याशी काडर वोट के साथ अन्य बिरादरी में पहुंच रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी पार्टी के अतीत का हवाला देकर वोट मांग रहे हैं। फिलहाल मतदाताओं की चर्चाओं में भाजपा और सपा के बीच ही टक्कर चल रही है। समीकरणों की बात करें तो यहां मुस्लिम और वैश्य मतदाता निर्णायक हैं। वे ही हवा का रुख तय करेंगे।
पर...अपने मुद्दों पर मुखर हैं मतदाता
चुनाव की बात छिड़ते ही बांस मंडी के कारोबारी रघुवंश दयाल कहते हैं, हम तो जलभराव की समस्या से निजात दिलाने वाले को वोट करेंगे। जरा सी बारिश हुई नहीं कि बांस मंडी में पानी भर जाता है। सुभाष नगर के मोहम्मद रफीक कहते हैं, पूरे शहर में नई सड़क, गलियां बन रही हैं। बस सुभाष नगर पुलिया पर कोई फैसला नहीं हुआ। न जाने कितने बह गए। कुतुबखाना बाजार के व्यापारी मौजूदा
सरकार से उखडे़े हुए हैं। उनका कहना है कि यहां फ्लाईओवर की जरूरत नहीं थी। फिर भी बनाया जा रहा है। हम नोटा दबाएंगे। श्यामगंज के राजेश कहते हैं, विकास हुआ है। काम हो रहा है। इस बार भी चुनावी मुद्दा सिर्फ विकास ही रहेगा। विकास पर ही वोट किया जाएगा। बता दें कि इस विधानसभा का ज्यादातर इलाका शहरी है।
सुप्रिया के कदम ने चुनावी जंग को बनाया रोचक
सुप्रिया ऐरन के राजनीतिक कदम से कैंट विधान सभा क्षेत्र में मुकाबला रोचक हो गया। सपा से उनका टिकट फाइनल होते ही क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। उनका और उनके पति प्रवीन सिंह ऐरन का क्षेत्र में ठीक-ठाक जनाधार है। प्रवीन कैंट से दो बार विधायक और बरेली से सांसद रह चुके हैं। लोकसभा चुनावों में भी उनका कैंट से अच्छा प्रदर्शन रहा। सपा के परंपरागत वोटों और
ऐरन की अपनी पकड़ की वजह से इस सीट पर मुकाबला कड़ा हो गया है।
ये हैं प्रमुख मुद्दे
- आधे से अधिक हिस्से में सीवर लाइन न होना बड़ी समस्या
- बारिश के दिनाें में जलभराव
- बस रही नई आबादी के लिए मूलभूत सुविधाएं
वोटों का गणित
3,74,239
कुल मतदाता
मुस्लिम 1 लाख
वैश्य 75 हजार
एससी 30 हजार
ब्राह्मण 20 हजार
कुर्मी 15 हजार
कश्यप 15 हजार
कायस्थ 10 हजार
सिख 7 हजार
यादव 5 हजार (आंकड़े लगभग में। बाकी अन्य जातियां)
ऐरन की अपनी पकड़ की वजह से इस सीट पर मुकाबला कड़ा हो गया है।
ये हैं प्रमुख मुद्दे
- आधे से अधिक हिस्से में सीवर लाइन न होना बड़ी समस्या
- बारिश के दिनाें में जलभराव
- बस रही नई आबादी के लिए मूलभूत सुविधाएं
वोटों का गणित
3,74,239
कुल मतदाता
मुस्लिम 1 लाख
वैश्य 75 हजार
एससी 30 हजार
ब्राह्मण 20 हजार
कुर्मी 15 हजार
कश्यप 15 हजार
कायस्थ 10 हजार
सिख 7 हजार
यादव 5 हजार (आंकड़े लगभग में। बाकी अन्य जातियां)