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राम मंदिर: राम ज्योति लेने अयोध्या पहुंचीं मुस्लिम महिलाएं, सुबह ज्योति लेकर काशी के लिए हुईं रवाना

Sun, 07 Jan 2024 08:00 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला संवाद, अयोध्या
अमर उजाला संवाद, अयोध्या Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 07 Jan 2024 08:00 AM IST
सार

हर वर्ष रामनवमी और दीपावली पर सैकड़ों मुस्लिम महिलाओं के साथ प्रभु श्रीराम की महाआरती करती हैं। नाजनीन ने हनुमान चालीसा को उर्दू में लिखा है। डॉ. नजमा ने बीएचयू से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पीएचडी की है।

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Ram Temple: Muslim women reached Ayodhya to collect Ram Jyoti
मुस्लिम महिलाओं को राम ज्योति सौंपते महंत शंभू देवाचार्य - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काशी से निकली राम ज्योति यात्रा शनिवार की देर शाम अयोध्या पहुंची। रामपंथ की ओर से आयोजित यात्रा का नेतृत्व कर रहीं मुस्लिम महिला फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नाजनीन अंसारी को महंत शंभू देवाचार्य ने राम ज्योति भेंट की। इसे पाकर आह्लादित नाजनीन रविवार को सुबह अयोध्या से काशी के लिए रवाना होंगी। उनका कहना है कि राम ज्योति से काशी के घर जगमगाएंगे और नफरत का अंधकार मिटेगा। अंसारी ने कहा कि लोग धर्म बदल सकते हैं लेकिन पूर्वज, परंपरा और संस्कृति को नहीं बदल सकते। भगवान राम हमारे पूर्वज हैं। उनका मंदिर बनने से हम बहुत खुश हैं। राम के आदर्श और चरित्र आज पूरी दुनिया की जरूरत बन गए हैं। राम का नाम दुनिया को आतंकवाद और हिंसा से मुक्त कराने में सक्षम है। राम ज्योति घरों को ही नहीं बल्कि लोगों की आत्मा को भी प्रकाशित करेगी।

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डॉ. नजमा परवीन ने कहा कि यह देश राम का है। राम ही राष्ट्र हैं, बिना उनके भारत की महान संस्कृति की व्याख्या नहीं हो सकती। शांति और एकता के लिए राम ज्योति घर-घर में जलना जरूरी है। मुसलमानो को इस खुशी में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए ताकि उन्हे भारतीय होने पर गर्व हो सके। भगवान राम की हम संतान हैं। उनसे किसी कीमत पर अलग नहीं हो सकते हैं। काशी से अयोध्या के बीच में कई स्थानों पर मुस्लिम समाज के लोगों ने यात्रा में शामिल सदस्यों का स्वागत किया। सात जनवरी को काशी के सुभाष भवन में विशाल भारत संस्थान और रामपंथ की ओर से ''पूर्वजों से जुड़ो, राम से जुड़ो'' कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश के सैकड़ों मुस्लिम कार्यकर्ता शामिल होंगे।
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कौन हैं काशी से पहुंची मुस्लिम महिलाएं
काशी की रहने वाली नाजनीन अंसारी और डॉ. नजमा परवीन पिछले 17 वर्षों से रामभक्ति में रमी हैं। वर्ष 2006 में जब आतंकियों ने काशी के संकट मोचन मंदिर में बम ब्लास्ट करके हिंदुस्तान का ताना बाना बिगाड़ने का कुचक्र रचा तो उस समय नाजनीन और डॉ. नजमा ने 70 मुस्लिम महिलाओं के साथ संकट मोचन मंदिर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ किया था। इसके माध्यम से हिंदू व मुसलमानों के बीच उपजे नफरत को खत्म करने का प्रयास किया। हर वर्ष रामनवमी और दीपावली पर सैकड़ों मुस्लिम महिलाओं के साथ प्रभु श्रीराम की महाआरती करती हैं। नाजनीन ने हनुमान चालीसा को उर्दू में लिखा है। डॉ. नजमा ने बीएचयू से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पीएचडी की है।

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