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राज्यसभा व विधान परिषद चुनाव: जानें, क्या है पार्टियों का हाल

Sat, 04 Jun 2016 01:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 04 Jun 2016 01:55 AM IST
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Rajya sabha and MLC election.
- फोटो : amar ujala

कोई नामांकन पत्र वापस नहीं होने से विधान परिषद और राज्यसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं। विधायकों की जोड़-तोड़ और खरीद-फरोख्त की अटकलें शुरू हो गई हैं। विधान परिषद व राज्यसभा चुनाव के लिए क्रमश: 10 व 11 जून को मतदान होगा।

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विधान परिषद की 13 सीटों के लिए 14 और राज्यसभा की 11 सीटों के लिए 12 प्रत्याशी मैदान में हैं। दोनों ही उच्च सदनों के चुनाव में एक-एक प्रत्याशी की हार तय है। राज्यसभा के लिए भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति महापात्रा ने सभी दलों के समीकरणों को बिगाड़ दिया है।
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भाजपा राज्यसभा के लिए एक प्रत्याशी आसानी से जिता लेगी और बचे हुए वोट प्रीति को देगी। प्रीति की जीत तभी हो सकती है जब उन्हें निर्दलीयों के साथ ही दूसरे दलों के कुछ विधायकों का समर्थन मिले। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए पहली वरीयता के 29 वोटों की जरूरत है। इस आंकड़े को पाने के लिए प्रीति महापात्रा हर हथकंडा अपनाने को तैयार हैं।
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चर्चा है कि कुछ भाजपा नेता दूसरे दलों के विधायकों से उनकी बातचीत करा रहे हैं। कुछ को विधानसभा चुनाव का टिकट तो कुछ को दूसरे आश्वासनों से लुभाया जा रहा है। भाजपा नेता दूसरे दलों के विधायकों से संपर्क साध रहे हैं। उनकी नजरें सभी दलों पर लगी हैं।

सपा की स्‍थिति मजबूत, अतिरिक्त छह वोट जरूरी

Rajya sabha and MLC election.

सपा विधान परिषद के आठ प्रत्याशी जिताने की स्थिति में है, लेकिन राज्यसभा के 7 प्रत्याशी जिताने के लिए उसे 6 अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी।

सपा के 229 विधायक हैं और उसे पीस पार्टी के दो और एक निर्दलीय विधायक का समर्थन हासिल है। राज्यसभा की 7 सीटें जीतने के लिए सपा को पहली वरीयता के 239 वोटों की जरूरत है।

सपा के निलंबित विधायक रामपाल यादव बागी तेवर अख्तियार किए हुए हैं। वे प्रीति महापात्रा के प्रस्तावक भी बने हैं। उनके अलावा भी एक-दो और विधायक सपा के संदिग्धों की श्रेणी में हैं। उन पर लगातार नजर रखी जा रही है। सपा की उम्मीदें रालोद पर टिकी हुई हैं।

भाजपा ने की कपिल सिब्बल का खेल बिगाड़ने की कोशिश

Rajya sabha and MLC election.

भाजपा ने प्रीति को चुनाव मैदान में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतारकर कांग्रेस के कपिल सिब्बल का गणित बिगाड़ने की योजना बनाई है।

भाजपा के रणनीतिकार, कांग्रेस विधायकों में तोड़फोड़ का दावा कर सिब्बल को हराने की उम्मीदें संजोए बैठे हैं। दरअसल, कांग्रेस के 29 विधायक हैं।

सिब्बल की जीत के लिए उसे कम से कम पांच अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी। कांग्रेस के कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग की आशंका के चलते डैमेज कंट्रोल की तैयारी शुरू हो गई है। कांग्रेस की उम्मीदें बसपा के 12 अतिरिक्त वोटों और रालोद के आठ विधायकों पर टिकी हैं।

बसपा को आसान जीत, पर तीन अतिरिक्त वोटों की जरूरत

Rajya sabha and MLC election.

बसपा राज्यसभा के दोनों प्रत्याशियों को आसानी से जिता लेगी, लेकिन विधान परिषद में तीन सीट जीतने के लिए सात और वोटों की जरूरत है।

बसपा निर्दलीयों, छोटे दलों व रालोद के संपर्क में हैं। बसपा में भी कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग का अंदेशा है। एक-दो विधायक खुलकर बागी तेवर अख्तियार कर रहे हैं। उसे भी डैमेज कंट्रोल करना है।

रालोद विधायकों का बढ़ा महत्व
भले ही रालोद के केवल आठ विधायक हैं, लेकिन चुनाव होने के कारण उनका महत्व बढ़ गया है। सपा और कांग्रेस को राज्यसभा तथा बसपा को विधान परिषद चुनाव में रालोद की जरूरत है।

भाजपा नेता भी रालोद विधायकों पर डोरे डाल रहे हैं। ऐसे में रालोद के सामने अपने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती है।

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